दिल्ली में यमुना घाटों का पुनर्विकास, गंदगी-बदबू खत्म करने की योजना

नई दिल्ली  यमुना के किनारे स्थित राजधानी के 32 ऐतिहासिक घाटों पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इन घाटों पर न गंदगी नजर आएगी और न ही बदबू की समस्या होगी। घाटों को इस तरह डिवेलप करने की योजना है कि लोग यहां सुबह-शाम सैर कर सकें और सूर्योदय व सूर्यास्त के सुंदर…

दिल्ली में यमुना घाटों का पुनर्विकास, गंदगी-बदबू खत्म करने की योजना

नई दिल्ली
 यमुना के किनारे स्थित राजधानी के 32 ऐतिहासिक घाटों पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इन घाटों पर न गंदगी नजर आएगी और न ही बदबू की समस्या होगी। घाटों को इस तरह डिवेलप करने की योजना है कि लोग यहां सुबह-शाम सैर कर सकें और सूर्योदय व सूर्यास्त के सुंदर नजारों का लुत्फ उठा सकें। अगले 6 महीने के भीतर इन 32 घाटों के विकास का काम शुरू होने की उम्मीद है। एलजी वीके सक्सेना ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के लिए डीडीए को निर्देश दिए हैं।

एलजी ने यमुना के दोबारा जिंदा करने और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े काम का जायजा लिया। यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुई बैठक में डीडीए ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में चल रहे कामों की रिपोर्ट भी पेश की। अधिकारियों ने बताया कि करीब 1700 हेक्टेयर इलाके में नदी तट को सुधारने का काम किया गया है। इसके तहत लगभग 88,574 मीट्रिक टन मलबा और 4,998 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। इसके साथ ही करीब 1,425 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।

यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए
डीडीए के अनुसार, यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए हैं। नदी इलाके से जुड़ी घास और वैटलैंड प्रजातियां लगाई गई हैं। यमुना कॉरिडोर में 35 वैटलैंड तैयार किए गए हैं। इससे ग्राउंड वॉटर रिचार्ज, जैव विविधता और बाढ़ नियंत्रण क्षमता मजबूत होने का दावा किया गया है। एलजी ने नदी किनारे बनाए गए प्रमुख इकोलॉजिकल स्थलों की भी जायजा लिया। बैठक में यमुना बाजार इलाके के 32 ऐतिहासिक घाटों के दोबारा जिंदा करने की योजना पर भी चर्चा हुई। एलजी ने इस काम को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके लिए इंटैक की ओर से स्टडी कराई गई है।

कवायद
    छह महीने में शुरू होगा घाटों के पुनर्विकास का काम
    LG ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए

क्यों ज़रूरी है ये प्रोजेक्ट?
बीते दो साल में यमुना किनारे असिता, बांसेरा, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसे पार्क बनाए गए हैं। इससे जैव विविधता में सुधार हुआ है। ऐतिहासिक घाटों की स्थिति ज्यादा नही सुधरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन घाटों के विकास से लोगों का यमुना से जुड़ाव बढ़ेगा।

पहले दिन यमुना से 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ

  • यमुना को कचरामुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने जो जनभागीदारी अभियान शुरू किया है, उसके तहत एक दिन में ही यमुना से करीब 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ किया गया।
  • सिंचाई व बाढ़ विभाग मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पहले दिन 15 हजार लोगों ने इस अभियान में भाग लिया। यमुना के 28 घाटों पर एक साथ सफाई शुरू की गई थी।
  • उन्होंने कहा कि अभियान में नागरिकों के अलावा वॉलंटियर्स, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, RWA के पदाधिकारी तथा सरकारी विभागों और एजेंसियों के कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया।
  • इस दौरान कुछ ही घंटों की सफाई में 116.6 मीट्रिक टन कचरा निकाला गया।
  • यमुना की सफाई के लिए नागरिकों की भागीदारी के अलावा 8 ट्रैश स्कीमर और वीड हार्वेस्टर, 28 बोट, 28 JCB मशीनें, 84 PWD मेंटेनेंस वैन तथा हॉर्टिकल्चर विभाग की 28 गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया।
  • राय ने कहा कि यमुना की सफाई को लेकर सालों से चर्चा होती रही है, लेकिन अब सफाई सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामूहिक प्रयासों से नदी को साफ किया जाएगा।

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