नईदिल्ली
कल तक जो सिर्फ फाइलों का हिस्सा था आज वो हकीकत बन चुका है. दिल्ली और वेलिंगटन के बीच समुद्र की दूरियां अब व्यापार के सेतु से सिमट गई हैं। जब दुनिया के बड़े-बड़े देश ट्रेड वॉर और मंदी के साये में दुबके हैं, तब भारत ने महज 270 दिनों के भीतर न्यूजीलैंड के साथ वो महाकरार कर लिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तहलका मचा दिया है। यह सिर्फ सरकारों के बीच का हाथ मिलाना नहीं है बल्कि भारत के उस मध्यमवर्गीय युवा के सपनों की उड़ान है जो विदेश में करियर बनाना चाहता है और उस छोटे उद्यमी की हिम्मत है जो अपना सामान दुनिया के कोने-कोने में बेचना चाहता है। 5000 वीजा का वो ब्रह्मास्त्र और जीरो ड्यूटी की वो चाबी अब आपके हाथ में है। आइए, इसे बहुत आसान भाषा में समझते हैं।
समझौते की 5 सबसे बड़ी ताकत
· 5,000 वीजा का ‘एक्सप्रेस-वे’: अब हर साल कम से कम 5,000 ‘Temporary Employment Entry Visa’ की गारंटी मिलेगी. इसके तहत स्किल्ड प्रोफेशनल्स 3 साल तक न्यूजीलैंड में रहकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकेंगे।
· 100% ड्यूटी फ्री एक्सेस: अब न्यूजीलैंड के बाजार में ‘मेड इन इंडिया’ का डंका बजेगा. भारत से जाने वाले टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान पर अब जीरो ड्यूटी लगेगी, जिससे भारतीय व्यापारियों का मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा।
· $20 बिलियन का ‘इन्वेस्टमेंट बूस्टर’: अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड भारत में 20 बिलियन डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करेगा जिससे भारत के बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप्स को नई उड़ान मिलेगी।
· किसानों के लिए ‘कीवी’ तकनीक: केवल व्यापार ही नहीं बल्कि अब न्यूजीलैंड के विशेषज्ञ भारतीय किसानों को कीवी, सेब और शहद के उत्पादन में वैश्विक स्तर की तकनीक सिखाएंगे. यह साझेदारी भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
· शराब और वाइन पर रियायत: भारत से जाने वाली वाइन और स्पिरिट्स को वहां ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी, जबकि न्यूजीलैंड की वाइन पर भारत में मिलने वाली रियायतें 10 वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ाई जाएंगी।
कैसे संभव हुआ यह ‘एक्सप्रेस’ एग्रीमेंट?
आमतौर पर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने में वर्षों का समय लगता है लेकिन न्यूज़ीलैंड के साथ यह महज 9 महीनों में पूरा हो गया. इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित रहे:
· रणनीतिक तालमेल: न्यूज़ीलैंड की कृषि और डेयरी विशेषज्ञता और भारत की विशाल मार्केट और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता एक-दूसरे की पूरक (Complementary) हैं।
· चीन से हटकर विकल्प की तलाश: दोनों देश अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए चीन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं. यह साझा सुरक्षा और आर्थिक हित इस समझौते की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बना।
· विश्वास की नींव: पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय टीम ने पिछले साढ़े तीन साल में 7 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. यह ‘स्पीड’ भारत के नए वर्क कल्चर को दर्शाती है, जहां जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए डेडलाइन पर काम किया गया।
पाइपलाइन में और क्या है?
न्यूज़ीलैंड तो बस शुरुआत है. भारत का असली लक्ष्य दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ सीधा व्यापारिक गलियारा बनाना है:
· यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका: आने वाले कुछ महीनों में इन दो दिग्गजों के साथ समझौते होने की उम्मीद है. यह भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी. ईयू के साथ जनवरी में मदर ऑफ ऑल डील हुई थी. इसके पूरी तरह से लागू होने की प्रक्रियाएं जारी हैं।
· 9 समझौतों का जादुई आंकड़ा: इन समझौतों के बाद भारत के कुल 9 FTA हो जाएंगे. ये कोई साधारण देश नहीं बल्कि 38 विकसित देश होंगे।
· ग्लोबल GDP पर प्रभाव: इसके पूरा होते ही भारत की पहुंच दुनिया के लगभग दो-तिहाई व्यापार और 65-70% वैश्विक जीडीपी तक सीधे तौर पर हो जाएगी।
विकसित भारत 2047 के लिए यह क्यों जरूरी है?
1. मार्केट एक्सेस: भारतीय किसानों, कारीगरों और MSMEs को अब ग्लोबल मार्केट में अपनी जगह बनाने के लिए ऊंचे टैक्स (Tariffs) का सामना नहीं करना पड़ेगा।
2. निवेश का प्रवाह: न्यूज़ीलैंड का $20 बिलियन का वादा केवल शुरुआत है. अमेरिका और EU के साथ समझौते से भारत में अरबों डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आएगा।
3. सर्विस सेक्टर की ताकत: भारत के आईटी और सर्विस सेक्टर के युवाओं के लिए इन विकसित देशों में काम करने और सेवा देने के रास्ते और आसान हो जाएंगे।
सवाल-जवाब
न्यूज़ीलैंड के साथ FTA इतनी जल्दी (9 महीनों में) कैसे पूरा हो गया?
यह दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विश्वास और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीतिक जरूरत की वजह से संभव हुआ. पीयूष गोयल ने इसे “भरोसे और मजबूत रिश्तों” का परिणाम बताया है।
क्या भारत का अमेरिका के साथ भी कोई समझौता होने वाला है?
जी हाँ, वाणिज्य मंत्री के अनुसार आगामी कुछ महीनों में अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ दो बड़े समझौते पाइपलाइन में हैं।
इन 9 FTA समझौतों का भारत की जीडीपी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इन समझौतों के बाद भारत की पहुंच दुनिया की लगभग 65-70% ग्लोबल जीडीपी तक हो जाएगी, जिससे भारत के एक्सपोर्ट में भारी बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था में तेज उछाल आने की उम्मीद है।
इस समझौते से आम युवाओं को क्या फायदा होगा?
यह FTA स्टार्टअप्स, डिजिटल इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए मौके पैदा करेगा. साथ ही, युवाओं के लिए ग्लोबल मार्केट में कौशल और प्रतिभा दिखाने के रास्ते खुलेंगे।
न्यूजीलैंड से FTA में आम भारतीय को क्या मिलेगा? हर साल 5000 वीजा और 0 ड्यूटी का फायदा
नईदिल्ली कल तक जो सिर्फ फाइलों का हिस्सा था आज वो हकीकत बन चुका है. दिल्ली और वेलिंगटन के बीच समुद्र की दूरियां अब व्यापार के सेतु से सिमट गई हैं। जब दुनिया के बड़े-बड़े देश ट्रेड वॉर और मंदी के साये में दुबके हैं, तब भारत ने महज 270 दिनों के भीतर न्यूजीलैंड के…

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