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ATS का बड़ा ऑपरेशन: कई राज्यों में फैले आतंकी मॉड्यूल पर शिकंजा, 6 गिरफ्तारी, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज

भोपाल  तारीख 11 जून… वक्त तड़के का था और भोपाल का काजी कैंप अभी नींद में था। तभी अचानक एटीएस की एक विशेष टीम चुपचाप इलाके में दाखिल हुई। न कोई सायरन, न कोई हलचल। कुछ ही मिनटों में नन्हें बी की मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया गया।…

ATS का बड़ा ऑपरेशन: कई राज्यों में फैले आतंकी मॉड्यूल पर शिकंजा, 6 गिरफ्तारी, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज

भोपाल 

तारीख 11 जून… वक्त तड़के का था और भोपाल का काजी कैंप अभी नींद में था। तभी अचानक एटीएस की एक विशेष टीम चुपचाप इलाके में दाखिल हुई। न कोई सायरन, न कोई हलचल। कुछ ही मिनटों में नन्हें बी की मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया गया। ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि स्थानीय पुलिस तक को इसकी भनक नहीं लगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठीक उसी समय, भोपाल से करीब 1000 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी एटीएस की टीमें एक और संदिग्ध पर शिकंजा कस रही थीं। आखिर ऐसा क्या सुराग मिला था जिसने दो राज्यों में एक साथ यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन शुरू करवा दिया? इसके पीछे के चेहरे कौन थे और इस पूरे नेटवर्क का मकसद क्या था? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी। 

सबसे पहले समझते हैं कि मामला क्या था? 
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) देशभर में संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी एप्लीकेशनों, डार्क वेब नेटवर्क और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय समूहों की लगातार निगरानी करती है। इसी दौरान एनआईए को भोपाल के काजीकैंप क्षेत्र निवासी मोहम्मद फराज तथा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं।प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की निगरानी शुरू की गई और आगे की जांच की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को सौंपी गई। एटीएस ने 11 जून की तड़के कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फराज को भोपाल से हिरासत में लिया। वहीं, उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ की मदद से नईम अब्दुल्ला को देवबंद से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। दोनों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया। बाद में 16 जून को फराज को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया, जबकि नईम अब्दुल्ला 20 जून तक एटीएस रिमांड पर है।

अब जानते हैं इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य क्या था?
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से प्राप्त कट्टरपंथी साहित्य और जिहादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का आरोप था। उनका उद्देश्य बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना था। जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देशविरोधी गतिविधियों, सामाजिक अशांति, टारगेट किलिंग और हिंसक घटनाओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था। साथ ही शरिया कानून के समर्थन में वैचारिक अभियान चलाने के संकेत भी मिले हैं।

अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?
इस मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल-फिलहाल में बिहार के मधुबनी जिले से इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया है। उसे भोपाल लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से 20 जून तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है। 

फराज ने क्या-क्या उगला?
फराज की पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। वह मध्यप्रदेश के बाहर भी अपना स्लीपर सेल खड़ा कर रहा था। इसके लिए उसे नईम और पाकिस्तान के साथ एक खाड़ी देश में बैठे हैंडलर डायरेक्शन दे रहे थे। फराज की पूछताछ के बाद एटीएस ने धार निवासी हाजी अहजर को गिरफ्तार किया है। एमपी एटीएस ने हरियाणा के नूंह से भी एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वह भी फराज के संपर्क में कई महीनों से था और जिहादी नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर खड़ा करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि नूंह में हिरासत में लिए गए युवक की अधिकृत गिरफ्तारी अभी नहीं की है।

विदेशी फंडिंग और डिजिटल उपकरणों की जांच
एटीएस ने फराज और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों को हो रही विदेशी फंडिंग की भी बहुत गहनता से जांच कर रही है। इसी जांच में गिरोह का खुलासा हुआ है। वहीं उसके पास से बरामद मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क फराज को मिला था। फराज के संपर्क में अब तक करीब आधा दर्जन युवकों  के होने का पता चला है। पुलिस उन सभी युवकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने के साथ उनकी हर गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। शनिवार से ही उसका परिवार काजीकैंप स्थित मकान में ताला बंद कर फरार हो गया है। वहीं कॉलोनी की जिस क्लीनिक पर फराज काम करता था, उसमें भी शनिवार से ताला लटका हुआ है। 

डार्क एप्स और सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, आरोपी कुछ डार्क एप्स के माध्यम से संदिग्ध समूहों के संपर्क में था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसने गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां आरोपी के डिजिटल नेटवर्क तथा संभावित विदेशी संपर्कों के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही हैं।  

आगे जांच की दिशा क्या होगी?
अब तक पांच राज्यों में इस कथित मॉड्यूल के नेटवर्क से जुड़े तार मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है। फिलहाल नईम अब्दुल्ला, शाकिर और इजहार-उल-हक एटीएस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियां मोहम्मद फराज, नईम अब्दुल्ला, शाकिर मेव और इजहार-उल-हक को इस नेटवर्क की प्रमुख कड़ियों के रूप में देख रही हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

 

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