,

विकास प्राधिकरण करेगा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बड़ी राहत

लखनऊ  विकास क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा एक अप्रैल तक स्वीकृत किए गए मानचित्रों को अगले वर्ष 31 मार्च तक वैध कराया जा सकेगा। संबंधित विकास प्राधिकरणों द्वारा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन किया जाएगा। शमन के लिए तय अवधि तक भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। कैबिनेट द्वारा पिछले दिनों…

विकास प्राधिकरण करेगा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बड़ी राहत

लखनऊ
 विकास क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा एक अप्रैल तक स्वीकृत किए गए मानचित्रों को अगले वर्ष 31 मार्च तक वैध कराया जा सकेगा। संबंधित विकास प्राधिकरणों द्वारा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन किया जाएगा। शमन के लिए तय अवधि तक भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। कैबिनेट द्वारा पिछले दिनों किए गए निर्णय के संबंध में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया।

प्रमुख सचिव आवास पी गुरूप्रसाद की ओर से विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों, आवास आयुक्त व प्रमुख सचिव पंचायतीराज को भेजे गए शासनादेश के तहत विकास क्षेत्र में निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत करने के अधिकार को स्पष्ट करते हुए एक अप्रैल 2026 (कट आफ डेट) तक जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्र को एक वर्ष यानी अगले वर्ष 31 मार्च विकास प्राधिकरण के माध्यम से वैध कराया जा सकेगा।

आदेश में स्पष्ट की गई ये बात
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भवन निर्माण एवं विकास उपविधि, जिला पंचायत उपविधि के अनुसार स्वीकृत नक्शा शमनीय होगा बशर्ते महायोजना भू-उपयोग के अनुसार निर्माण हो। भू-उपयोग परिवर्तन के मामले में परिवर्तन शुल्क देना होगा लेकिन उसमें 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी।

ग्रीन पार्क व खुले क्षेत्रों के लिए आरक्षित भूमि पर निजी उपयोग के लिए निर्मित आवासीय भवनों को छोड़कर अन्य प्रकरणों में भू-स्वामी द्वारा समतुल्य भूमि उस भू उपयोग के लिए आरक्षित करने पर विचार किया जाएगा। जलाशय महायोजना मार्ग तथा शासकीय भूमि पर विनियमितिकरण नहीं किया जाएगा।

200 वर्ग मीटर तक भूखंडों पर बने आवासीय भवनों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। जिला पचायतों को एक अप्रैल तक स्वीकृत मानचित्रों की प्रमाणिक सूची 15 दिनों में संबंधित प्राधिकरण तथा शासन को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि जिला पंचायतें ‘बैक डेटिंग’ न कर सकें।

विकास प्राधिकरणों द्वारा भवन उपविधि के मानकों के तहत स्वीकृत मानचित्र परीक्षण में सही पाए जाने पर पंजीकृत किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि विकास क्षेत्र में पंचायतों द्वारा मंजूर किए गए मानचित्रों की वैध पर सवाल उठाते हुए प्राधिकरणों द्वारा भवन स्वामियों को नोटिस देने के साथ ही ध्वस्तीकरण के आदेश किए जा रहे हैं।

महायोजना से बाहर के क्षेत्रों के नक्शों के लिए बनी मानक संचालन प्रक्रिया
चूंकि प्रदेश के 17 नगर निगम सहित 762 नगरीय निकाय में से अभी लगभग 200 के ही मास्टर प्लान बने हैं इसलिए विकास /विस्तारित विकास या विनियमित ऐसे क्षेत्र जो महायोजना के दायरे से बाहर हैं उनमें सुनियोजित विकास के लिए सरकार ने किसी तरह के निर्माण के मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) भी तय की है। 29 विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित विकास क्षेत्र तथा 72 विनियमित क्षेत्र आदि में अगर कोई निर्माण जलाशय, राजस्व भूमि, बंजर भूमि, वन, श्मशान आदि की जमीन पर है तो उसका नक्शा पास होने पर भी उसे वैध नहीं माना जाएगा।

जिन क्षेत्रों के मास्टर प्लान नहीं हैं उनके अनिवार्य रूप से छह माह में तैयार करने को कहा गया है। यथासंभव मानचित्रों को महायोजना में समायोजित किया जाएगा। उपविधि के तहत कृषि भूमि पर किए गए आवासीय निर्माण, लगाए गए उद्योग आदि की स्वीकृति नगर पंचायत व पालिका परिषद तभी दे सकेंगे जब उद्योग खतरनाक प्रकृति का न हो।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports