मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट रीशफल की अटकलें, कई मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में फेरबदल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है। इस फेरबदल में कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। वहीं विवादों में रहे…

मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट रीशफल की अटकलें, कई मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में फेरबदल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है। इस फेरबदल में कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। वहीं विवादों में रहे मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि पूर्व आईएएस अधिकारी और आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री बनाया जा सकता है और निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा मिल सकता है। बता दें कि NEET पेपर लीक मामले के बाद धर्मेंद्र प्रधान का विरोध तेज हो गया है। कई संगठन उनके इस्तीफे का मांग कर रहे हैं। ऐसे में मोदी कैबिनेट में फेरबदल करके बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

मोदी कैबिनेट के संभावित नए मंत्री
1- नीतीश कुमार

2- शक्तिकांत दास

3- सुखेंदु शेखर राय

4- तरुण चुग

5- राघव चड्ढा

6- श्रीकांत शिंदे

7- अनुराग ठाकुर
इनके बदल सकते हैं पोर्टफोलिया, या फिर बाहर का रास्ता

1- मनोहरलाल खट्टर

2- रवनीत सिंह बिट्टू

3- अश्विनी वैष्णव

4- धर्मेंद्र प्रधान

5- निर्मला सीतारमण

6- हरदीप सिंह पुरी

7- नितिन गडकरी

शक्तिकांत दास के अनुभव का फायदा उठाना चाहती है सरकार?
पूर्व आईएएस और आरबीआई गवनर्र शक्तिकांत दास इस समय 69 साल के हैं। सरकार के साथ काम करने और वित्तीय मामलों का उनका लंबा अनुभव है। अगर उन्हें वित्त मंत्री बनाया जाता है तो पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री सीडी देशमुख की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। सीडी देशमुख आरबीआई के पहले गवर्नर थे और उन्हें 1950 से 1956 तक वित्त मंत्री के तौर पर काम करने का मौका मिला। वहीं डॉ. मनमोहन सिंह 1982 से 1985 तक आरबीआई गवर्नर रहे। इसके बाद 1991 से 1996 तक देश के वित्त मंत्री रहे। इसके बाद 2004 से 2014 तक वह देश के प्रधानमंत्री भी रहे। डॉ. मनमोहन सिंह ऐसे अकेले ही व्यक्ति थे जो कि आरबीआई गवर्नर, वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

शक्तिकांत दास की बात करें तो वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। हालांकि उन्हें 6 महीने के अंदर ही राज्यसभा भेजा जा सकता है। अटकलें हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा जा सकता है। नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो जाएंगी।

क्यों वित्त मंत्रालय के लिए योग्य माने जा रहे शक्तिकांत दास?
शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री के पद के लिए योग्य माना जा रहा है। उन्हें टैक्स और निवेश के साथ ही आर्थिक नीति की गहरी जानकारी है। इसके अलावा वित्त मंत्रालय में काम करते हुए वह 8 बजट तैयार करने में शामिल रह चुके हैं। इसके अलावा 2018 से 2024 तक आरबीआई गवर्नर रहने के दौरान उन्हें वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली। उन्हें A+ रेटिंग के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार भी मिले हैं।

विधानसभा चुनावों का भी रखा जाएगा ध्यान
कैबिनेट में फेरबदल में आने वाले यूपी, पंजाब के विधानसभा चुनावों को भी ध्यान में रखा जाएगा। नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विवादों में घिर गए हैं। ऐसे में उनपर कार्रवाई हो सकती है। वहीं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की जगह भी पंजाब से राघव चड्ढा या फिर किसी सिख चेहरे को लाया जा सकता है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

पंजाब से इस समय रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय मंत्रिमंडल में हैं। वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा नए चेहरों में महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे का नाम शामिल हो सकता है जो कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे है। श्रीकांत शिंदे ही शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को एनडीए के साथ लेकर आए हैं। वहीं टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में जाने वाले सुखेंदु शेखर को भी केंद्रीय मंत्रीमंडल में जगह दी जा सकती है।

कैबिनेट रीशफल में सबकी निगाहें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी होंगी। हालांकि अटकलें यही हैं कि निर्मला सीतारमण को कैबिनेट से बाहर नहीं किया जाएगा बल्कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। वहीं कई जानकारों का कहना है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय ले लिया जाता है तो यह संदेश जाएगा कि सरकार झुक गई है। इसके अलावा नौकरशाही से कैबिनेट में आए दो मंत्रियों की भूमिका कम की जा सकी है। इनमें अश्विनी वैष्णव और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल में आरएसएस की पसंद का ध्यान रखा जा सकता है। बीते दिनों आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ बीजेपी की बैठक भी हुई थी। विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए रवनीत बिट्टू को पंजाब में चुनाव का जिम्मा दिया जा सका है और तरुण चुग को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

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