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रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में बोले सीएम योगी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को आत्म अनुशासन, परिश्रम का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है। आगे वही बढ़ा है और इतिहास भी उसी ने बनाया है, जो अनुशासित, परिश्रमी होकर प्रयास करता रहा है। आप भी नए इतिहास को बनाने की…

रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में बोले सीएम योगी

लखनऊ

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को आत्म अनुशासन, परिश्रम का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है। आगे वही बढ़ा है और इतिहास भी उसी ने बनाया है, जो अनुशासित, परिश्रमी होकर प्रयास करता रहा है। आप भी नए इतिहास को बनाने की दिशा में प्रयास करें। सीएम ने बच्चों से कहा कि राष्ट्र प्रथम का भाव अंतःकरण में होना चाहिए। दुनिया के जिस सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सभी के सामने आदर्श प्रस्तुत किया है, आपको उसका सानिध्य प्राप्त हो रहा है। इससे कुछ सीख पाए तो जीवन सार्थक होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को बुलंदशहर पहुंचे। उन्होंने यहां रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। 

सर्वाधिक सैनिक व सैन्य अधिकारी देने वाला जनपद है बुलंदशहर

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान का अभिनंदन करते हुए सीएम योगी ने कहा कि निजी ट्रस्ट भी सैनिक स्कूल प्रारंभ कर सकते हैं, इस अभियान का हिस्सा बनकर बुलंदशहर में सैनिक स्कूल की स्थापना की गई। सर्वाधिक सैनिक व सैन्य अधिकारी देने वाले बुलंदशहर में सैनिक स्कूल की स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

स्कूल को 32 बीघा जमीन देने वाले बाबा राजपाल सिंह का सीएम ने किया अभिनंदन 

सीएम ने सैनिक स्कूल को 32 बीघा जमीन देने वाले बाबा राजपाल सिंह का अभिनंदन किया। कहा कि बाबा राजपाल सिंह ने इस कदम से बता दिया कि उनका जीवन भी साधना राष्ट्र को समर्पित है। उन्होंने रज्जू भैया के पैतृक जनपद में उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए यह जमीन दी है। 

हर नागरिक के लिए पंच प्रण आवश्यक

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में देशवासियों को संकल्प दिलाया था कि अभी से आजादी के शताब्दी महोत्सव की तैयारी प्रारंभ कर उसके अनुरूप आचरण करना होगा। इसके लिए उन्होंने हर भारतीय के लिए पंच प्रण सुनिश्चित किया। यह पंच प्रण हर नागरिक के लिए आवश्यक है। 

सीएम ने पंच प्रण की बताई परिभाषा

पहला प्रण-गुलामी की मानसिकता को त्यागना। जब तक मन में यह मानसिकता बनी रहेगी, तब तक कोई भी देश या समाज आगे नहीं बढ़ सकता। देश/समाज अपने मूल्यों व आदर्शों पर खड़ा होकर ही आगे बढ़ता है। 

दूसरा प्रण- विरासत पर गौरव की अनुभूति। पूर्वजों, ऋषि-मुनियों, तीर्थ, पवित्र ग्रंथ जैसी विरासत पर हर किसी को गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। विरासत का संरक्षण हो, उसके संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास हो। सीएम ने कहा कि आपने वोट बुलंदशहर में दिया, लेकिन परिणाम अयोध्या में भव्य राम मंदिर व काशी विश्वनाथ धाम के रूप में देखने को मिला। 

तीसरा प्रण- सामाजिक समता का ध्यान। छुआछूत, अस्पृश्यता, आदि हमारी बुराइयां हैं। जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटकर देश गुलाम हुआ। हमें इससे उबरकर कार्य करना है।

चौथा प्रण- यूनिफॉर्म धारी फोर्स के प्रति श्रद्धा व सम्मान। सीएम ने कहा कि जवान सर्दी, गर्मी, बरसात, दिन-रात की परवाह किए बिना सीमा की रक्षा करता है, तब हम चैन से सोते हैं। पुलिसकर्मी जब दिन-रात मेहनत करते हैं, तब हम खुद को सुरक्षित पाते हैं और सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होते हैं। सेना, अर्धसेना, पुलिस के जवानों, देश के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों, शहीद सैनिकों व उनके परिजनों के प्रति सम्मान का भाव पैदा करना होगा। 

पांचवां प्रण- नागरिक कर्तव्य। हम अधिकारों की चर्चा तो हर कीमत पर करते हैं, लेकिन कर्तव्य भूल जाते हैं। नागरिक कर्तव्य का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि छात्र अनुशासित रहकर शिक्षा अर्जित करें, शिक्षक छात्र को अनुशासित व संस्कारित रखते हुए समय पर पाठ्यक्रम पूरा करे और राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करे, यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। व्यापारी ईमानदारी से व्यापार कर कालाबाजारी का विरोध करे। सामान्य उपभोक्ता का शोषण न कर सरकार को टैक्स का हिस्सा दे। किसान सर्दी, गर्मी, बरसात की चिंता किए बिना अन्न उत्पादन कर देश के पेट को भरे तो यह सब देश के प्रति कर्तव्यों के निर्वहन का उदाहरण है। सभी लोग ईमानदारी से उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हैं तो यह राष्ट्रभक्ति व राष्ट्र के प्रति कर्तव्य है। जिस देश में लोग कर्तव्य को अधिकार से महत्वपूर्ण मानते हैं, वही देश आगे बढ़ता है। यही आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आधारशिला भी हो सकती है। 

