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बाढ़ के खतरे को रोकने की तैयारी, मानसून से पहले नालों से निकाली जा रही गाद

चंडीगढ़. मानसून 20 दिन बाद शहर में दस्तक दे देगा। पहाड़ों से बहकर आने वाला पानी सुखना चो, पटियाला की राव और एन चो से होकर चंडीगढ़ के बीच में से गुजरता है। पिछले कई वर्षाें से यह पानी बाढ़ का रूप लेकर शहर का जीवन प्रभावित करने लगा है। ट्राइसिटी के  फेफड़े  मोरनी हिल्स …

बाढ़ के खतरे को रोकने की तैयारी, मानसून से पहले नालों से निकाली जा रही गाद

चंडीगढ़.

मानसून 20 दिन बाद शहर में दस्तक दे देगा। पहाड़ों से बहकर आने वाला पानी सुखना चो, पटियाला की राव और एन चो से होकर चंडीगढ़ के बीच में से गुजरता है। पिछले कई वर्षाें से यह पानी बाढ़ का रूप लेकर शहर का जीवन प्रभावित करने लगा है।

ट्राइसिटी के  फेफड़े  मोरनी हिल्स  के जंगलों का सर्वे  के लिए   60 रिटायर्ड पटवारी और 4 कानूनगो तैनात करने के आदेश हैं। इसको देखते हुए चंडीगढ़ ने जलीय आपदा से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। इन बरसाती नदियों से बाढ़ आने का मुख्य कारण कमजोर तटबंध, तलहटी में जमी गाद से क्षमता घटना रहे हैं। इस वजह से चंडीगढ़ प्रशासन ने इससे निपटने का प्लान तैयार कर उस पर ग्राउंड स्तर पर कार्य शुरू कर दिया है। सुखना रेगुलेटरी एंड से गाद निकालने की शुरुआत हुई थी। अब पटियाला की राव से भी गाद निकाली जा रही है। सुखना रेगुलेटरी एंड पर गाद निकालने का काम 40 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अब पटियाला की राव से गाद निकालनी शुरू की गई है।

पटियाला की राव भी धनास, खुड्डा लाहौरा, डड्डू माजरा जैसे एरिया को प्रभावित करती है। पानी रेजिडेंशियल एरिया में दाखिल हो जाता है। डंपिंग ग्राउंड का गंदा पानी कालोनी एरिया में घुसने से बीमारी फैलने का डर रहता है। इसी तरह से एन चो रोज गार्डन और शहर के अंदरूरी हिस्से को प्रभावित करता है। अगर रेगुलेटरी एंड और पटियाला की राव की गाद निकल जाती है तो इनकी गहराई बढ़ जाएगी और अत्यधिक पानी आने पर भी वह बाहर नहीं आएगा। साथ ही सुखना चो में भी पानी एकदम से नहीं छोड़ना पड़ेगा।

पंचकूला मोहाली तक को होगा फायदा
इनसे केवल चंडीगढ़ ही पंचकूल और मोहाली तक प्रभावित रहते हैं। सुखना चो में एकदम ज्यादा पानी छोड़ने से जीरकपुर बलटाना का काफी हिस्सा जलमग्न हो गया था। बलटाना पुलिस चौकी तक सुखना चो की वजह से डूब गई थी। आस-पास के एरिया में पानी भर गया था। इतना ही नहीं सुखना चो आगे जाकर घग्गर नदी में ही गिरती है। इससे घग्गर का जलप्रवाह बढ़ने से पंचकूला के एरिया में भी बाढ़ का खतरा रहता है। यूटी चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग विभाग ने सुखना लेक के रेगुलेटर एंड पर सूखे क्षेत्र की डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) का कार्य शुरू किया था। अभी तक रेगुलेटरी एंड से 40 प्रतिशत गाद निकालने का कार्य पूरा किया जा चुका है। विशेषज्ञ एजेंसियों की सिफारिशों के आधार पर सूखे झील क्षेत्र से गाद निकालने और निकाली गई मिट्टी का उपयोग झील के आसपास मौजूद तटबंधों और पैदल मार्गों को मजबूत बनाने में किया जा रहा है। परियोजना के तहत लगभग 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है। कुल मिलाकर करीब 34,000 घन मीटर मिट्टी निकालने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक करीब नौ हजार घन मीटर मिट्टी निकाली जा चुकी है, जिसका उपयोग तटबंधों को सुदृढ़ करने में किया गया है।

पटियाला की राव से निकाली जा रही गाद
पटियाला की राव से आई बाढ़ के कारण पिछले वर्ष डड्डूमाजरा, धनास और आसपास क्षेत्रों में सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हुई थी। इसको देखते हुए गाद निकालने काे मंजूरी मिली है। मंजूरी के बाद मनोनीत पार्षद सतिंदर सिंह सिद्धू ने पटियाला की राव से गाद निकालने का कार्य शुरू कराया। सिद्धू ने कहा कि बाढ़ की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वन विभाग एवं इंजीनियरिंग विभाग को समन्वित कार्रवाई करनी चाहिए। यह कार्य क्षेत्र को बाढ़ से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। हजारों क्यूबिक मिट्टी निकाली जाएगी इससे तटबंध मजबूत होंगे। साथ ही जल सहेजने की क्षमता बढ़ेगी।

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