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कारोबारियों के लिए अहम सूचना: 30 जून तक करवाएं GST लंबित मामलों का रिव्यू

चंडीगढ़/जालंधर. GST से जुड़े पेंडिंग विवादों वाले कारोबारियों को तुरंत अपने केस का रिव्यू करवाने की जरूरत है। कई मामलों में GST अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) में अपील दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 जून होने संबंधी बताया जा रहा है। ऐसे में कारोबारियों को बिना देर किए अपने केस की जांच करवानी चाहिए। टैक्स माहिर…

कारोबारियों के लिए अहम सूचना: 30 जून तक करवाएं GST लंबित मामलों का रिव्यू

चंडीगढ़/जालंधर.

GST से जुड़े पेंडिंग विवादों वाले कारोबारियों को तुरंत अपने केस का रिव्यू करवाने की जरूरत है। कई मामलों में GST अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) में अपील दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 जून होने संबंधी बताया जा रहा है। ऐसे में कारोबारियों को बिना देर किए अपने केस की जांच करवानी चाहिए।

टैक्स माहिर C.A. पुनीत ओबेरॉय ने बताया कि अभी कई टैक्सपेयर्स को यह गलतफहमी है कि GSTAT में अपील दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2026 तक है, जबकि कई पुराने मामलों में अपील फाइल करने की आखिरी तारीख 30 जून हो सकती है। ऐसे में कारोबारियों को सोशल मीडिया या WhatsApp मैसेज पर भरोसा करने के बजाय अपने केस का असल स्टेटस चेक करवाना चाहिए।

जिन कारोबारियों के मामसे में अपील अथॉरिटी के प्रतिकूल आदेश, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), रिजेक्शन, टैक्स, इंटरेस्ट या पेनल्टी की मांग, रजिस्ट्रेशन कैंसल करना, रिफंड से इनकार, क्लासिफिकेशन और असेसमेंट विवाद या दूसरे प्रतिकूल आदेश शामिल हैं, उन्हें अपने केस का रिव्यू करना चाहिए। भले ही पहले कई ऑर्डर मिले हों, फिर भी उनकी जांच करना जरूरी है। अगर तय समय सीमा के अंदर अपील फाइल नहीं की जाती है, तो संबंधित आदेश अंतिम रूप में प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा डिपार्टमेंटल रिकवरी की कार्रवाई शुरू हो सकती है, इंटरेस्ट का बोझ बढ़ सकता है और बैंक अकाउंट या प्रॉपर्टी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

ओबेरॉय ने कहा कि G.S.T.A.T. में अपील फाइल करना सिर्फ एक रस्मी प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए कई तैयारियां करनी होती हैं जैसे डॉक्यूमेंट्स का रिव्यू, लीगल बेसिस तैयार करना, टाइम लिमिट की जांच और प्री-डिपॉजिट का कैलकुलेशन। इसलिए करोबारियों को आखिरी मिनट तक इंतजार करने के बजाय अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि G.S.T.A.T. आने वाले समय में G.S.T. कानून की एक जैसी व्याख्या डेवलप करने और टैक्सपेयर्स और डिपार्टमेंट दोनों को साफ गाइडेंस देने में अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में जिन कारोबारियों के G.S.T. विवाद पेंडिंग हैं, उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाने चाहिए।

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