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परिवहन व्यवस्था पर मंडराया साइबर संकट, सारथी पोर्टल को निशाना बनाने की आशंका

जालंधर. पिछले तीन दिनों से पंजाब सहित देशभर में परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहने के पीछे केवल तकनीकी खराबी ही नहीं, बल्कि संभावित विदेशी साइबर हमले की आशंका भी सामने आई है। नैशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एन.आई.सी.) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि सारथी पोर्टल को पाकिस्तान और चीन से संचालित…

परिवहन व्यवस्था पर मंडराया साइबर संकट, सारथी पोर्टल को निशाना बनाने की आशंका

जालंधर.

पिछले तीन दिनों से पंजाब सहित देशभर में परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहने के पीछे केवल तकनीकी खराबी ही नहीं, बल्कि संभावित विदेशी साइबर हमले की आशंका भी सामने आई है। नैशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एन.आई.सी.) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि सारथी पोर्टल को पाकिस्तान और चीन से संचालित हैकरों द्वारा निशाना बनाए जाने की संभावना है।

इस खुलासे ने देश की महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सारथी पोर्टल, जो केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन संचालित होता है, देशभर में ड्राइविंग लाइसैंस, लर्निंग लाइसैंस, स्लॉट बुकिंग, लाइसैंस नवीनीकरण, अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट और ड्राइविंग स्कूलों की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है। इसी पोर्टल में आई तकनीकी बाधा के कारण पंजाब के सभी आर.टी.ए. कार्यालयों और ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट केंद्रों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। सारथी पोर्टल में आई खराबी का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा। पंजाब के विभिन्न जिलों में लर्निंग लाइसैंस, स्थायी ड्राइविंग लाइसैंस, वाहन पंजीकरण और अन्य सेवाओं के लिए पहले से समय लेकर पहुंचे हजारों आवेदकों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, होशियारपुर और अन्य जिलों के आर.टी.ए. कार्यालयों में पिछले तीन दिनों से आवेदकों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई स्थानों पर ड्राइविंग ट्रैक टेस्ट के लिए पहुंचे आवेदकों के बायोमैट्रिक सत्यापन नहीं हो सके, जिससे उनके परीक्षण स्थगित करने पड़े। जिस वजह से बड़ी संख्या में लोगों को बिना काम करवाए लौटना पड़ा।

वहीं, तेलंगाना में एन.आई.सी. के राज्य समन्वयक एस. कासी रेड्डी के अनुसार सोमवार को सारथी पोर्टल पर सामान्य 5 हजार उपयोगकर्त्ताओं की तुलना में अचानक 95 हजार उपयोगकर्त्ताओं का ट्रैफिक दर्ज किया गया। इस असामान्य गतिविधि ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया। उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा टीम ने संभावित खतरे को देखते हुए एहतियातन पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। बाद में सेवाएं बहाल कर दी गईं, लेकिन सर्वर पर पड़े अतिरिक्त दबाव के कारण सिस्टम सामान्य क्षमता प्राप्त नहीं कर पाया और बार-बार बाधित होता रहा।

चीन और पाकिस्तान से लगातार होते हैं हमले
एन.आई.सी. अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले से ही इस बात से अवगत है कि पाकिस्तान और चीन से जुड़े साइबर अपराधी तथा हैकर समूह समय-समय पर भारत के सरकारी पोर्टलों को निशाना बनाने का प्रयास करते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन सरकारी पोर्टलों पर ऑनलाइन भुगतान सुविधा उपलब्ध होती है, वे साइबर अपराधियों के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्य बन जाते हैं। ऐसे पोर्टलों को ठप कर प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा करना, डेटा चोरी का प्रयास करना या डिजिटल सेवाओं को बाधित करना हमलावरों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा मामले में किसी भी प्रकार के डेटा लीक या नागरिकों की निजी जानकारी के चोरी होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। मजबूत फ़ायरवॉल और साइबर सुरक्षा तंत्र ने किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साइबर युद्ध का बदलता स्वरूप
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पोर्टलों पर हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, सीईआरटी-इन (सी.ई.आर.टी.-इन) तथा अन्य एजैंसियां ऐसे खतरों की पहचान और रोकथाम के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। स्मार्ट कोड टैक्नोलॉजीज के संस्थापक सूर्यनारायण रेड्डी के अनुसार आज साइबर अपराधियों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), चैटबॉट और अत्याधुनिक मैलवेयर जैसे नए हथियार मौजूद हैं। इनके माध्यम से पहले की तुलना में अधिक जटिल और संगठित हमले किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दौर में साइबर सुरक्षा एक निरंतर चलने वाला युद्ध बन चुकी है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

डिजिटल इंडिया के लिए चेतावनी 
सारथी पोर्टल प्रकरण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया की बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। देश की परिवहन, बैंकिंग, कराधान, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं से जुड़े पोर्टल करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि नागरिकों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है और सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, लेकिन इस घटना ने यह संकेत अवश्य दिया है कि भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विदेशी साइबर खतरों की निगाह लगातार बनी हुई है। ऐसे में साइबर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना तथा सरकारी पोर्टलों की निगरानी को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बनकर उभरा है।

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