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मंडलीय बैठकों में सड़क-पुल परियोजनाओं की प्राथमिकता तय

लखनऊ  अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार विकास कार्यों को रफ्तार देने में जुट गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलीय दौरे शुरू कर दिए हैं। इन दौरों में वे जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर सड़कें व पुल पुलियों के निर्माण कार्यों के संबंध में उनकी प्राथमिकताएं समझ रहे हैं।…

मंडलीय बैठकों में सड़क-पुल परियोजनाओं की प्राथमिकता तय

लखनऊ
 अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार विकास कार्यों को रफ्तार देने में जुट गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलीय दौरे शुरू कर दिए हैं। इन दौरों में वे जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर सड़कें व पुल पुलियों के निर्माण कार्यों के संबंध में उनकी प्राथमिकताएं समझ रहे हैं। लोक निर्माण विभाग जुलाई से ही नई योजनाओं के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल में जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक मंडलीय दौरे की शुरूआत कर दी है। रविवार को वे गोरखपुर में गोरखपुर मंडल के जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री का मंडलीय दौरा इस महीने के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।

इन बैठकों के माध्यम से चालू वित्तीय वर्ष में विभागीय बजट से नई सड़कें व पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। जिसके आधार पर पीडब्ल्यूडी नए निर्माण कार्यों को तेजी से शुरू कराएगा।

पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव अजय चौहान के मुताबिक जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर सभी जिलों की कार्ययोजना आ गई है। मुख्यमंत्री की मंडलीय बैठकें पूरी हो जाने के बाद चयनित कार्यों का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा।

सूत्र बताते हैं कि जुलाई से ही विभाग चयनित कार्यों के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया का काम शुरू कर देगा, ताकि सितंबर से धरातल पर युद्धस्तर पर काम शुरू कराया जा सके। इस वित्तीय वर्ष में पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्यो के लिए 35,156 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिसमें से 11,718 करोड़ रुपये से नए कार्यों के लिए है।

शेष बजट पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर खर्च किया जाना है। चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई सड़कें व पुल-पुलियों का काम शुरू किया जाना है।

विभाग ने तय किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली योजनाओं को 50 प्रतिशत तथा इससे बड़ी योजनाओं के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक बजट जारी किया जाएगा।

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