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अब किताबों से आगे की पढ़ाई: विद्यार्थियों को मिलेगी AI और रोबोटिक्स की ट्रेनिंग

लखनऊ  प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी भी मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश के 18 मंडलों में ड्रीम लैब स्थापित की जा रही हैं। इसके लिए टाटा…

अब किताबों से आगे की पढ़ाई: विद्यार्थियों को मिलेगी AI और रोबोटिक्स की ट्रेनिंग

लखनऊ
 प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी भी मिलेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश के 18 मंडलों में ड्रीम लैब स्थापित की जा रही हैं। इसके लिए टाटा समूह के प्रतिष्ठान नेल्को के साथ हब और स्पोक माडल पर अनुबंध किया गया है

नेल्को की ओर से ड्रीम लैब की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री की आपूर्ति इसी माह कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की योजना वर्तमान शैक्षिक सत्र में इन लैब का संचालन शुरू करने की है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा।

ड्रीम लैब ऐसी अत्याधुनिक प्रयोगशाला है, जहां विद्यार्थी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) आधारित शिक्षा को प्रयोगों के माध्यम से समझ सकेंगे। यहां उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), रोबोटिक्स, इंटरनेट आफ थिंग्स (आइओटी), कोडिंग, थ्री-डी डिजाइन और इलेक्ट्रानिक उपकरणों के संचालन जैसी उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह प्रयोगशाला केवल किताबों तक सीमित शिक्षा की अवधारणा को बदलकर विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’ का अवसर देगी। हब और स्पोक माडल के तहत प्रत्येक मंडल में स्थापित मुख्य ड्रीम लैब (हब) से आसपास के चयनित विद्यालयों (स्पोक) के विद्यार्थी भी जुड़ेंगे और उपलब्ध संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे।

इससे सीमित संसाधनों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक आधुनिक तकनीकी शिक्षा पहुंच सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रीम लैब विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और नवाचार की सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच तकनीकी संसाधनों की दूरी भी कम होगी और वे भविष्य की रोजगारोन्मुखी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे

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