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बच्ची से मारपीट मामले के बाद सख्ती, निजी स्कूल बसों की शुरू होगी चेकिंग

 हिसार नूंह स्थित गांव छछेड़ा के एक निजी स्कूल में सात साल की बच्ची के साथ मारपीट मामले में मानवाधिकार आयोग ने समस्त निजी स्कूलों की बसों की चेकिंग करने के आदेश दिए है। इसी कड़ी में जिले के 650 निजी स्कूलों की 2300 बसों की चेंकिंग की जाएगी। इसके लिए जिले में 6 प्वाइंट…

बच्ची से मारपीट मामले के बाद सख्ती, निजी स्कूल बसों की शुरू होगी चेकिंग

 हिसार
नूंह स्थित गांव छछेड़ा के एक निजी स्कूल में सात साल की बच्ची के साथ मारपीट मामले में मानवाधिकार आयोग ने समस्त निजी स्कूलों की बसों की चेकिंग करने के आदेश दिए है। इसी कड़ी में जिले के 650 निजी स्कूलों की 2300 बसों की चेंकिंग की जाएगी।

इसके लिए जिले में 6 प्वाइंट बनाए गए है। पहले कड़ी में शनिवार को हिसार शहर के निजी स्कूलों की बसों को पुलिस लाइन हिसार में बुलाया गया है।

जहां आरटीए की विशेष टीमें स्कूली बसों की फिटनेस चेकिंग कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। खास बात है कि सरकार का जहां तेल बचाओ का नारा है तो दूसरी ओर उपरोक्त आदेश सरकार के ही नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। क्योंकि हिसार बस स्टैंड से लेकर पुलिस लाइन की दूरी 3.7 किलोमीटर दूर है। जिस कारण शहर के समस्त निजी स्कूलों की बसें उपरोक्त किलोमीटर दूरी तय कर पुलिस लाइन पहुंचेगी

यह है मामला
नूंह जिले के छछेड़ा गांव स्थित एक निजी विद्यालय की 7 वर्षीय बच्ची के साथ शिक्षक ने पिटाई कर दी। जिसके बाद सीसीटीवी फुटेज के लिए जैसे ही स्कूल बस चालक से क्लिप मांगी गई तो बस में सीसीटीवी कैमरे ही नहीं मिले।

मानवाधिकार आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश स्तर पर समस्त निजी स्कूलों की बसों में मानक पूरे करने के आदेश दिए। साथ ही आरटीए को चेकिंग कर रिपोर्ट भेजने की हिदायतें जारी की।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्कूली बसों के लिए तय मानक

  •     स्कूल बसों का रंग पीला होना चाहिए
  •     बस के आगे और पीछे स्पष्ट रूप से स्कूल बस लिखा होना चाहिए।
  •     यदि बस किराए पर ली गई है, तो उस पर आन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए
  •     बस पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए
  •     खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल और दरवाजे पर मजबूत लाक होने चाहिए।
  •     बच्चों के बैग रखने के लिए सीटों के नीचे जगह होनी चाहिए।
  •     बस में एक प्राथमिक चिकित्सा बाक्स और अग्निशमन यंत्र हमेशा मौजूद होना चाहिए।
  •     बसों में स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए
  •     जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य हैं।
  •     ड्राइवर के पास भारी वाहनों को चलाने का कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए।
  •     शराब पीकर गाड़ी चलाने, ओवर-स्पीडिंग या रेड लाइट जंप करने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का दोषी ड्राइवर नहीं रखा जा सकता।
  •     बस में स्कूल द्वारा नियुक्त एक योग्य अटैंडेंट का होना अनिवार्य है, जो बच्चों की सुरक्षा और उन्हें बस में चढ़ने-उतरने में मदद करें।

    स्कूली बसों के चेकिंग के आदेश दिए गए है। शनिवार से चेकिंग अभियान शुरू हो जाएगा। स्कूली बसों के मानकों को पूरा करना हर स्कूल प्रबंधन के लिए जरूरी होगा। अन्यथा स्कूली प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। साथ ही मुख्यालय को रिपोर्ट कर दिया जाएगा।
    – संजय श्योराण, आरटीए, हिसार।

 

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