दिल्ली की सीक्रेट मीटिंग से बढ़ी सियासी हलचल, उद्धव कैंप में बगावत की चर्चाएं तेज

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' और गुप्त मुलाकातों के दौर की यादें ताजा हो गई हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT गुट के जिन 6 लोकसभा सांसदों ने पिछले महीने पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थामा था, अब उनकी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के…

दिल्ली की सीक्रेट मीटिंग से बढ़ी सियासी हलचल, उद्धव कैंप में बगावत की चर्चाएं तेज

मुंबई 

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' और गुप्त मुलाकातों के दौर की यादें ताजा हो गई हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT गुट के जिन 6 लोकसभा सांसदों ने पिछले महीने पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थामा था, अब उनकी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ हुई एक 'अघोषित बैठक' की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आ गई हैं।

इन तस्वीरों के सामने आने के बाद शिवसेना (UBT) को लगे इस सबसे बड़े झटके की इनसाइड स्टोरी और पुख्ता हो गई है, जिसे शिंदे गुट ने 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया था।

क्या है 'ऑपरेशन टाइगर' और दिल्ली में क्या हुआ?
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बेहद गुपचुप तरीके से महीनों से बुना जा रहा था, जिसका क्लाइमेक्स दिल्ली में देखने को मिला। सामने आई तस्वीरें 17 जून की उस सुबह की गवाही दे रही हैं जब इन सांसदों ने दिल्ली में पाला बदला।

    तड़के 6:30 बजे की हलचल: बागी सांसद ओमराजे निंबालकर सुबह करीब 6:30 बजे ही सबसे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दिल्ली आवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने दलबदल के कागजातों पर दस्तखत किए और तुरंत महाराष्ट्र के लिए रवाना हो गए।

    होटल लीला में जमावड़ा: बाकी के 5 सांसद- संजय दिना पाटील, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर और भाऊसाहेब वाकचौरे सुबह करीब 7:30 बजे दिल्ली के आलीशान होटल लीला पहुंचे। इनके साथ ही शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे और महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक भी अलग-अलग रास्तों से वहां पहुंचे ताकि किसी को भनक न लगे।

    अध्यक्ष के गार्डन में हस्ताक्षर: सुबह करीब 9:30 बजे यह पूरा ग्रुप ओम बिरला के घर पहुंचा, जहां बाकी सांसदों ने भी अलग गुट के रूप में मान्यता देने के लिए दस्तखत किए। वायरल तस्वीरों में ये पांचों सांसद लोकसभा अध्यक्ष के लॉन में एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

बगावत के पीछे सांसदों ने क्या दी दलील?
इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे पत्र में दावा किया कि वे यह कदम उठाने पर इसलिए मजबूर हुए क्योंकि उद्धव ठाकरे अपनी शिवसेना (UBT) का विलय कांग्रेस पार्टी में करने की योजना बना रहे थे, जो सांसदों और शिवसेना की मूल विचारधारा के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य था।

सांसदों ने यह भी सुनिश्चित किया कि उनके पास दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए आवश्यक दो-तिहाई संख्या बल (9 में से 6 सांसद) मौजूद है।

हमने चौका नहीं, सीधा छक्का मारा है: एकनाथ शिंदे
सांसदों के आधिकारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 'ऑपरेशन टाइगर' के सफल होने का एलान किया। इन सांसदों को जमीन से जुड़े "धुरंधर और शेर" बताते हुए शिंदे ने 2022 की अपनी ऐतिहासिक बगावत की यादें ताजा कीं।

उन्होंने कहा, "चार साल पहले (जून 2022) जब हमने शिवसेना के भीतर विद्रोह किया था, तब हमारे साथ 40 विधायक थे। उस समय हमने चौका मारा था। लेकिन इस बार, हमने चौका नहीं बल्कि सीधा छक्का (सिक्सर) मारा है। ये छह शेर अब अपनी असली शिवसेना फैमिली में वापस आ गए हैं।"

इस बड़े सियासी उलटफेर ने उद्धव ठाकरे खेमे को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। जहां उद्धव गुट इन सांसदों की वैधता पर सवाल उठा रहा है और कानूनी कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं इन ताजा तस्वीरों ने साफ कर दिया है कि 'ऑपरेशन टाइगर' की स्क्रिप्ट बेहद चालाकी और पुख्ता तैयारी के साथ लिखी गई थी।

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