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सात समंदर पार पहुंचेगी पठानकोट की मशहूर लीची, बंपर फसल से निर्यात को मिली रफ्तार

पठानकोट  पंजाब के पठानकोट की मशहूर लीची इस बार देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास बिखेरने जा रही है. अनुकूल मौसम और बेहतर उत्पादन के चलते इस बार लीची की बंपर फसल हुई है. यही वजह है कि अब पठानकोट की लीची की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ लंदन, दुबई…

सात समंदर पार पहुंचेगी पठानकोट की मशहूर लीची, बंपर फसल से निर्यात को मिली रफ्तार

पठानकोट 

पंजाब के पठानकोट की मशहूर लीची इस बार देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास बिखेरने जा रही है. अनुकूल मौसम और बेहतर उत्पादन के चलते इस बार लीची की बंपर फसल हुई है. यही वजह है कि अब पठानकोट की लीची की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ लंदन, दुबई और सिंगापुर तक करने की तैयारी शुरू हो गई है. पठानकोट लंबे समय से अपनी उच्च गुणवत्ता वाली लीची के लिए जाना जाता है. जिले का वातावरण लीची की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. यही कारण है कि पंजाब में पठानकोट को लीची जोन घोषित किया गया है. यहां बड़े पैमाने पर लीची की खेती की जाती है और बागवानी विभाग भी किसानों को पूरा सहयोग देता है। 

जानकारी के अनुसार इस समय पठानकोट में करीब 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती हो रही है. इस बार मौसम लीची के लिए अनुकूल रहा, जिसके चलते उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. बागवानी विभाग का भी कहना है कि इस बार लीची की फसल बंपर हुई है. पठानकोट में मुख्य रूप से तीन किस्मों की लीची की पैदावार होती है. इनमें देहरादूनी, कलकती और सीडलेस लीची शामिल हैं. इन तीनों किस्मों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. जून महीने में लीची की तुड़ाई का काम शुरू हो जाता है और इसके बाद इसे विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जाता है। 

मौसम बना मेहरबान, पठानकोट में लीची की बंपर पैदावार

एक व्यापारी ने बताया कि उन्होंने लीची का बाग ठेके पर लिया हुआ है. उनके अनुसार यहां से लीची पहले दिल्ली भेजी जाती है और उसके बाद विदेशों में निर्यात की जाती है. इस बार भी बड़े स्तर पर लीची की खेप तैयार की जा रही है, जिसे देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा. वहीं एक बागवान ने बताया कि इस साल लीची की फसल काफी अच्छी हुई है. हालांकि पिछले दिनों आए तूफान और ओलावृष्टि के कारण कुछ नुकसान जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. उन्होंने कहा कि पठानकोट की लीची की मांग पूरे देश में रहती है और अब विदेशों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है। 

बागवानों का कहना है कि विदेशी बाजारों में पहुंच मिलने से किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे. इससे पठानकोट की लीची को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इस संबंध में बागवानी विभाग के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पठानकोट की लीची पहले से ही देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जा रही है. अब विभाग के सहयोग और बागवानों के प्रयासों से इसे सिंगापुर, दुबई और लंदन भेजने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि जिले की जलवायु और मिट्टी लीची उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त। 

बागवानों और बागवानी विभाग की मेहनत से खुला विदेशी बाजार
इसी वजह से यहां की लीची की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है. विभाग लगातार किसानों के संपर्क में है और उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है. पठानकोट की लीची की बढ़ती मांग और इस बार की बंपर पैदावार ने किसानों और व्यापारियों दोनों के चेहरे पर खुशी ला दी है. अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि विदेशों के बाजारों में पठानकोट की यह मिठास कितना असर छोड़ती है। 

 

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