मल्टीग्रेन रोटी बनाने के आसान टिप्स, हर बार बनेंगी सॉफ्ट और फूली-फूली रोटियां

मल्टीग्रेन आटे की रोटी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. गेहूं, बाजरा, ज्वार, मक्के और कई तरह के अनाजों को मिलाकर तैयार की जाने वाली यह रोटी न सिर्फ हेल्दी होती है, बल्कि काफी टेस्टी भी होती है. लेकिन  मल्टीग्रेन आटे से रोटी बनाते समय अक्सर लोगों को कई समस्याओं का सामना करना…

मल्टीग्रेन रोटी बनाने के आसान टिप्स, हर बार बनेंगी सॉफ्ट और फूली-फूली रोटियां

मल्टीग्रेन आटे की रोटी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. गेहूं, बाजरा, ज्वार, मक्के और कई तरह के अनाजों को मिलाकर तैयार की जाने वाली यह रोटी न सिर्फ हेल्दी होती है, बल्कि काफी टेस्टी भी होती है. लेकिन  मल्टीग्रेन आटे से रोटी बनाते समय अक्सर लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार रोटी बेलते समय फट जाती है तो कभी यह मोटी, टेढ़ी या कड़ी बन जाती है.

ऐसे में रोटी का स्वाद भी खराब हो जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको मल्टीग्रेन आटे की रोटी बनाने के कुछ आसान टिप्स बताएंगे, जिनकी मदद से आपकी मल्टीग्रेन रोटिया भी हर बार गोल, सॉफ्ट और फूली-फूली बनेंगी.

आटा गूंथने के बाद तुरंत न बनाएं रोटी
मल्टीग्रेन आटे को गूंथने के तुरंत बाद रोटी बनाने की गलती न करें. आटा गूंथने के बाद इसे लगभग 20 मिनट तक ढककर रख दें. इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाता है और रोटियां ज्यादा मुलायम बनती हैं.

रोटी बेलते वक्त लोई पर परोथन लगाएं
मल्टीग्रेन रोटी बनाते समय लोई पर थोड़ा ज्यादा परोथन लगाएं. इससे रोटी बेलते समय चिपकेगी नहीं और आसानी से बेली जा सकेगी. साथ ही रोटी के फटने की संभावना भी कम हो जाएगी.

रोटी को ज्यादा पतला न बेलें
कई लोग मल्टीग्रेन रोटी को बहुत पतला और बड़ा बेलने की कोशिश करते हैं, जिससे रोटी टूटने लगती है. इसलिए मल्टीग्रेन रोटी को थोड़ा छोटा और हल्का मोटा बेलें. इससे रोटी सॉफ्ट, गोल और टेस्टी बनेगी.

इन आसान टिप्स की मदद से आप घर पर आसानी से परफेक्ट और मुलायम मल्टीग्रेन रोटियां बना सकते हैं.

मल्टीग्रेन रोटी को डाइट में क्यों शामिल करना चाहिए?
मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होती है. यह गेहूं, बाजरा, ज्वार, मक्का और अन्य अनाजों से तैयार की जाती है, इसलिए इसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसे डाइट में शामिल करने से डाइजेशन सिस्टम बेहतर होता है, शरीर में लंबे समय तक एनर्जी मिलती है और ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है.

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