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इटकी में 50 एकड़ जमीन पर बनेगा एआईआईए हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर

रांची झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्रांति होने जा रही है। एम्स की तर्ज पर अब रांची के इटकी में देश का प्रतिष्ठित 'ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा' (एआईआईए) वर्ल्ड-क्लास हॉस्पिटल, रिसर्च सेंटर और अत्याधुनिक योगा सेंटर का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए इटकी सेनोटोरियम की करीब 50 एकड़ की प्राइम लैंड को…

इटकी में 50 एकड़ जमीन पर बनेगा एआईआईए हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर

रांची
झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्रांति होने जा रही है। एम्स की तर्ज पर अब रांची के इटकी में देश का प्रतिष्ठित 'ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा' (एआईआईए) वर्ल्ड-क्लास हॉस्पिटल, रिसर्च सेंटर और अत्याधुनिक योगा सेंटर का निर्माण प्रस्तावित है।

इसके लिए इटकी सेनोटोरियम की करीब 50 एकड़ की प्राइम लैंड को चिन्हित किया गया है। केंद्र सरकार के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए गुरुवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा और आयुर्वेदा के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कृष्ण कुमार सहित उच्चाधिकारियों की एक हाई-प्रोफाइल टीम ने इटकी सेनोटोरियम का दौरा किया।

टीम ने स्थानीय सीओ गिरेन्द्र टूटी, सीआई और अमीन के साथ मिलकर प्रस्तावित भूमि का गहन तकनीकी व भौगोलिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत निदेशक शशि प्रकाश झा ने यक्ष्मा आरोग्यशाला के प्रशासनिक भवन में अधीक्षक डॉ. पी.के. भगत व अन्य अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल ब्रीफिंग की।

निदेशक ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में बताया की भारत सरकार द्वारा देश के तीन चुनिंदा राज्यों को 'ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा' आवंटित किया जा रहा है। झारखंड इस रेस में मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहा है।

संयुक्त बिहार से झारखंड गठन के बाद से चूंकि राज्य में अब तक एक भी राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेद संस्थान नहीं है, इसलिए इटकी इसके लिए सबसे मुफीद उपयुक्त है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कभी टीबी (यक्ष्मा) के इलाज का बड़ा केंद्र रहे इटकी सेनोटोरियम में मरीजों की संख्या में अब निरंतर गिरावट आ रही है। इस वजह से सेनोटोरियम के पास 80 से 90 एकड़ का एक विशाल सरप्लस लैंड बैंक उपलब्ध है।

इस अनुपयोगी पड़ी भूमि का उपयोग मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए किया जाएगा। प्रशासनिक गलियारों से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग के अपर मुख्य सचिव और खुद मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर हैं। मुख्यमंत्री की हार्दिक इच्छा है कि इस नेशनल इंस्टीट्यूट की स्थापना हर हाल में झारखंड में ही हो।

प्रोजेक्ट को फास्ट ट्रैक पर लाने के लिए इटकी अंचल कार्यालय को भूमि का म्यूटेशन, चौहद्दी और तकनीकी रिपोर्ट जल्द से जल्द जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है, ताकि केंद्र को फाइनल प्रपोजल भेजा जा सके।

आयुर्वेदा के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस इंटीग्रेटेड आयुष कैंपस का ब्लूप्रिंट बेहद आधुनिक है: प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकी विशेषताएं हैं

  1.     टर्शियरी केयर आयुर्वेदा हॉस्पिटल गंभीर बीमारियों के आयुर्वेदिक और पंचकर्म इलाज की विश्वस्तरीय सुविधाएं होगी।
  2.     आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज & रिसर्च विंगयूजी/पीजी और डॉक्टरेट स्तर पर क्लीनिकल रिसर्च और शिक्षा।
  3.     ग्लोबल योगा और वैलनेस सेंटरमाइंड-बॉडी हीलिंग और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधाएं शामिल है।

 

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