स्मृति मंधाना की सलाह आई काम, यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स में बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली चोटें खिलाड़ियों के जीवन का हिस्सा होती है। हर खिलाड़ी चोटिल होता है। चोटों के कारण तो कई खिलाड़ियों का करियर खत्म हो गया या उतना नहीं चला जितना चलना चाहिए था। ये चोटें सिखाती भी हैं। लॉर्ड्स में शतक ठोक इतिहास रचने वाली यास्तिका भाटिया के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ…

स्मृति मंधाना की सलाह आई काम, यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स में बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली
चोटें खिलाड़ियों के जीवन का हिस्सा होती है। हर खिलाड़ी चोटिल होता है। चोटों के कारण तो कई खिलाड़ियों का करियर खत्म हो गया या उतना नहीं चला जितना चलना चाहिए था। ये चोटें सिखाती भी हैं। लॉर्ड्स में शतक ठोक इतिहास रचने वाली यास्तिका भाटिया के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। एक समय चोट के कारण महीनों दर्द से कराह रही इस खिलाड़ी ने ऐसी वापसी की है जिसे इतिहास कभी भूल नहीं पाएगा।

इस वापसी में भाटिया की असीम सहनशीलता शामिल है तो उनकी दोस्त स्मृति मंधाना से मिला गुरु ज्ञान भी। मंधाना के शब्दों ने मुश्किल समय में भाटिया में जान फूंकी थी और जो कहा था वो सही साबित होता दिख रहा है। भाटिया लॉर्ड्स पर शतक जमाने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी हैं। ये ऐतिहासिक काम उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे इकलौते टेस्ट मैच के तीसरे दिन किया है। उन्होंने 158 गेंदों पर 113 रनों की पारी खेली।

चोट के कारण रहीं बाहर
भाटिया को पिछले साल इंडिया कैम्प में बाएं घुटने में चोट लग गई थी। अक्टबूर में इसकी सर्जरी हुई और फिर उन्हें भारत में ही खेले गए वनडे वर्ल्ड कप से बाहर होना पड़ा। नतीजा ये रहा कि भारत ने जहां पहली बार विश्व विजेता का तमगा हासिल किया वहां भाटिया नहीं थीं। इसी साल मई में इंग्लैंड दौरे पर उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की और अपना पहला टी20 अर्धशतक ठोका।

हालांकि, टी20 वर्ल्ड कप में उनका बल्ला खामोश ही रहा। तीन मैचों में वह 41 रन ही बना पाईं। फिर आया लॉर्ड्स टेस्ट जहां शानदार पारी खेल भाटिया ने अपना नाम यहां के ऑनर बोर्ड पर लिखवा दिया। मंधाना को भी साल 2017 में यही चोट लगी थी।

दिन का खेल खत्म होने के बाद भाटिया ने कहा की मुश्किल समय में मंधाना के शब्दों ने उनकी मदद की। उन्होंने कहा, "मेरी उनसे बात हुई थी और उन्होंने मेरी तरफ देखकर कहा कि ये तुम्हारे करियर का टर्निंग प्वाइंट होने वाला है। उन्होंने मुझे बताया था कि उन्हें भी यही चोट लगी थी और रिहैब के दौरान उन्होंने काफी कुछ सीखा जिसने उन्हें पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने कहा था कि मेरी सोच भी बदल जाएगी और मेरा खेल अलग स्तर पर पहुंच जाएगा। वो शब्द मेरे साथ रह गए।"

भविष्य को लेकर थी चिंता
भाटिया ने कहा कि रिहैब के दौरान वह अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित थीं। उन्होंने कहा, "मैं इस बात को लेकर अनिश्चित थी कि यहां से मेरा क्या होगा? लेकिन उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत करते रहो। तुम एक सच्चाई से काम करने वाली शानदार इंसान हो। एक दिन तुम्हारा समय आएगा। उन्होंने मुझे ऐसे शब्द कहे और मेरी मदद की।"

भारत ने भाटिया के शानदार शतक के दम पर अपनी दूसरी पारी सात विकेट के नुकसान पर 341 रनों पर घोषित कर दी और इंग्लैंड को 457 रनों का टारगेट दिया है। दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने छह विकेट खोकर 130 रन बनाए हैं। टीम इंडिया जीत के काफी करीब है।

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