,

राष्ट्र की एकता और अखंडता के महान पुरोधा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धापूर्वक नमन

चंडीगढ़  भारत के महान राष्ट्र नायकों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे केवल एक प्रखर शिक्षाविद्, दूरदर्शी राजनेता और कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले एक युगपुरुष थे। उनका सम्पूर्ण…

राष्ट्र की एकता और अखंडता के महान पुरोधा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धापूर्वक नमन

चंडीगढ़ 

भारत के महान राष्ट्र नायकों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे केवल एक प्रखर शिक्षाविद्, दूरदर्शी राजनेता और कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले एक युगपुरुष थे। उनका सम्पूर्ण जीवन हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। महानता के सभी गुण उन्हें विरासत में मिले थे। उनके पिता आशुतोष बाबू अपने जमाने के प्रख्यात शिक्षाविद् थे। वे 24 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य बने। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कर्मक्षेत्र के रूप में 1939 से राजनीति में भाग लिया और आजीवन इसी में लगे रहे। उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में देश के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। किंतु जब राष्ट्रहित के मूल्यों से समझौता करने की स्थिति आई, तब उन्होंने सिद्धान्तों के लिए अपने पद का त्याग करना उचित समझा।

यह उनके उच्च आदर्शों और अटूट राष्ट्रहित का अनूठा प्रमाण है। डॉ. मुखर्जी ने सदैव एक सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा। उनका विश्वास था कि देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है तथा इसके साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता। जम्मू कश्मीर के सन्दर्भ में उनका ऐतिहासिक संदेश 'एक देश में दो विधान, दो प्रथम और दो निशान नहीं चलेंगे। केवल एक ही नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का उद्घोष था। इसी उद्देश्य के लिए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर राष्ट्रसेवा की एक अमर मिसाल स्थापित की। आज विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हुए हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से निरन्तर प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

एक मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी को स्वतंत्र भारत की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने वाली सबसे सफल चार परियोजनाओं की शुरुआत करने का श्रेय जाता है। वर्ष 1948 में, पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में स्वचालित इंजन कारखाने की शुरुआत हुई जिसमें वर्ष 1950 में 'देशबंधु नाम से एसेंबल किये गए पार्ट्स से देश के प्रथम भारतीय स्वचालित इंजन का निर्माण किया गया। डॉ. मुखर्जी ने हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट फैक्ट्री को लिमिटेड कंपनी के रूप में पुनर्गठित किया, जिसने शानदार काम करते हुए इंडियन एयरफोर्स के लिए जेट एयरक्राफ्ट की असेंबलिंग की। नागरिक तथा रक्षा उद्देश्यों के प्रशिक्षण के लिए एचटी-2 का, भारतीय रेलवे के लिए 'स्टील रेल कोच' का, तथा विभिन्न राज्यों तथा निजी परिवहन प्राधिकरण के लिए बसों के बाहरी ढांचे का निर्माण किया गया। इस प्रकार, डॉ. मुखर्जी के कुशल और योग्य नेतृत्व में 1947-48 तथा 1948-49 में विश्वयुद्ध के दौरान हुई क्षति को लाभ में बदल दिया गया। कंपनियों का विक्रय 1949-50 में लगभग 2 करोड़ रुपये तक हो गया। उस समय हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट कारखाने द्वारा निर्मित भारतीय रेलवे के नये मॉडल थर्ड क्लास कोच का निर्माण सही मायने में डॉ. मुखर्जी की व्यक्तिगत रूचि का ही परिणाम था।

डॉ. मुखर्जी भारतीय एकता, सुशासन और आत्मनिर्भर के प्रबल समर्थक थे। यद्यपि हरियाणा का गठन उनके निधन के बाद हुआ है। फिर भी उनके राष्ट्रवादी विचारों और नीतिगत दृष्टिकोण ने ऐसे भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की जिसने हरियाणा सहित पूरे देश के विकास की दिशा को प्रेरित किया। उन्होंने कृषि, उद्योग, शिक्षा और राष्ट्रीय एकीकरण को देश की प्रगति का आधार माना। हरियाणा आज कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास, खेल और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। डॉ. मुखर्जी का मानना था कि विकास का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उनके विचार, पारदर्शी प्रशासन, मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था और जन-कल्याणकारी नीतियों को बढ़ावा देते हैं। हरियाणा सरकार ऐसी महान विभूति के आदर्शों का अनुसरण कर रही है।

आज हरियाणा में आधुनिक सड़कें, नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और निवेश को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां उसी समावेशी और विकासोन्मुख सोच को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हैं। उनके आदर्श आज भी हरियाणा को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना 01.04.2017 से शुरू की गई हैं। इस योजना के तहत उन व्यक्तियों को कवर किया जाता है, जो हरियाणा के स्थाई निवासी हों तथा हरियाणा में रह रहें हैं और जिन द्वारा प्रधान मन्त्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत पंजीकरण नहीं करवाया गया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना के तहत एक लाख रुपये की राशि का लाभ दिया जाता है 18 से 70 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति को इस योजना के तहत कवर किया जाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश ने राष्ट्रीय एकता, सुशासन, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण के अनेक ऐतिहासिक आयाम स्थापित किए हैं। यह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों के भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है।
उनके जन्म दिवस पर मैं उन्हें अपनी ओर से नमन करता हूं जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे। उन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। हम उनके द्वारा संजोए गए सेवा मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।

नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports