मुख्यमंत्री विजय की बड़ी चाल, AIADMK में टूट से TVK बहुमत के करीब पहुंची।

नई दिल्ली तमिलनाडु की राजनीति में इस समय एक बड़ा सियासी भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्रि कड़गम (TVK) बहुमत के करीब पहुंचती दिख रही है। खबर आ रही है कि मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) के करीब 10 और असंतुष्ट विधायक विधानसभा की सदस्यता से…

मुख्यमंत्री विजय की बड़ी चाल, AIADMK में टूट से TVK बहुमत के करीब पहुंची।

नई दिल्ली
तमिलनाडु की राजनीति में इस समय एक बड़ा सियासी भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्रि कड़गम (TVK) बहुमत के करीब पहुंचती दिख रही है। खबर आ रही है कि मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) के करीब 10 और असंतुष्ट विधायक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर 15 अगस्त से पहले औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो सकते हैं। विजय की पार्टी के भीतर इस योजना को ऑपरेशन एल (Operation L) का नाम दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि विधायकों के इस्तीफे की यह टाइमिंग बेहद सोच-समझकर तय की गई है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग जल्द ही विधानसभा उपचुनावों का ऐलान कर सकता है। वार्ता में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "इस्तीफे और दलबदल की यह पूरी प्रक्रिया स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरी कर ली जाएगी। मुख्य उद्देश्य यह है कि चुनाव आयोग द्वारा उपचुनावों की तारीखों की घोषणा करने से पहले इसे अंतिम रूप दे दिया जाए।"

यह राजनीतिक उठापटक पिछले कुछ हफ्तों से लगातार जारी है। मई महीने में जिन 25 AIADMK विधायकों ने अपनी ही पार्टी के व्हिप का उल्लंघन कर सरकार बनाने के लिए विजय का समर्थन किया था, उनमें से लगभग आधे या तो TVK का दामन थाम चुके हैं या शामिल होने की कगार पर हैं।

तमिलनाडु में क्या है सीटों का गणित
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा की वर्तमान में 227 विधायकों की क्षमता है। 7 सीटें फिलहाल खाली हैं। सत्तारूढ़ TVK के 107 विधायक हैं। वहीं, विपक्षी AIADMK में लगातार इस्तीफों के कारण घटकर विधायकों की संख्या 41 हो गई है। हाल ही में एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर और एम. आर. विजयभास्कर ने अपने पद से इस्तीफा देकर TVK की सदस्यता ली थी। इनके अलावा पूर्व मंत्री एम.एस.एम. आनंदन, एस. वलारमथी और कई पूर्व विधायक व जिला स्तरीय पदाधिकारी भी पाला बदल चुके हैं। इससे विपक्ष लगातार कमजोर हो रहा है और सत्तारूढ़ दल बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है।

सूत्रों का दावा है कि बागी विधायकों के अगले जत्थे में एआईएडीएमके के सबसे बड़े और प्रभावशाली क्षेत्रीय क्षत्रप माने जाने वाले एस. पी. वेलुमणि और सी. वी. शनमुगम के करीबी नेता शामिल हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक ये दोनों दिग्गज नेता खुद भी टीवीके में शामिल हो सकते हैं।

कैबिनेट मंत्री पद और टिकट का भरोसा
इस्तीफा देने वाले विधायकों को आगामी उपचुनावों में TVK के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा। वरिष्ठ नेताओं से वादा किया गया है कि दोबारा जीतकर आने पर उन्हें विजय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का पद सौंपा जाएगा। अन्य नेताओं को संगठन में जिला सचिव या राज्य स्तर पर पदाधिकारी बनाकर समायोजित किया जाएगा।

पलानीस्वामी पर तानाशाही के आरोप
पाला बदलने की तैयारी कर रहे एआईएडीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने आंतरिक कलह को उजागर करते हुए कहा कि यह कदम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि सालों की हताशा का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया, "पलानीस्वामी यानी कि EPS अपने आखिरी दिन तक पार्टी के महासचिव बने रहना चाहते हैं। जिला सचिव का पद छिन जाने के बाद भी हम में से कई लोगों ने इंतजार किया, लेकिन संकट को सुलझाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं हुआ।" एआईएडीएमके द्वारा वेलुमणि जैसे बड़े नेताओं के वफादार जिला सचिवों को हटाए जाने के कारण पार्टी के भीतर असंतोष की आग और भड़क गई थी।

वाशिंग मशीन से तुलना
इस पूरे दलबदल पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस खेल के पीछे भारी-भरकम वित्तीय प्रलोभन यानी कि हॉर्स-ट्रेडिंग शामिल है। इसके अलावा डीएमके (DMK) के नेताओं ने तंज कसते हुए इसे पॉलिटिकल वाशिंग मशीन करार दिया है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच का सामना कर रहे पूर्व मंत्रियों जैसे कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सी. विजयभास्कर को बचाने के लिए यह सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है। हालांकि, टीवीके ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कानूनी जांच अपनी जगह स्वतंत्र रूप से चलती रहेगी

इस बार मुख्यमंत्री विजय की रणनीति अन्य राजनीतिक दलों से काफी अलग है। वे थोक में दलबदल कराने के बजाय चरणों में नेताओं को शामिल कर रहे हैं। साथ ही वे इस बात पर अड़े हैं कि किसी भी विपक्षी विधायक को पार्टी के सिंबल पर रहते हुए शामिल नहीं किया जाएगा। उन्हें पहले इस्तीफा देना होगा और फिर उपचुनावों के जरिए जनता के बीच जाकर नया जनादेश हासिल करना होगा।

चुनाव के बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में कम से कम 5 बड़े एआईएडीएमके चेहरों को जगह मिल सकती है। इस कदम से मुख्यमंत्री विजय न केवल सहयोगियों पर अपनी निर्भरता कम करेंगे, बल्कि राज्य के जमीनी स्तर पर मजबूत विपक्षी चुनावी मशीनरी को अपनी नई नवेली पार्टी में समाहित कर लेंगे

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