PM मोदी का सेशल्स दौरा शुरू, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने गर्मजोशी से किया स्वागत

विक्टोरिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंच चुके हैं। एयरपोर्ट पर सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया। अपने स्वागत से गदगद पीएम मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति का आभार भी जताया। पीएम मोदी ने कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर में हमारा एक अहम समुद्री साझेदार और…

PM मोदी का सेशल्स दौरा शुरू, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने गर्मजोशी से किया स्वागत

विक्टोरिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंच चुके हैं। एयरपोर्ट पर सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया। अपने स्वागत से गदगद पीएम मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति का आभार भी जताया। पीएम मोदी ने कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर में हमारा एक अहम समुद्री साझेदार और करीबी दोस्त है। मैं इस यात्रा को लेकर उत्साहित हूं, जिसका मकसद हमारे पुराने रिश्तों को और मजबूत करना और दोनों देशों के लोगों के फायदे के लिए सहयोग बढ़ाना है। वह सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर वहां की राजकीय यात्रा कर रहे हैं।

एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान कच्छ के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ सेशेल्स नेशनल बोटैनिकल गार्डन पहुंचे, जहां उन्होंने पौधा लगाया और वहां मौजूद सेशेल्स के मूल निवासी एल्डाब्रा जाइंट कछुओं को खाना खिलाया।

मोदी 29 जून को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। यह समारोह देश की आजादी के 50 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे।

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय संबंधोंपर चर्चा करेंगे। इसके अलावा वह सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।

सेशेल्स में पीएम मोदी का कार्यक्रम
पीएम मोदी अपनी यात्रा के दौरान सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेंगे और संबंधों को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री ने यात्रा पर रवाना होने से पहले एक बयान में कहा कि सेशेल्स भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर’ तथा ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की साझा प्रतिबद्धता का प्रमुख साझेदार है। उन्होंने कहा कि वह दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से होने वाली द्विपक्षीय वार्ता को लेकर उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि हम मिलकर अपने-अपने लोगों की प्रगति को आगे बढ़ाने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेंगे।

मैं सेशेल्स जा रहा हूं, जहां मैं उनके राष्ट्रीय दिवस समारोह में हिस्सा लूंगा। इस साल यह और भी खास है क्योंकि यह स्वर्ण जयंती समारोह है। इस वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ भी है। दोनों देशों के संबंध पारस्परिक विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे आत्मीय संबंधों पर आधारित हैं।

भारतीय युद्धपोत और सैनिक भी सेशेल्स पहुंचे
सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले 2015 में सेशेल्स की यात्रा की थी। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे और ऐसा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर दोनों देशों को जोड़ने वाले मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं का प्रतीक है।

सेशेल्स कहां स्थित है?
सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित और लगभग 455 वर्ग किलोमीटर में फैले 115 द्वीपों का एक द्वीपीय देश है। यह मेडागास्कर के उत्तर-पूर्व और मुख्य भूमि अफ्रीका (केन्या) से लगभग 1,600 किलोमीटर पूर्व में स्थित है यह अपनी प्राचीन सफेद रेत वाले समुद्र तटों, मूंगा चट्टानों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए मशहूर है। सेशेल्स में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक यहां के समुद्र तटों और प्रकृति को देखने आते हैं। सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया है, जो माहे द्वीप पर स्थित है।

भारत-सेशेल्स संबंध
भारत और सेशेल्स के बीच साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित लंबे समय से घनिष्ठ साझेदारी रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी के रूप में सेशेल्स का भारत के ‘विजन महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) तथा ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान है। भारत और सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती (पायरेसी) की रोकथाम, गश्त और समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के रक्षा बल आपस में घनिष्ठ सहयोग करते हैं। भारत ने सेशेल्स के कोस्ट गार्ड को कई नौसैनिक जहाज और डोर्नियर विमान सौंपे हैं।

भारत के लिए सेशेल्स का महत्व
सेशेल्स हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करने और हिंद महासागर क्षेत्र में 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने के लिए भारत का एक प्रमुख समुद्री और रक्षा साझेदार है। भारत और सेशेल्स समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और आतंकवाद को रोकने के लिए लगातार एक साथ काम कर रहे हैं। सेशेल्स का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) बहुत बड़ा है, जो समुद्री संसाधनों, तेल और गैस की खोज और बेहतर आर्थिक उपयोग के लिए भारत के लिए महत्वपूर्ण है। सेशेल्स की लगभग 11% आबादी भारतीय मूल की है, जो आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं।

सेशेल्स के कछुए लंबी उम्र के लिए मशहूर
दुनिया में कछुओं की 360 से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें से सेशेल्स में पाया जाने वाला अल्डाब्रा जायंट कछुआ सबसे प्रसिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह प्रजाति अपनी बेहद लंबी उम्र (औसत उम्र 150 साल) के लिए जानी जाती है।

दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। वह 1882 में करीब 50 साल की उम्र में सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था।

वैज्ञानिक उसकी लंबी उम्र का राज जानने के लिए उसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उसकी कोशिकाएं इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं करतीं। इससे उम्र बढ़ने और लंबी जिंदगी से जुड़े नए रहस्यों का पता चल सकता है।

कछुओं के ज्यादा जीने के पीछे 2 मुख्य कारण

1. धीमी रफ्तार: कछुओं की जीवनशैली धीमी होती है, वह शरीर धीरे-धीरे काम करता है, इसलिए उनकी ऊर्जा कम खर्च होती है और शरीर की कोशिकाएं जल्दी खराब नहीं होतीं। इससे उनका शरीर जल्दी बूढ़ा नहीं होता।

2. मजबूत कवच: कछुओं का सख्त कवच उन्हें चोट और दुश्मनों से बचाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करने और कई बीमारियों से लड़ने में भी बेहतर होता है। इसी कारण कई कछुए 100 से 150 साल या उससे भी ज्यादा जी लेते हैं।

मोदी बोले- भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे
पीएम मोदी ने सेशल्स दौरे पर कहा- सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और 'विजन महासागर (MAHASAGAR)' का प्रमुख साझेदार है। इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं।

फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद अब इस दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

मैं सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनूंगा। यह अवसर दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाता है। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया है।

मुझे विश्वास है कि यह यात्रा भारत-सेशेल्स संबंधों को और गहरा करेगी, हिंद महासागर में समुद्री सहयोग बढ़ाएगी और सुरक्षित, शांतिपूर्ण व समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी।

मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री
इंदिरा गांधी ने साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था।

उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था।

मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की, ताकि समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत हो सके।

मोदी ने भारत की मदद से बने तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा था।

उस समय चीन हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। ऐसे में मोदी का दौरा भारत की 'पड़ोसी पहले' और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीति का अहम हिस्सा माना गया।

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