खुद को ‘डीलमेकर’ और नेतन्याहू को ‘हार्डलाइनर’ बता रहे ट्रंप? वायरल दावे से सियासी हलचल

यरुशलम तुम्हारा दिमाग खराब हो चुका है, अगर मैं न होता, तो तुम अब तक जेल में होते. ये मैं हूं जो तुम्हारी जान बचा रहा हूं. अब हर कोई तुमसे नफरत करता है. इसी वजह से हर कोई इजरायल से भी नफ़रत करता है। ये दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्राध्यक्ष की भाषा तो…

खुद को ‘डीलमेकर’ और नेतन्याहू को ‘हार्डलाइनर’ बता रहे ट्रंप? वायरल दावे से सियासी हलचल

यरुशलम

तुम्हारा दिमाग खराब हो चुका है, अगर मैं न होता, तो तुम अब तक जेल में होते. ये मैं हूं जो तुम्हारी जान बचा रहा हूं. अब हर कोई तुमसे नफरत करता है. इसी वजह से हर कोई इजरायल से भी नफ़रत करता है। ये दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्राध्यक्ष की भाषा तो कतई नहीं है. तो फिर क्या हुआ कि ट्रंप अपने सबसे करीबी साथी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर इस तरह बिफर गए। 

हैरान करने वाले ये जुमले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की है. जो उन्होंने फोन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेहद गुस्से में कहे. इस टकराव का खुलासा अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने अपनी एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में की है। 

ये झगड़ा नहीं स्ट्रैटेजिक डिफरेंस है
तो क्या अमेरिकी राष्ट्रपति सचुमच इजरायली प्रधानमंत्री से नाराज है. ट्रंप और नेतन्याहू के बीच टकराव मुख्य रूप से ईरान डील और लेबनान/हेजबुल्लाह पर है. यह कोई पुराना व्यक्तिगत झगड़ा नहीं, बल्कि ईरान-इजराइल-यूएस टेंशन के बीच का स्ट्रैटेजिक डिफरेंस है। 

दरअसल ट्रंप की प्राथमिकता अब एक ऐसी डील है जिसे वह अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें. ट्रंप ईरान के साथ डील में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से बड़ी लकीर खींचना चाहते हैं। 

उन्होंने हाल ही में दावा किया कि ईरान के साथ समझौता निकट हो सकता है और बातचीत तेज गति से चल रही है. लेकिन ये वार्ता बार बार डिरेल हो रही है.  दूसरी ओर इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों और लेबनान में बढ़ते संघर्ष ने इन वार्ताओं को बार-बार बाधित किया है. ईरान ने भी आरोप लगाया है कि इजरायली हमले कूटनीतिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं। 

नेतन्याहू 'हार्डलाइनर' और ट्रंप 'डीलमेकर'
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की रणनीति दोहरी हो सकती है. पहला वह ईरान को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत के लिए गंभीर है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला पक्ष हमेशा वॉशिंगटन नहीं है. तेल अवीव भी ऐसा करता है. दूसरा वह नेतन्याहू पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाना चाहते हैं कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयां अमेरिकी कूटनीतिक लक्ष्यों को बाधित न करें। 

कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि ट्रंप को लगता है कि समझौता उनकी राजनीतिक जीत साबित हो सकता है, तो वह नेतन्याहू को "कठोर नेता" की छवि में दिखाकर खुद को "डीलमेकर" के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं. इसलिए वह ट्रंप को कथित रूप से कड़वे शब्द कह रहे हैं। 

एक्सियोस के अनुसार लेबनान में ऑपरेशन के लिए ट्रंप ने नेतन्याहू को खरी-खोटी सुनाई और अपशब्दों तक का प्रयोग कर डाला. ट्रंप इजरायल द्वारा लेबनान में शुरू की जा रही सैन्य कार्रवाई से बेहद खफा थे. खासकर बेरूत पर हमले की योजना से. इजरायल का ये कदम  ट्रंप की ईरान के साथ चल रही डिप्लोमेसी को बर्बाद कर सकती थी। 

इजरायल को सता रहा अलग डर
वहीं इजरायली पक्ष को डर है कि ट्रंप ईरान को कमजोर करने के बजाय अस्थायी डील पर राजी हो जाएंगे, जिससे तेहरान को सांस लेने का मौका मिलेगा और हेजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी मजबूत होंगे। 

ट्रंप ईरान के साथ अपनी डील को पूरा करने के लिए इजरायल की कार्रवाइयों को समस्या के रूप में पेश कर सकते हैं. इससे अमेरिकी जनता और गल्फ सहयोगियों में इजरायल पर दबाव बढ़ेगा। 

ट्रंप के लिए ईरान युद्ध जल्द खत्म करना राजनीतिक जरूरत है. अमेरिका की इकोनॉमी, तेल कीमतें और 2026 के मध्यावधि चुनावों को देखते हुए ट्रंप इसे किसी भी कीमत पर पूरा करने चाह रहे हैं। 

इजरायल को 'प्रॉब्लम' दिखाकर ट्रंप ईरान पर भी डील के लिए राजी होने का अप्रत्यक्ष दबाव डाल रहे हैं. इसके बाद ट्रंप के पास इजरायल को ये कहने का अधिकार होगा कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इजरायल को लेबनान पर हमला करने से रोक दिया अब ईरान की बारी है कि वो डील के शर्तों पर राजी हो। 

ईरान बातचीत तेज करने का दावा कर रहा है, लेकिन लेबनान में छोटे-मोटे हमले जारी हैं. ट्रंप की 'आर्ट ऑफ डील' फिर परीक्षा की कसौटी पर है. क्या वे इजरायल को काबू में रख ईरान को मना पाएंगे, या क्षेत्र फिर आग की चपेट में आ जाएगा? 

 

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