UPSC CSE: सीसैट पैटर्न की समीक्षा पर संसद समिति की अहम बैठक, बदल सकते हैं नियम

 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों उम्मीदवारों के लिए आज का दिन बेहद अहम साबित हो सकता है। यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट यानी सीसैट को लेकर आज संसद में एक बड़ी हलचल होने जा रही है। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय…

UPSC CSE: सीसैट पैटर्न की समीक्षा पर संसद समिति की अहम बैठक, बदल सकते हैं नियम

 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों उम्मीदवारों के लिए आज का दिन बेहद अहम साबित हो सकता है। यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट यानी सीसैट को लेकर आज संसद में एक बड़ी हलचल होने जा रही है। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी संसद की स्थायी समिति आज यानी सोमवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक करने वाली है। पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी एक्सटेंशन बिल्डिंग में होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा सीसैट पेपर की समीक्षा करना और केंद्र सरकार में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने की रणनीति तैयार करना है।

होगा नफे-नुकसान का आकलन
राज्यसभा सचिवालय की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल बैठक में देश की दो सबसे बड़ी प्रशासनिक संस्थाओं के आला अधिकारी मौजूद रहेंगे। समिति इस मामले में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सचिव और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सचिव के विचारों को सुनेगी। बैठक में इस बात पर गहराई से मंथन होगा कि साल 2011 में लागू किए गए सीसैट का अब तक सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों पर क्या असर पड़ा है और इससे छात्रों को क्या फायदा या नुकसान हुआ है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों में खाली पड़े पदों को तेजी से भरने के उपायों पर भी चर्चा की जाएगी।

ग्रामीण और आर्ट्स बैकग्राउंड के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप
इस संसदीय समिति की कमान भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल के हाथों में है। समिति ने इसी साल अप्रैल के महीने में यूपीएससी से साफ तौर पर कहा था कि वह प्रीलिम्स परीक्षा में सीसैट के मौजूदा पैटर्न पर फिर से विचार करे। कमेटी का मानना है कि सीएसएटी पेपर में गणितीय और विश्लेषणात्मक सवालों पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाता है। इस वजह से ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों, गैर-विज्ञान स्ट्रीम और संसाधनों की कमी से जूझने वाले उम्मीदवारों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वे चाहकर भी इस परीक्षा में शहरी या इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के छात्रों से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं।

संसद में इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाते हुए कमेटी के अध्यक्ष बृजलाल ने कहा था कि सिविल सेवा परीक्षा का पहला पेपर यानी जनरल स्टडीज (जीएस-1) ही उम्मीदवारों की असली मेरिट तय करता है। वहीं, दूसरा पेपर सीसैट केवल एक क्वालिफाइंग पेपर है, जो 200 नंबर का होता है। इसमें कुल 80 सवाल पूछे जाते हैं और गलत जवाब देने पर 0.68 नंबर की निगेटिव मार्किंग होती है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अगर कोई होनहार छात्र सीएसएटी पेपर पास नहीं कर पाता, तो उसकी जीएस-1 की कॉपी तक नहीं जांची जाती, भले ही उसने वहां कितना भी शानदार प्रदर्शन क्यों न किया हो।

परीक्षा में बढ़ रहा है इंजीनियरों का दबदबा
बृजलाल ने इस बात पर गहरी चिंता जताई थी कि सीएसएटी की वजह से ह्यूमेनिटीज और आर्ट्स बैकग्राउंड के छात्रों को बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मौजूदा व्यवस्था के कारण आज सिविल सेवा में आने वाले कुल उम्मीदवारों में से लगभग 65 फीसदी छात्र केवल इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आ रहे हैं। एक समय था जब आईएएस और आईपीएस की परीक्षा में हर विषय के छात्रों को बराबरी का मौका मिलता था और हर क्षेत्र से लोग चुनकर आते थे। इसी असमानता को दूर करने के लिए उन्होंने मांग की थी कि या तो सीएसएटी को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए, या फिर इसके स्वरूप में ऐसा बदलाव (रेशनलाइजेशन) किया जाए जिससे सभी छात्रों को समान अवसर मिल सकें।

सरकारी नौकरियों में खाली पदों को भरने पर भी कसेगा शिकंजा
इस बैठक में केवल यूपीएससी परीक्षा के पैटर्न पर ही बात नहीं होगी, बल्कि सरकारी नौकरियों में भर्ती की सुस्त रफ्तार पर भी हंटर चलेगा। मार्च में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में इस संसदीय समिति ने कानून और न्याय मंत्रालय को सख्त निर्देश दिए थे कि वे यूपीएससी, एसएससी और डीओपीटी के साथ तालमेल बिठाकर एक तय समय सीमा के भीतर भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रियाओं को पूरा करें। देश के तमाम सरकारी विभागों में अलग-अलग ग्रेड पर खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाना बेहद जरूरी है ताकि प्रशासनिक काम में कोई रुकावट न आए।

इसके साथ ही, कमेटी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इंडियन लीगल सर्विस के भर्ती नियमों को प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप दिया जाए और उन्हें नोटिफाई किया जाए। ऐसा करने से यूपीएससी के जरिए सही समय पर योग्य और कुशल कानूनी पेशेवरों का चयन हो सकेगा। यह कदम इसलिए भी जरूरी है ताकि भारत के विधि आयोग समेत सरकार के कानूनी विभागों का कामकाज पूरी क्षमता और मजबूती के साथ चल सके। आज की इस बैठक से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में यूपीएससी के परीक्षा पैटर्न और सरकारी भर्तियों की रफ्तार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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