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NFHS-6 रिपोर्ट ने दिखाई बिहार की बदली तस्वीर, बेटियों की पढ़ाई में आया बड़ा सुधार

पटना. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-6 की रिपोर्ट ने बिहार के सामाजिक और शैक्षणिक विकास की सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में छह वर्ष और उससे अधिक आयु की स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या 61.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.1 प्रतिशत हो गई है। यानी छात्राओं की स्कूलिंग में करीब पांच…

NFHS-6 रिपोर्ट ने दिखाई बिहार की बदली तस्वीर, बेटियों की पढ़ाई में आया बड़ा सुधार

पटना.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-6 की रिपोर्ट ने बिहार के सामाजिक और शैक्षणिक विकास की सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में छह वर्ष और उससे अधिक आयु की स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या 61.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.1 प्रतिशत हो गई है। यानी छात्राओं की स्कूलिंग में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके मुकाबले पुरुषों में 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या 42.8 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हुई है, जो करीब तीन प्रतिशत की वृद्धि है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, साइकिल योजना और सामाजिक जागरूकता अभियानों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। राजधानी पटना समेत राज्य के शहरी क्षेत्रों में लड़कियों का विद्यालयों और कालेजों में नामांकन लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार में महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 33.1 प्रतिशत महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी की है, जबकि एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 28.8 प्रतिशत था। यानी लगभग 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बैंकिंग और डिजिटल पहुंच में भी सुधार
एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के अनुसार बिहार में 98.5 प्रतिशत परिवारों के कम से कम एक सदस्य के पास बैंक या डाकघर खाता है, जबकि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 95.5 प्रतिशत था। वहीं इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 20.6 से बढ़कर 58.4 हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 35.4 प्रतिशत से बढ़कर 78.1 प्रतिशत पहुंच गया है। 

बाल विवाह और प्रजनन दर में कमी
रिपोर्ट के अनुसार 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं का प्रतिशत, जिनकी शादी 18 वर्ष से पहले हुई थी, 40.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत हो गया है। वहीं कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 3.0 से घटकर 2.7 पर पहुंच गई है। इसे जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार
बिहार में बिजली सुविधा वाले घरों की संख्या 96.3 प्रतिशत से बढ़कर 98.5 प्रतिशत हो गई है। बेहतर पेयजल सुविधा प्राप्त करने वाली आबादी का प्रतिशत 99.2 से बढ़कर 99.8 हो गया है। स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत भी 17.4 से बढ़कर 21.1 दर्ज किया गया है।

पटना में दिख रहा बदलाव
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटना में छात्राओं की स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थानों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और बेटियों को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एनएफएचएस-6 के आंकड़े संकेत देते हैं कि बिहार में सामाजिक विकास की रफ्तार तेज हुई है और इसमें महिलाओं की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा रही है।

बदलाव की गवाही देते आंकड़े
स्कूल जाने वाली लड़कियां : 61.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.1 प्रतिशत
10 वर्ष या अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाएं : 28.8 प्रतिशत से बढ़कर 33.1 प्रतिशत
10 वर्ष या अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त पुरुष : 42.8 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत
इंटरनेट उपयोग करने वाली महिलाएं : 20.6 प्रतिशत से बढ़कर 58.4 प्रतिशत
बैंक खाता वाले परिवार : 95.5 प्रतिशत से बढ़कर 98.5 प्रतिशत
बाल विवाह (18 वर्ष से पहले) : 40.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत
कुल प्रजनन दर : 3.0 से घटकर 2.7

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