नई दिल्ली
बंगाल, तमिलनाडु सहित 5 राज्यों के चुनाव अब खत्म हो चुके हैं। चुनाव परिणाम सोमवार 04 मई 2026 को जारी किये जाएंगे। इसके बाद तय होगा कि कौन उस राज्य का अगला मुख्यमंत्री होगा। साथ ही चुनाव खत्म होते ही कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि वोटिंग मशीनें आखिर जाती कहां हैं और उन्हें सुरक्षित कैसे रखा जाता है? इसका जवाब है ‘स्ट्रॉन्ग रूम’। यह एक ऐसा विशेष सुरक्षित स्थान होता है, जहां EVM और VVPAT मशीनों को मतगणना तक पूरी सुरक्षा में रखा जाता है। आमतौर पर स्ट्रॉन्ग रूम के लिए किसी सरकारी कॉलेज, पॉलिटेक्निक संस्थान या प्रशासनिक गोदाम को चुना जाता है। इन जगहों को पहले से तैयार किया जाता है, ताकि सुरक्षा और निगरानी में कोई कमी न रहे।
वोटिंग के तुरंत बाद शुरू होती है प्रक्रिया
मतदान समाप्त होते ही पोलिंग बूथ पर ही EVM और VVPAT मशीनों को सील कर दिया जाता है। इसके बाद इन्हें कड़ी पुलिस सुरक्षा में स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों को मौजूद रहने का मौका दिया जाता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। जब मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम में रख दी जाती हैं, तो कमरे को आधिकारिक तौर पर सील कर दिया जाता है। इस दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है, जिससे बाद में किसी तरह का विवाद न हो।
सुरक्षा के कई स्तर
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा साधारण नहीं होती। इसके चारों तरफ मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरा बनाया जाता है। इसमें पुलिस और अर्धसैनिक बल 24 घंटे तैनात रहते हैं। हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे लगाए जाते हैं, जिनकी लगातार मॉनिटरिंग होती है। कई जगहों पर उम्मीदवारों को बाहर लगे स्क्रीन के जरिए लाइव निगरानी देखने की सुविधा भी दी जाती है। इससे भरोसा और पारदर्शिता दोनों बने रहते हैं।
डबल लॉक और सील की खास व्यवस्था
स्ट्रॉन्ग रूम के दरवाजे पर खास तरह की सील लगाई जाती है, जिस पर उम्मीदवारों के हस्ताक्षर होते हैं। इसका मतलब यह होता है कि अगर कोई छेड़छाड़ होगी, तो तुरंत पता चल जाएगा। इसके अलावा, ‘डबल लॉक सिस्टम’ भी होता है। यानी कमरे को खोलने के लिए दो अलग-अलग चाबियों की जरूरत होती है, जो अलग-अलग अधिकारियों के पास रहती हैं। इससे कोई एक व्यक्ति अकेले कमरे को नहीं खोल सकता।
अंदर जाने की सख्त पाबंदी
स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर जाने की अनुमति बेहद सीमित होती है। केवल रिटर्निंग ऑफिसर (RO), जिला निर्वाचन अधिकारी और अधिकृत चुनाव कर्मी ही अंदर जा सकते हैं। आम जनता, मीडिया और यहां तक कि उम्मीदवार भी अंदर नहीं जा सकते। हालांकि उनके एजेंट बाहर से निगरानी कर सकते हैं।
काउंटिंग वाले दिन क्या होता है?
मतगणना के दिन सुबह करीब 7 बजे स्ट्रॉन्ग रूम खोला जाता है। इस दौरान RO, चुनाव पर्यवेक्षक और उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। सबसे पहले सील की जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके बाद मशीनों को काउंटिंग हॉल तक ले जाया जाता है। इस पूरे रास्ते की भी वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। काउंटिंग हॉल में हर टेबल पर उम्मीदवार का एक एजेंट मौजूद रहता है, ताकि पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।
स्ट्रॉन्ग रूम क्या है? चुनाव के बाद EVM की सुरक्षा का पूरा सिस्टम समझिए
नई दिल्ली बंगाल, तमिलनाडु सहित 5 राज्यों के चुनाव अब खत्म हो चुके हैं। चुनाव परिणाम सोमवार 04 मई 2026 को जारी किये जाएंगे। इसके बाद तय होगा कि कौन उस राज्य का अगला मुख्यमंत्री होगा। साथ ही चुनाव खत्म होते ही कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि वोटिंग मशीनें आखिर…

Previous Post
Next Post
Latest News

Stay Connected
Categories
featured top-news Uncategorized इंदौर उत्तर प्रदेश खेल ग्वालियर छत्तीसगढ़ जबलपुर देश धर्म ज्योतिष पंजाब बिलासपुर बिहार/झारखण्ड बिज़नेस भोपाल मध्य प्रदेश मनोरंजन राजनीतिक राजस्थान राज्य रायपुर लाइफस्टाइल विदेश हरियाणा
Tags
8th Pay Commission Accident Astrology BJP Chief Minister Dr. Yadav CM Sai CM yogi court Election EPFO featured gold High Court india jobs Kanwar Yatra lpg modi Mohan Monsoon PM Modi police Punjab Rahul Gandhi Railway rain Rashifal Recipe road school SIR Stock Market Supreme Court top-news train Trump vastu tips vijay vishnu Vishnu Deo Sai Voter list water Weather yogi Yogi government
About the Author

GoodDoo News
Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives
Access over the years of investigative journalism and breaking reports
You May Have Missed












