डिजिटलीकरण, क्षमता विस्तार और सुस्थिर खनन पहलों की समीक्षा की

हैदराबाद  एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने दोणिमलै कॉम्प्लेक्स की हाल ही में हुई एक यात्रा के दौरान परिचालन दक्षता को मजबूत करने, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों की समीक्षा की । इस दौरे से प्रमुख…

डिजिटलीकरण, क्षमता विस्तार और सुस्थिर खनन पहलों की समीक्षा की

हैदराबाद

 एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने दोणिमलै कॉम्प्लेक्स की हाल ही में हुई एक यात्रा के दौरान परिचालन दक्षता को मजबूत करने, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों की समीक्षा की । इस दौरे से प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने का अवसर मिला, जो दोणिमलै को भविष्य के लिए तैयार खनन परिसर में बदलने में मदद कर रही हैं । साथ ही, एनएमडीसी को भारत के सबसे बड़े और जिम्मेदार लौह अयस्क उत्पादक के रूप में सुस्थापित करती है ।

इस यात्रा के दौरान प्रबंधन ने कुमारस्वामी खदान से 10 एमटीपीए और दोणिमलै परिसर से 17 एमटीपीए के उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से चल रही क्षमता-विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास की पहलों की समीक्षा की । इन पहलों से एनएमडीसी के 100 एमटीपीए खनन कंपनी बनने के विजन में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है ।
प्रबंधन ने 35% तक Fe युक्त लौह अयस्क, लौह अयस्क स्लाइम्स और निम्न श्रेणी के लौह-युक्त पदार्थों जैसे बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (बीएचजे) और बैंडेड हेमेटाइट क्वार्ट्जाइट (बीएचक्यू) के उपयोग के लिए पहलों की भी समीक्षा की । परंपरागत रूप से, इन संसाधनों का सीमित उपयोग किया जाता था और मूल्यवान लौह सामग्री होने के बावजूद इन्हें अपशिष्ट के रूप में माना जाता था । लाभकारी और वैज्ञानिक खनिज प्रसंस्करण के माध्यम से, एनएमडीसी इन कम उपयोग किए गए संसाधनों को मूल्यवान कच्चे माल में बदल रहा है, मौजूदा खदानों से अधिक लौह अयस्क को पुनः प्राप्त कर रहा है, जबकि अपशिष्ट उत्पादन को कम कर रहा है । यह पहल खनन की सुस्थिर प्रथाओं का समर्थन करती है, खनिज संरक्षण में सुधार करती है, खनन कार्यों के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करती है और भारत के इस्पात क्षेत्र की कच्ची सामग्री की बढ़ती आवश्यकताओं में योगदान करती है ।

कुमारस्वामी खदान में नई लागू की गई स्वचालित गेट प्रबंधन प्रणाली दौरे के दौरान समीक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु था । डिजिटल प्रणाली ने रियल टाइम निगरानी और सामग्री की आवाजाही के सत्यापन को सक्षम बनाकर लौह अयस्क प्रेषण में पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत बनाया  है । यह पहल यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि खनिज संसाधनों को उनके इच्छित गंतव्यों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जाए, साथ ही मैनुअल हस्तक्षेप को कम किया जाए और परिचालन संबंधी निगरानी में सुधार लाया जाए ।

एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कार्यपालक निदेशकों के साथ मिलकर हाल ही में विकसित बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें हाई-राइज टावर शामिल हैं, जो कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास के प्रति एनएमडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता  है । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, एनएमडीसी का मानना है कि सतत विकास उत्पादन लक्ष्यों से परे होता है और इसमें कर्मचारियों के लिए बेहतर जीवन-स्तर बनाना, स्थानीय समुदायों का समर्थन करना और पर्यावरण प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित रखना शामिल है ।

इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा, "हमारा दृष्टिकोण ऐसे खनन संचालन का निर्माण करना है, जिस पर भावी पीढ़िया गर्व कर सकें । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, हम दोणिमलै को एक मॉडल खनन परिसर बनाने की आकांक्षा रखते हैं, जो जिम्मेदार खनन, नवाचार और कर्मचारी कल्याण के उच्चतम मानकों को दर्शाता है । जैसे-जैसे एनएमडीसी अपने 100 एमटीपीए विजन की ओर बढ़ रहा है, हम भारत के इस्पात उद्योग को उच्च-गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । साथ ही, हम प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से हर संसाधन के मूल्य को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, यहां तक कि निम्न श्रेणी के अयस्क को उत्पादक परिसंपत्तियों में बदल रहे हैं, साथ ही सुस्थिर और जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा दे रहे    हैं ।

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