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लोकजीवन और पारंपरिक वेशभूषा के संरक्षक रघुविंद्र मलिक को सम्मान, ऐतिहासिक संग्रह बना आकर्षण

रोहतक. कभी हरियाणवी महिलाओं और पुरुषों की पहचान रहे पारंपरिक पहनावे अब इतिहास के पन्नों में सिमटते जा रहे हैं। ऐसे में रोहतक के रघुविंद्र मलिक पिछले चार दशक से इस विरासत को बचाने में जुटे हैं। उनके संग्रह में 100 साल पुराने हरियाणवी परिधानों से लेकर पारंपरिक आभूषणों तक का अनोखा संग्रह मौजूद है।…

लोकजीवन और पारंपरिक वेशभूषा के संरक्षक रघुविंद्र मलिक को सम्मान, ऐतिहासिक संग्रह बना आकर्षण

रोहतक.

कभी हरियाणवी महिलाओं और पुरुषों की पहचान रहे पारंपरिक पहनावे अब इतिहास के पन्नों में सिमटते जा रहे हैं। ऐसे में रोहतक के रघुविंद्र मलिक पिछले चार दशक से इस विरासत को बचाने में जुटे हैं। उनके संग्रह में 100 साल पुराने हरियाणवी परिधानों से लेकर पारंपरिक आभूषणों तक का अनोखा संग्रह मौजूद है।

रघुविंद्र मलिक के इस संग्रह में केवल कपड़े और आभूषण ही नहीं, बल्कि करीब 200 वर्ष पुरानी वस्तुएं भी हैं। इनमें कृषि औजार, पुराने कृषि यंत्र, घरों में प्रयोग होने वाले बर्तन और ग्रामीण जीवन से जुड़ी कई ऐतिहासिक वस्तुएं शामिल हैं। हरियाणा की संस्कृति और सभ्यता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से रोहतक निवासी रघुविंद्र मलिक ने अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी मेहनत से हरियाणवी पारंपरिक वेशभूषा और लोकजीवन से जुड़ी सैकड़ों पुरानी वस्तुओं का संग्रह तैयार किया है।

कई कपड़े रखे हैं सुरक्षित
उनके पास महिलाओं के पारंपरिक कुर्ता-दामन, घाघरी, ओढ़नी के साथ-साथ पुरुषों के पुराने कुर्ते और बच्चों के पारंपरिक कपड़े भी सुरक्षित हैं। रघुविंद्र मलिक ने बताया कि आज से करीब चार दशक पहले वर्ष 1986 में उन्होंने हरियाणा की संस्कृति को संरक्षित करने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने प्रदेश के गांव-गांव जाकर पुराने परिधान, आभूषण, कृषि उपकरण और घरेलू उपयोग की वस्तुएं एकत्रित करनी शुरू की। वहीं वर्ष 2006 से वह प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को हरियाणा की पुरानी परंपराओं और जीवनशैली से रूबरू करवा रहे हैं। इतना ही नहीं हरियाणवी वेशभूषा के साथ उनके पास पुराने आभूषणों का भी बड़ा संग्रह है।

इसमें छेल-कड़े, कंडी, झांजर सहित कई पारंपरिक गहने शामिल हैं। इसके अलावा करीब 100 वर्ष पुराना आभूषण रखने का बाक्स भी उनके संग्रह की खास वस्तुओं में शामिल है। हरियाणा की लोक कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए रघुविंद्र मलिक को प्रदेश सरकार की ओर से दो बार सम्मानित किया जा चुका है। उनके कार्यों की पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सराहना कर चुके हैं।

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