धरती की गर्मी से 24 घंटे बिजली! लद्दाख में ONGC ने 14,000 फीट की ऊंचाई पर रचा नया रिकॉर्ड

लेह  लद्दाख की Puga Valley में देश के पहले जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार को देश के सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं को कमीशन किया. यह भारत के क्लीन एनर्जी मिशन की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है. ONGC एनर्जी सेंटर इस यूनियन टेरिटरी में दो जियोथर्मल…

धरती की गर्मी से 24 घंटे बिजली! लद्दाख में ONGC ने 14,000 फीट की ऊंचाई पर रचा नया रिकॉर्ड

लेह
 लद्दाख की Puga Valley में देश के पहले जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार को देश के सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं को कमीशन किया. यह भारत के क्लीन एनर्जी मिशन की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है. ONGC एनर्जी सेंटर इस यूनियन टेरिटरी में दो जियोथर्मल कुओं पर काम कर रहा है. 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1000 मीटर गहरे दो कुएं तैयार किए गए हैं. इन कुओं से लद्दाख को क्लीन एनर्जी हब बनाने में काफी मदद मिलेगी. वीके सक्सेना ने कहा, ‘पुगा वैली में मिली यह कामयाबी भारत के नेट-जीरो सफर के लिए ब्लूप्रिंट का काम करेगी’. इससे लद्दाख को एक कार्बन-न्यूट्रल और इको फ्रेंडली रीजन बनाने में बहुत बड़ा सपोर्ट मिलेगा. यह अभी 1 मेगावॉट का पायलट प्रोजेक्ट है. इसे बाद में कमर्शियल लेवल पर बड़ा किया जाएगा। 

लद्दाख में शुरू हुए देश के पहले जियोथर्मल प्रोजेक्ट से आखिर क्या फायदे होंगे?
जियोथर्मल एनर्जी का मतलब धरती के अंदर मौजूद प्राकृतिक गर्मी से है. इस गर्मी का इस्तेमाल करके टर्बाइन चलाए जाते हैं और बिजली बनती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह 24 घंटे और 365 दिन काम करती है। 

सोलर या विंड एनर्जी की तरह यह मौसम या सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं है. लद्दाख में सर्दियों में तापमान माइनस 20 से 30 डिग्री तक चला जाता है. ऐसे में यह जियोथर्मल प्रोजेक्ट वहां के लोगों के लिए वरदान साबित होगा। 

इससे बनने वाली बिजली से घरों को गर्म रखने में बहुत मदद मिलेगी. स्पेस हीटिंग और ग्रीनहाउस फार्मिंग में भी इसका बड़ा यूज होगा. स्थानीय लोगों को जमा देने वाली सर्दी में भी ताजी सब्जियां उगाने का मौका मिलेगा. इसके अलावा टूरिस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी लगातार पावर सप्लाई मिल सकेगी। 

जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए पुगा वैली को ही क्यों चुना गया और कैसे काम होगा?

    पुगा वैली भारत में जियोथर्मल एनर्जी का सबसे बड़ा और एक्टिव हॉटस्पॉट है. हिमालय के इस हिस्से में धरती की गर्मी काफी ऊपर मौजूद है। 

    प्रोजेक्ट इंजीनियर्स के मुताबिक यहां जमीन के काफी करीब भारी मात्रा में गर्म पानी और भाप मौजूद है. 400 मीटर की गहराई पर ही 135 डिग्री सेल्सियस का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया है। 

    यह तापमान पायलट पावर प्लांट में बिजली बनाने के लिए काफी अच्छा माना जाता है. अभी इस गर्म पानी और भाप की आगे की टेक्निकल टेस्टिंग चल रही है। 

    इंजीनियर्स को उम्मीद है कि 1000 मीटर की गहराई पर इससे भी ज्यादा तापमान मिलेगा. इस गर्मी से निकलने वाली स्टीम से पावर प्लांट के जेनरेटर चलेंगे। 

    अभी यह 1 मेगावॉट का पायलट प्रोजेक्ट है. सफल होने पर इसे बड़े कमर्शियल पावर प्लांट में बदल दिया जाएगा. इससे पूरे लद्दाख को फायदा होगा। 

14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1000 मीटर गहरे कुएं खोदने में क्या चुनौतियां सामने आईं?

लद्दाख जैसी ऊंचाई वाली जगह पर कोई भी इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन करना आसान नहीं होता है. पुगा वैली समुद्र तल से 14 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद है. यहां ऑक्सीजन की कमी और खराब मौसम सबसे बड़ी रुकावट होते हैं. भारी ड्रिलिंग मशीनों को खतरनाक पहाड़ी रास्तों से यहां तक लाना एक बड़ा टास्क था. इंजीनियर्स ने बताया कि जमीन के अंदर ड्रिलिंग के वक्त काफी कॉम्प्लेक्स हालात का सामना करना पड़ा। 

इसके बावजूद 22 मई 2026 को पहले कुएं की ड्रिलिंग 1000 मीटर तक पूरी कर ली गई. इसके बाद 3 जून को दूसरे कुएं का काम शुरू हुआ. रिकॉर्ड एक महीने से भी कम समय में 8 जुलाई को दूसरा कुआं भी पूरा हो गया. यह ओएनजीसी एनर्जी सेंटर और पूरी प्रोजेक्ट टीम की बहुत बड़ी इंजीनियरिंग कामयाबी है। 

प्रोजेक्ट में देरी क्यों हुई और लद्दाख के कार्बन न्यूट्रल मिशन के लिए यह कितना अहम है?

यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट बीच में कुछ समय के लिए रुक गया था. लद्दाख प्रशासन, लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल लेह और ओएनजीसी के बीच एक अहम एमओयू खत्म हो गया था. इसके कारण प्रोजेक्ट के काम में कई महीनों की क्रिटिकल देरी हुई। 

इसके बाद एलजी वीके सक्सेना ने मामले में तुरंत दखल दिया. उन्होंने सभी पक्षों से बात करके इस एमओयू को अगले पांच साल के लिए रिन्यू करवाया. इसके बाद काम दोबारा शुरू हुआ और कुएं कामयाबी के साथ पूरे किए गए। 

भारत सरकार ने लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल बनाने का बड़ा विजन रखा है. यह जियोथर्मल प्रोजेक्ट उस विजन को जमीन पर उतारने का सबसे सॉलिड रास्ता है. इससे डीजल जेनरेटर और महंगे फॉसिल फ्यूल पर लद्दाख की निर्भरता खत्म हो जाएगी. इससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और इको टूरिज्म को भी नया बूस्ट मिलेगा। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed