टेक इंडस्ट्री में AI बना नया पैमाना, इस्तेमाल न करने वाले कर्मचारियों की नौकरी पर बढ़ा जोखिम

 नई दिल्ली क्या आप भी इस मुगालते में हैं कि बिना एआई सीखे आपका काम मजे से चलता रहेगा? अगर हां, तो ग्लोबल सर्वे एजेंसी 'गैलप' की यह ताजा स्टडी आंखें खोलेने के ल‍िए है. टेक इंडस्ट्री में इस समय एआई सिर्फ काम को आसान बनाने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह आपकी नौकरी बचाने…

टेक इंडस्ट्री में AI बना नया पैमाना, इस्तेमाल न करने वाले कर्मचारियों की नौकरी पर बढ़ा जोखिम

 नई दिल्ली

क्या आप भी इस मुगालते में हैं कि बिना एआई सीखे आपका काम मजे से चलता रहेगा? अगर हां, तो ग्लोबल सर्वे एजेंसी 'गैलप' की यह ताजा स्टडी आंखें खोलेने के ल‍िए है. टेक इंडस्ट्री में इस समय एआई सिर्फ काम को आसान बनाने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह आपकी नौकरी बचाने का सबसे बड़ा 'सुरक्षा कवच' बन चुका है। 

गैलप के नए शोध के मुताबिक, जो टेक कर्मचारी अपने रोजमर्रा के काम में एआई का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उनके नौकरी गंवाने (ले ऑफ) का खतरा एआई इस्तेमाल करने वाले साथियों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। 

बता दें कि गैलप ने ये अनुमान अमेरिका के 23,000 से अधिक कामकाजी लोगों पर किए गए सर्वे के आधार पर लगाया है. इसमें वो 660 लोग भी शामिल थे जिनकी हाल ही में नौकरी चली गई थी. इसके स्टेटेस्ट‍िक मॉडल से कई बातें निकलकर आईं, जैसे जो टेक कर्मचारी महीने में कम से कम एक बार या उससे अधिक एआई टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, उनके छंटनी की संभावना सिर्फ 6 फीसदी पाई गई। 

वहीं नॉन-एआई यूजर्स कर्मचारी यानी जो एआई से दूरी बनाकर रखते हैं या बहुत कम इस्तेमाल करते हैं, उनकी नौकरी जाने का रिस्क सीधे 18 फीसदी तक पहुंच जाता है. रिपोर्ट में साफ किया गया है कि टेक इंडस्ट्री से बाहर के सेक्टर्स में भी एआई का इस्तेमाल न करने वाले कर्मचारी छंटनी के काफी करीब हैं, हालांकि वहां रिस्क का यह अंतर टेक सेक्टर जितना बड़ा नहीं है। 

कंपनियों की नई 'फॉल्ट लाइन' बना एआई
ये स्टडी इशारा करती है कि एआई यानी आर्ट‍िफ‍िश‍ियल इंटेल‍िजेंस अब कंपनियों के भीतर एक ऐसी विभाजक रेखा (फॉल्ट लाइन) बन चुका है, जो सीधे तौर पर लोगों के करियर को प्रभावित कर रहा है. कंपनियां अब न सिर्फ नए उम्मीदवारों को हायर करते समय 'एआई साक्षरता' चेक कर रही हैं, बल्कि मंदी या छंटनी के वक्त यह भी देख रही हैं कि किस कर्मचारी को रोकना है और किसे बाहर का रास्ता दिखाना है। 

कर्मचारी कुछ और कह रहे हैं, कंपनियां कुछ और!
इस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू कंपनियों और कर्मचारियों के बीच का वैचारिक अंतर है. छंटनी का शिकार हुए केवल 1 फीसदी कर्मचारियों ने माना कि उनकी नौकरी जाने की सीधी वजह एआई है. अधिकांश ने इसके लिए कंपनियों के पुनर्गठन (Restructuring), कॉस्ट-कटिंग या खराब आर्थिक हालातों को ज़िम्मेदार ठहराया। 

इसके उलट, 'चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस इंक' के डेटा के मुताबिक, पिछले महीने कंपनियों द्वारा की गई छंटनी की घोषणाओं में एआई सबसे बड़ा कारण था, जो कुल घोषणाओं का लगभग 40 फीसदी था. गैलप के मुख्य वैज्ञानिक जिम हार्टर का मीड‍िया को द‍िया बयान काफी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी नौकरी जाने के लिए सीधे एआई को दोष नहीं दे रहे हैं, जिससे एआई का वह अप्रत्यक्ष प्रभाव छिप जाता है जो कंपनियां छंटनी का फैसला लेते समय मन में रखती हैं। 

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