SBI रिपोर्ट में खुलासा: पारंपरिक अपराध कम हुए, साइबर अपराधों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली देश में अपराध की तस्वीर बदल रही है. एक तरफ पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अपराधियों के नए तरीके सामने आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल अपराध दर घटी है,…

SBI रिपोर्ट में खुलासा: पारंपरिक अपराध कम हुए, साइबर अपराधों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली
देश में अपराध की तस्वीर बदल रही है. एक तरफ पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अपराधियों के नए तरीके सामने आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल अपराध दर घटी है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में अपराध, अर्थव्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और तकनीक के बीच के रिश्ते पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। 

SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2024 के दौरान 58.86 लाख संज्ञेय (Cognizable) अपराध दर्ज किए गए. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत कम है. देश की कुल अपराध दर भी घटकर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से 418.9 रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक निवेश, डिजिटलीकरण और निगरानी तंत्र में सुधार इसके प्रमुख कारण हैं। 

हालांकि कुल अपराध कम हुए हैं, लेकिन साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में साइबर क्राइम के मामले 1 लाख के आंकड़े को पार कर सकते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भी थोड़ी कमी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में ऐसे 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 4.41 लाख रह गए. यह करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि चुनौती का स्तर अभी भी बहुत बड़ा है और इसे सफलता नहीं माना जा सकता। 

एएनआई के मुताबिक, SBI का मानना है कि UPI, FASTag और डिजिटल निगरानी जैसे साधनों ने अपराधियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. डिजिटल ट्रेल की वजह से अपराध करने वालों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना पहले की तुलना में अधिक हो गई है. इससे अपराध करने की लागत और खतरा दोनों बढ़े हैं। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन क्षेत्रों में अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वहां अपराध में हल्की गिरावट देखने को मिली है. वर्ष 2022 से 2024 के बीच CCTV कैमरों और अपराध दर के बीच नकारात्मक संबंध (-0.148) दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि निगरानी बढ़ने से अपराध कम होने की संभावना बढ़ती है। 

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के सभी 100 स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) संचालित किए जा रहे हैं. ये सेंटर डेटा, तकनीक, निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़ते हैं. इसका मकसद शहरी प्रबंधन को बेहतर बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। 

रिपोर्ट के अनुसार 100 स्मार्ट शहरों में 84,000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 1,884 इमरजेंसी कॉल बॉक्स और लगभग 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं. SBI का कहना है कि ये सुविधाएं लोगों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पकड़े जाने का डर बढ़ाती हैं। 

रिपोर्ट में अपराध और आर्थिक विकास के बीच दिलचस्प संबंध का उल्लेख किया गया है. अध्ययन बताते हैं कि अपराध बढ़ने से निवेश प्रभावित होता है, व्यापारिक लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे विकास की गति धीमी हो सकती है और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है। 

SBI के अनुसार प्रति लाख आबादी पर IPC/BNS अपराध दर में 1 प्रतिशत की कमी आने पर अल्पकाल में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 0.11 प्रतिशत बढ़ सकती है. यानी अपराध कम होने का फायदा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था और विकास दर को भी मिलता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध श्रम बाजार में बाधा पैदा करते हैं और महिला कार्यबल की भागीदारी को प्रभावित करते हैं. NCRB 2024 के अनुसार पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,227 मामले और 1,21,166 पीड़ित दर्ज किए गए। 

वहीं NFHS-5 के आधार पर अनुमान है कि करीब 27.88 करोड़ विवाहित महिलाओं में से 24 प्रतिशत ने पिछले 12 महीनों में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया. इसका अनुमानित वार्षिक बोझ करीब 6.69 करोड़ महिलाओं तक पहुंचता है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और श्रम नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

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