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वेस्टर्न बाईपास के अलाइनमेंट पर उठे सवाल, रामेश्वर शर्मा बोले- सुधार नहीं हुआ तो परियोजना नहीं चलेगी

 भोपाल भोपाल-इंदौर रोड को होशंगाबाद रोड से कनेक्ट करने के लिए प्रस्तावित महत्वाकांक्षी 'वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट' के अलाइनमेंट में एक बार फिर बदलाव के आसार बन रहे हैं । यह संभावित संशोधन क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा के कड़े रुख और उनके द्वारा दिए गए सुझावों के बाद देखा जा रहा है। राजस्व अमले के साथ…

वेस्टर्न बाईपास के अलाइनमेंट पर उठे सवाल, रामेश्वर शर्मा बोले- सुधार नहीं हुआ तो परियोजना नहीं चलेगी

 भोपाल
भोपाल-इंदौर रोड को होशंगाबाद रोड से कनेक्ट करने के लिए प्रस्तावित महत्वाकांक्षी 'वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट' के अलाइनमेंट में एक बार फिर बदलाव के आसार बन रहे हैं । यह संभावित संशोधन क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा के कड़े रुख और उनके द्वारा दिए गए सुझावों के बाद देखा जा रहा है।

राजस्व अमले के साथ अलाइनमेंट का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक ने एमपीआरडीसी के अफसरों को दोटूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "अलाइनमेंट सुधारो, नहीं तो प्रोजेक्ट अटका दूंगा।" गौरतलब है कि पिछले साल भी विभिन्न आपत्तियों के चलते यह प्रोजेक्ट अटक गया था।

बोरदा से सीधे थुआखेड़ा को जोड़ें, 4 किमी कम होगी दूरी
विधायक रामेश्वर शर्मा प्रोजेक्ट के रूट प्लान में आने वाले गांव थुआखेड़ा पहुंचे थे। वहां उन्होंने मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोड को बोरदा से सीधे थुआखेड़ा जोड़ने के लिए प्लानिंग में तत्काल बदलाव किया जाए।

  • वर्तमान प्लान के मुताबिक, यह सड़क बोरदा से कालापानी होते हुए थुआखेड़ा पहुंच रही है। विधायक ने इसमें सुधार सुझाते हुए कहा:
  • – कजलीखेड़ा थाने से 200 मीटर की दूरी पर वेस्टर्न बाईपास रोड पर पुल या फ्लाईओवर बनाया जाए।
  • – बोरदा से आ रही सड़क को सीधे थुआखेड़ा जाने वाली सड़क से जोड़ा जाए।
  • – इस सीधे जुड़ाव से बोरदा से कालापानी होते हुए थुआखेड़ा तक बनने वाला 4 किलोमीटर का घुमाव (कर्व) खत्म हो जाएगा, सड़क बिल्कुल सीधी होगी और कुल दूरी भी 4 किलोमीटर कम हो जाएगी।

अफसरों का तर्क- स्टेट लेवल कमेटी से मंजूर है प्लान
विधायक की इस तीखी चेतावनी और नए सुझावों पर एमपीआरडीसी के डिविजनल मैनेजर ईश्वर चंद्र चंदली ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा इस प्रोजेक्ट का मौजूदा अलाइनमेंट स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी से पहले ही अनुमोदित (मंजूर) हो चुका है।

हालांकि, विधायक द्वारा जो सुझाव दिए गए हैं, हम उनका तकनीकी रूप से परीक्षण कराएंगे। इस संबंध में अंतिम निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर ही लिया जाएगा।

 क्या है वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट?
वेस्टर्न बायपास एक फोरलेन सड़क परियोजना है, जिसका उद्देश्य भोपाल शहर के भीतर आने वाले भारी ट्रैफिक को बाहर से ही डायवर्ट करना है। पहले इस बायपास की लंबाई लगभग 41 किलोमीटर प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे घटाकर 35.61 किलोमीटर कर दिया गया है। यह नया मार्ग ज्यादा सीधा और प्रभावी बनाया गया है ताकि यात्रा समय और दूरी दोनों कम हो सकें।

