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‘कांग्रेस अपनी गलती से हारी’, राज्यसभा सांसद महेश केवट का विपक्ष पर तीखा प्रहार

भोपाल  कांग्रेस की सीनियर लीडर और तेलंगाना की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने से बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए।मीनाक्षी चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गईं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। अब वे हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटीशन फाइल करेंगी। केवट बोले भाजपा के…

‘कांग्रेस अपनी गलती से हारी’, राज्यसभा सांसद महेश केवट का विपक्ष पर तीखा प्रहार

भोपाल 

कांग्रेस की सीनियर लीडर और तेलंगाना की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने से बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए।मीनाक्षी चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गईं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। अब वे हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटीशन फाइल करेंगी।

केवट बोले भाजपा के नेतृत्व, प्रधानमंत्री मोदी जी, अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को एक सामान्य कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए हार्दिक धन्यवाद।
आप सन् 2022 की बात कर रहे हैं। मैं लगातार भाजपा का काम करता रहा हूं और पार्टी हमें काम देती रही। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुझे प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन ग्रुप का सदस्य बनाया था। उस ग्रुप में रहकर मैंने प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन का काम किया है।

राज्यसभा जाने को लेकर महेश केवट ने कहा कि रामजी की कृपा हुई है। अब पार्टी जैसा कहेगी वैसा करूँगा। 

बीजेपी में खुशी की लहर 
महेश केवट के सांसद बनने को लेकर पार्टी में जहां खुशियां मनाई जा रही है। तो वही मीनाक्षी नटराजन की हार को लेकर महेश केवट ने कहा कि कांग्रेस के लोगों ने तथ्य छुपाये जिसके कारण वो हारे है। महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, माझी, मल्लाह, रैकवार, भोई समाज के पहले राज्यसभा सांसद है। 

महेश 1995 में बीजेपी में गए थे 
बता दें कि 1984 से आरएसएस से जुड़े रहे हैं. वह 1995 में बीजेपी में गए थे। महेश केवट बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं. वह पार्षद रहे हैं. ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रहे हैं और अब राज्यसभा जा रहे हैं. 52 साल के महेश केवट ओरछा के रहने वाले हैं। 

पत्नी हार गई थी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव
महेश केवट 2000 से लेकर 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे। महेश की पत्नी ने ओरछा नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

हमें तो ऐसी जानकारी नहीं थी। अगर कागज-पत्रों में किसी जिले के पूर्ववर्ती किसी व्यक्ति ने झूठी जानकारी दी हो तो पता नहीं। हम भाजपा के खिलाफ कभी चुनाव नहीं लड़े। जब तक भाजपा ने हमें अधिकृत नहीं किया, तब तक कभी चुनाव नहीं लड़ा। पार्टी ने जो काम बताया, हम काम करते रहे।2023 के बाद लगातार हम पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले में जब भी मुख्यमंत्री जी प्रवास पर आते थे, सरकारी कार्यक्रम हों या पार्टी के कार्यक्रम, हम हमेशा मंचों पर रहे।

अगर गलती से कुछ मामला आया होगा तो पार्टी ने उस पर संज्ञान लेकर पटाक्षेप किया होगा। पार्टी की नजर हर कार्यकर्ता पर रहती है। ऊपर वाले ईश्वर की नजर हर प्राणी पर रहती है। हम सही करेंगे तो सही परिणाम मिलेगा, यदि गलत करेंगे तो गलत मिलेगा।

केवट बोले भाजपा का अद्भुत नेतृत्व है। कब किस कार्यकर्ता को कहां काम पर लगाना है, यह भाजपा से अच्छा कोई सोच ही नहीं सकता। हम किशोरावस्था से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में राष्ट्रसेवा के लिए काम करते रहे।

शुरुआत में तो हम खेल और व्यायाम में ही रहे। उसके बाद संघ में राष्ट्रीयता की भावना पैदा हुई और उस विचारधारा से हम आए। फिर विद्यार्थी परिषद में काम करते रहे। फिर टीकमगढ़-निवाड़ी संयुक्त जिले में भाजपा के मंत्री रहे, उपाध्यक्ष और दो बार प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रहे।भाजपा कब किसको क्या काम देना है, वो देती है। पार्टी आपको जो काम दे रही है, उस पर ध्यान देते हैं तो हमारी पार्टी के नेता उस पर नजर रखते हैं।

 जब भाजपा ने हमें प्रत्याशी बनाया तो यह मानकर चलिए कि भाजपा जो तय करती है, पार्टी के पास पर्याप्त समर्थन था। केंद्र में मोदी जी की और राज्य में मोहन यादव की सरकार विकास के काम और विकसित भारत 2047 बनाने के लिए काम कर रही है। विधायक किसी भी पार्टी के हों, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिनके मन में सपना होता है कि हमारा मप्र विकसित हो जाए।

मोहन जी अच्छा काम कर रहे हैं तो हम उनके हाथ में हाथ बंटाएं। भाजपा के पास पूरा समर्थन था और कोई भी ऐसी परिस्थिति बनती तो तीसरी सीट भी इतने बहुमत से जीतती, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की होगी।कांग्रेस ने तो झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किया। उसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन फार्म निरस्त किया। इसके बाद कांग्रेस निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट गई, लेकिन वहां भी सत्य की जीत हुई।

कांग्रेस की आज जो शैली बन गई है कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर टीका-टिप्पणी कर रहे हैं, उसे मानने को तैयार नहीं हैं। हम देश के नागरिक हैं तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को हमें स्वीकार करना चाहिए। अब कांग्रेस स्वीकार नहीं कर रही तो उसके लिए हम क्या कह सकते हैं।

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