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राष्ट्रीय कर्तव्य पर बोले मुकुल कानिटकर, कहा- भ्रष्टाचारियों को समाज में सम्मान नहीं मिलना चाहिए

रायपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंचम सरसंघचालक स्व. कुप्पाहली सीतारमैया सुदर्शन की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा, हिंदू समाज का आधार मैं से हम की ओर जाना है. इस यात्रा में पांच परिवर्तन के उद्देश्य तय किया गया है जिसमें स्वदेशी का चिंतन है, संवाद…

राष्ट्रीय कर्तव्य पर बोले मुकुल कानिटकर, कहा- भ्रष्टाचारियों को समाज में सम्मान नहीं मिलना चाहिए

रायपुर.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंचम सरसंघचालक स्व. कुप्पाहली सीतारमैया सुदर्शन की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा, हिंदू समाज का आधार मैं से हम की ओर जाना है. इस यात्रा में पांच परिवर्तन के उद्देश्य तय किया गया है जिसमें स्वदेशी का चिंतन है, संवाद से कुटुंब परिवार की शक्ति बढ़ाना, सामाजिक समरसता की संकल्पना है, पर्यावरण के प्रति संवेदना और राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता शामिल है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा एवं मुख्यातिथि अनुराग पांडे थे. संचालन साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने किया. कार्यक्रम संयोजिका शील शर्मा ने स्वागत भाषण दिया. मुख्य वक्ता मुकुल कानितकर ने राष्ट्रीय कर्तव्य, स्वार्थ ही देशद्रोह विषय पर बोलते हुए कहा, हमारा शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना है, सभी कोशिकाएं मिलकर प्रत्येक अंग बनते हैं, जो अपना अपना कार्य करते हैं इसलिए जीवन चलता है. इसी प्रकार देश भी सभी व्यक्ति से मिलकर बनता है, मिलकर अपना अपना कार्य करेंगे तो राष्ट्र शक्तिशाली होगा. यही प्रत्येक व्यक्ति का देश के प्रति कर्तव्य है. जैसे एक कोशिका के स्वार्थी हो जाने से शरीर बीमार और कमजोर हो जाएगा. इसी प्रकार एक व्यक्तिव स्वार्थी हो जाने से देश कमजोर हो जाता है.

उन्होंने कहा, देश के प्रति कर्तव्य नहीं करने के कारण समाज, व्यवस्था में अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार बढ़ गया है. इसे समाज में मान्यता मिल गई है. इस भ्रष्टाचार से मुक्ति का उपाय यही है कि समाज ऐसे लोगों को दंडित करे, बहिष्कार करे. व्यक्ति अपने स्वार्थ में देश का नुकसान करे उसे समाज प्रतिष्ठा न दे.
मुकुल कानिटकर ने कहा, संघ को लेकर विवाद खड़े वे लोग करते हैं, जिन्हें संघ की समझ नहीं है. संघ हिंदू समाज को संगठित करने की यात्रा है. संघ की शताब्दी वर्ष कोई उत्सव का अवसर नहीं है बल्कि समाज परिवर्तन के अपने कार्य के सिंहावलोकन करने का अवसर है. राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माणकार ही संघ का लक्ष्य है.

संघ की स्थापना भारत के स्वाधीन होने के बाद भारत का स्व तंत्र कैसे विकसित हो, शक्तिशाली कैसे बने इस विचार को लेकर कार्य प्रारंभ करने के लिए किया था. इसके लिए हिंदू समाज को संगठित करना आवश्यक है, राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना आवश्यक है. इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए डॉ हेडगेवार ने संघ की स्थापना की. यह भारतीय स्वाधीनता का सशस्त्र आंदोलन, अहिंसा और सत्याग्रह के बाद तीसरा आंदोलन था.

कार्यक्रम के अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रान्त के संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा ने स्व. सुदर्शन जी का स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन और विचार देश को प्रेरणास्पद है. 
मुख्य अतिथि अनुराग पांडे ने कहा कि नागरिक कर्तव्य नहीं होने के कारण जगह जगह गंदगी, यातायात की समस्या, भ्रष्टाचार जैसी अव्यवस्था फैलती है.

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