मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज, नौकरशाहों को अहम मंत्रालय मिलने की संभावना

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। इस विस्तार में अनुभवी सेवानिवृत्त नौकरशाहों को अहम जिम्मेदारियां मिलने की अटकलें है। सूत्रों का कहना है कि ‘परफॉर्मेंस’ और ‘लॉयल्टी’ के फॉर्मूले पर खरे उतरने वाले अफसरों को पीएम मोदी जल्दी रिटायर नहीं होने देते। ऐसे में कुछ…

मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज, नौकरशाहों को अहम मंत्रालय मिलने की संभावना

नई दिल्ली

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। इस विस्तार में अनुभवी सेवानिवृत्त नौकरशाहों को अहम जिम्मेदारियां मिलने की अटकलें है। सूत्रों का कहना है कि ‘परफॉर्मेंस’ और ‘लॉयल्टी’ के फॉर्मूले पर खरे उतरने वाले अफसरों को पीएम मोदी जल्दी रिटायर नहीं होने देते। ऐसे में कुछ बड़े अधिकारियों के नाम मंत्रिमंडल फेरबदल में शामिल हो सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में शक्तिकांत दास और तपन डेका जैसे आला अधिकारियों के नाम हैं। इनके अलावा भी कुछ अधिकारी महत्वपूर्ण स्थानों पर नजर आ सकते हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में भी कभी-कभी ऐसे प्रयोग हुए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में यह व्यवस्थागत रूप ले चुकी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार मिलना सामान्य हो गया है और वे विभिन्न मंत्रालयों तथा सरकार संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह मॉडल न केवल प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करता है, बल्कि बड़े सुधारों को गति देने और संकट प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है।

सरकारों को यह होता है लाभ: दशकों का प्रशासनिक अनुभव, जटिल नीतियों की गहरी समझ, संस्थागत स्मृति का संरक्षण, बड़े सुधारों में निरंतरता, संकट के समय अनुभवी नेतृत्व की उपलब्धता और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन रिटायर लोगों को जिम्मेदारी देने की बड़ी वजह बताई जाती है। मोदी सरकार का जोर अनुभव, निष्ठा और परिणाम पर रहा है। फाइल क्लियरेंस, प्रोजेक्ट डिलीवरी, खर्च प्रबंधन की दक्षता और शिकायत निवारण जैसे पैमानों पर अधिकारियों को स्कोर कार्ड दिए जा रहे हैं। हालांकि, इस मॉडल की आलोचना भी होती है। आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक सेवा विस्तार से नए अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

भारत ही नहीं कई देशों में भी यह प्रयोग
यह प्रवृत्ति केवल भारत तक सीमित नहीं है। सिंगापुर में स्थायी सचिव सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कंपनियों और नीति आयोगों का नेतृत्व करते हैं। अमेरिका में जेम्स मैटिस और लॉयड ऑस्टिन (सेवानिवृत्त जनरल) रक्षा मंत्री बने। जेनेट येलेन (पूर्व फेड चेयर) वित्त मंत्री बनीं। जेरोम पॉवेल केंद्रीय बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व अधिकारी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, थिंक टैंक और विशेष दूत के रूप में कार्य करते हैं। ब्रिटेन में सेवानिवृत्त वरिष्ठ सिविल सेवकों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स, सार्वजनिक आयोगों और नियामक संस्थाओं में नियुक्त करना सामान्य है। मार्क सेडविल सेवानिवृत्ति के बाद विभिन्न संस्थानों में रणनीतिक भूमिकाएं निभा चुके हैं। फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों स्वयं उच्च सिविल सेवा से आए। जापान में अमकुदरी (स्वर्ग से अवतरण) परंपरा के तहत वरिष्ठ नौकरशाह सेवानिवृत्ति के बाद निजी कंपनियों में नेतृत्व करते हैं।

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