पटना
बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर मची सियासी हलचल के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस समय जबरदस्त चर्चाओं में हैं। दरअसल, चर्चाओं की सबसे बड़ी वजह यह है कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश वर्तमान में सरकार में मंत्री हैं, लेकिन इस बार एमएलसी चुनाव में एनडीए (NDA) गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है। टिकट न मिलने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह बात तेजी से फैल रही है कि दीपक प्रकाश को जल्द ही अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा या उन्हें पद से हटना पड़ेगा। इन तमाम विपरीत चर्चाओं और झटकों के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में एक बड़ा राजनीतिक दावा ठोक दिया है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि रालोमो बिहार में सत्ता की मजबूत हिस्सेदार है और आगे भी सरकार में उनकी यह हिस्सेदारी पूरी मजबूती के साथ बनी रहेगी। हालांकि, बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश अभी बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। नियम के मुताबिक, मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के छह महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना जरुरी है। लेकिन अब एमएलसी चुनाव में एनडीए ने उन्हें सीट ही नहीं दी है। इसके बाद निकट भविष्य में चुनाव भी नहीं है। जाहिर है ऐसे में दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर बने रहना मुश्किल है।
पटना महाधिवेशन में विधायक आलोक कुमार सिंह बने नए प्रदेश चीफ
उपेंद्र कुशवाहा रविवार को पटना के रवींद्र भवन में आयोजित पार्टी के राज्य महाधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने गठबंधन और सत्ता में बने रहने के दावे के साथ-साथ संगठन को लेकर भी एक बहुत बड़ी घोषणा की। उपेंद्र कुशवाहा ने सार्वजनिक मंच से पार्टी के नए बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विधायक आलोक कुमार सिंह के नाम का औपचारिक ऐलान किया। आलोक कुमार सिंह को बिहार संगठन की कमान सौंपते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी अब नए तेवर और कलेवर के साथ सूबे के कोने-कोने में अपनी पकड़ मजबूत करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत को मिले डिप्टी सीएम की कमान:उपेंद्र कुशवाहा
इसी महाधिवेशन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार सरकार के आंतरिक समीकरणों को लेकर भी एक बड़ा और दिलचस्प बयान देकर राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू नेतृत्व को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने पुरजोर तरीके से पैरवी करते हुए कहा कि अगर निशांत को डिप्टी सीएम की कमान सौंपी जाती, तो यह पूरी तरह से खुद जेडीयू के राजनीतिक हित की बात होती। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग बिहार की सियासत में पहली बार नहीं उठी है, बल्कि इससे पहले भी जेडीयू के ही कई जमीनी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता लगातार उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी देने की वकालत करते रहे हैं।
