सैनिक के लिए देश पहले, फिर परिवार, सबसे अंत में स्वहित 

सीएम ने कहा कि सैनिक स्कूल अनुशासित और संस्कारित वातावरण की ओर ध्यान आकृष्ट करता है। सैनिक के लिए देश प्रथम होता है। स्वहित की तिलांजलि देकर वह देशहित को प्राथमिकता देता है और देश की रक्षा करते हुए बलिदान हो जाता है। सीएम ने बार्डर पर सर्दी और राजस्थान की 50-52 डिग्री तापमान में झुलसाती भयंकर गर्मी में सैनिकों के परिश्रम की चर्चा की, फिर कहा कि सैनिक के लिए देश पहले, फिर परिवार, सबसे अंत में स्वहित होता है। सैनिक माइनस 20-40 डिग्री तापमान में कारगिल की पहाड़ियों में पहरेदारी करते हैं, तब देश सुरक्षित रहता है। 

जापान का उदाहरण देकर बोले सीएम- आत्म अनुशासन ही देश की प्रगति का आधार 
मुख्यमंत्री ने बच्चों के समक्ष अपने जापान दौरे की चर्चा की, कहा कि 1945 में जापान में परमाणु बम का दुरुपयोग हुआ था। वहां की सबसे बड़ी आबादी के दो शहर परमाणु बम की चपेट में आए थे। इसमें लाखों लोग मारे गए थे। जापान आर्थिक रूप के साथ ही मनोबल से भी टूट गया था, फिर भी जापान आज विकसित अर्थव्यवस्था है। 1947 में भारत आजाद हुआ, कमोबेश दोनों देशों की परिस्थितियां एक जैसी ही थीं। 12 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की हुई प्रगति अभिनंदनीय है। भारत आज चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है तो वहीं परमाणु बम के प्रहार के बावजूद जापान कभी रुका, झुका, थका और डिगा नहीं। सीएम ने कहा कि मैंने जापान की टेक्नोलॉजी और आत्म अनुशासन को देखा। आत्म अनुशासन ही किसी जाति, समाज व देश की प्रगति का आधार बनता है। जापान आत्म अनुशासन की वजह से ही विकसित देश बना है। 

भारत-भारतीयता, सनातन मूल्यों के संरक्षण व संवर्धन के लिए समर्पित था रज्जू भैया का जीवन

सीएम ने रज्जू भैया को प्रेरणा का स्रोत बताते हुए छात्रों को अनुशासन का मंत्र दिया, कहा कि उनका जीवन भारत-भारतीयता, सनातन मूल्यों के संरक्षण व संवर्धन के लिए समर्पित था। वे प्रख्यात वैज्ञानिक और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर थे। हमारी सरकार ने रज्जू भैया के नाम पर प्रयागराज में विश्वविद्यालय बनाया। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सर संघचालक (सन 1994 से 2000) थे। उन्होंने देश-दुनिया के लाखों स्वयंसेवकों को नेतृत्व दिया। अनेक प्रकल्पों पर कार्य प्रारंभ कर उसे नई दिशा दी। उनका व्यक्तित्व काफी अद्भुत व चमत्कारिक था। सौम्य स्वभाव वाले रज्जू भैया के मन में संतत्व का भाव था। उनके नाम पर बना यह सैनिक विद्या मंदिर देश को सैन्य अधिकारियों देने में महत्वपूर्ण कदम उठाएगा। 

यहां भी मिलेगा बेटियों को प्रवेश, रज्जू भैया की मां के नाम पर बनेगा छात्रावास 

सीएम ने कहा कि 1960 में देश का पहला सैनिक विद्यालय स्थापित हुआ था। तब डॉ. संपूर्णानंद जी प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। हम लोगों ने उस विद्यालय को अच्छे ढंग से बढ़ाया। हमने राज्य सरकार द्वारा संचालित देश के पहले सैनिक स्कूल (लखनऊ) में बालिकाओं का प्रवेश प्रारंभ कराया। अब भारत सरकार ने देश में सभी सैनिक स्कूलों के लिए व्यवस्था प्रारंभ की है। आने वाले समय में इस सैनिक विद्या मंदिर में भी बेटियां प्रवेश लेंगी। सरकार यहां रज्जू भैया की मां के नाम पर बालिकाओं के लिए छात्रावास बनाएगी। सीएम ने रज्जू भैया के पिता का भी जिक्र किया, कहा कि वे सिंचाई विभाग में चीफ इंजीनियर थे। पश्चिमी उप्र में सिंचाई के अच्छी नेटवर्किंग में उनका भी योगदान है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता मंजू त्यागी ने की। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष सी एल बरेजा, विद्या भारती पश्चिमी क्षेत्र के अध्य़क्ष मनवीर, भाजपा के क्षेत्रीय अध्य़क्ष नवाब सिंह नागर, संरक्षक सदस्य एमएल शर्मा आदि मौजूद रहे।

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