कहां से शुरू होकर कहां खत्म?
इस बायपास का रूट रणनीतिक रूप से तैयार किया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा शहर और हाईवे कनेक्टिविटी कवर हो सके। यह मार्ग भोपाल-नर्मदापुरम रोड पर मंडीदीप के पास से शुरू होगा। आगे यह कोलार क्षेत्र से होकर गुजरेगा फिर रातीबड़ इलाके को पार करेगा। अंत में यह इंदौर रोड पर फंदा कला के पास जाकर जुड़ जाएगा। इस पूरे रूट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि शहर के अंदर जाने की जरूरत न पड़े और ट्रैफिक सीधे बाहर से निकल जाए।

ट्रैफिक पर पड़ेगा बड़ा असर
इस बायपास के बनने के बाद सबसे बड़ा फायदा ट्रैफिक को होगा। जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से आने वाला ट्रैफिक शहर के अंदर प्रवेश नहीं करेगा। वाहन सीधे इंदौर रोड की तरफ निकल जाएंगे इससे शहर के अंदर भीड़ और जाम काफी कम होगा। यात्रियों का लगभग 1 घंटे तक का समय बच सकेगा और करीब 23 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी भी कम होगी। 

डेढ़ घंटे का रास्ता अब 45 मिनट में 
अधिकारियों के अनुसार, इस बायपास के बनने के बाद यात्रा समय में बड़ा बदलाव आएगा। जहां पहले इस रूट को तय करने में लगभग डेढ़ घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर 45 मिनट से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। यह बदलाव सिर्फ समय की बचत नहीं है, बल्कि फ्यूल की बचत और ट्रैफिक स्ट्रेस कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम है।
लागत और तकनीकी मॉडल

इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 2900 करोड़ रुपए है। इसे हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) पर बनाया जाएगा, जो एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल है। इस मॉडल के तहत  प्रोजेक्ट लागत का 40% हिस्सा सरकार द्वारा 5 किस्तों में दिया जाएगा। बाकी 60% राशि सड़क बनने के बाद अगले 15 सालों तक दी जाएगी। 

कैसा होगा इंफ्रास्ट्रक्चर
यह बायपास सिर्फ एक सड़क नहीं बल्कि एक आधुनिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर होगा। इसमें 1 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), 2 फ्लाईओवर, 15 अंडरपास, 2 बड़े जंक्शन और सर्विस रोड दोनों तरफ (2 लेन) शामिल होंगे।  मुख्य सड़क को 10-लेन कॉन्फिगरेशन के हिसाब से प्लान किया गया है, जिसमें मूल रूप से 6-लेन स्ट्रक्चर पर 4-लेन की व्यवस्था होगी।

कैसे तय होगा पूरा सफर?

इस बायपास का रूट तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा जा सकता है-

    शुरुआती हिस्सा- औबेदुल्लागंज से आने वाले ट्रैफिक के लिए यह मार्ग मंडीदीप के ठीक पहले से शुरू होगा। यहां से वाहन शहर के भीतर जाने के बजाय सीधे बायपास पर चढ़ जाएंगे।

    मध्य भाग- पहाड़ी और जंगल क्षेत्र- इसके बाद यह मार्ग कोलार की ओर बढ़ेगा। इस दौरान एक गोल जंक्शन से रास्ता आगे निकलेगा। पहाड़ी क्षेत्र को काटते हुए सड़क बनाई जाएगी। फॉरेस्ट और निजी जमीन से होकर यह मार्ग गुजरेगा।

    अंतिम कनेक्शन- आखिरी हिस्से में यह बायपास रातीबड़ रोड को लगभग 4 किलोमीटर आगे क्रॉस करेगा। जैन मंदिर, खजूरी और फंदा के बीच के सेंटर पॉइंट से जुड़ेगा अंत में यह सीधे इंदौर रोड (फंदा कला के पास) से कनेक्ट हो जाएगा।

शहर और इंडस्ट्रियल कनेक्टिविटी में सुधार
इस प्रोजेक्ट का असर सिर्फ ट्रैफिक तक सीमित नहीं रहेगा। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र और भोपाल शहर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इंदौर (पीथमपुर) और भोपाल के इंडस्ट्रियल जोन बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन तेज होगा। भारी वाहन अब शहर के अंदर नहीं घुसेंगे। 

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