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मध्य प्रदेश में मानसून हुआ स्ट्रॉन्ग! 35+ जिलों में बारिश, 15 जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पिछले एक दिन के दौरान राज्य के 35 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई है। नर्मदापुरम जिले में सबसे ज्यादा 4.2 इंच यानी करीब 106 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे कई इलाकों में जलभराव देखा गया। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी…

मध्य प्रदेश में मानसून हुआ स्ट्रॉन्ग! 35+ जिलों में बारिश, 15 जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी

भोपाल 

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पिछले एक दिन के दौरान राज्य के 35 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई है। नर्मदापुरम जिले में सबसे ज्यादा 4.2 इंच यानी करीब 106 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे कई इलाकों में जलभराव देखा गया। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी ने मानसून की रफ्तार बढ़ा दी है।

मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, बैतूल, हरदा, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश हुई। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं भी चलीं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली।

धवार को शिवपुरी, गुना, सागर, डिंडौरी समेत 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित कई जिलों में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा बरसेंगे बादल
मौसम विभाग ने शिवपुरी, गुना, सागर और डिंडौरी में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। इसके अलावा श्योपुर, अशोकनगर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, धार और बड़वानी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, देवास, खंडवा, खरगोन, जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, उमरिया समेत कई जिलों में रुक-रुक कर तेज और हल्की बारिश का दौर बना रहेगा। 

इन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश
24 घंटे में नर्मदापुरम में 4.2 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा नरसिंहपुर में 2.5 इंच, राजगढ़ में 2.4 इंच, सीहोर और मलाजखंड में 2.2 इंच, भोपाल में 2.1 इंच, पचमढ़ी और मंडला में 1.8 इंच, श्योपुर में 1.5 इंच, सिवनी में 1.3 इंच और खरगोन में 1.1 इंच पानी बरसा।

उमरिया, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, टीकमगढ़, खंडवा, छतरपुर, सतना, बैतूल, दमोह, जबलपुर, इंदौर, रतलाम, दतिया, उज्जैन, धार, सीधी, ग्वालियर, सागर, शाजापुर, विदिशा, देवास, आगर-मालवा, बड़वानी और बुरहानपुर समेत कई जिलों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। भोपाल सहित कई शहरों में रात से रुक-रुककर बारिश हो रही है।

एक दिन की बारिश से सुधरी प्रदेश की स्थिति
लगातार बारिश का असर प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर भी दिखा है। सोमवार तक जहां प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज थी, वहीं मंगलवार तक यह अंतर घटकर 14 प्रतिशत रह गया। अब तक प्रदेश में औसतन 286.8 मिलीमीटर (11.3 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 335.3 मिलीमीटर (13.2 इंच) बारिश होना सामान्य माना जाता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा अभी भी सामान्य से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत कम बनी हुई है।

41 जिलों में अब भी बारिश की कमी
हालांकि ताजा बारिश के बावजूद प्रदेश के 41 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के लगभग सभी जिले अभी भी वर्षा की कमी से जूझ रहे हैं। दूसरी ओर भोपाल, इंदौर, सीहोर, देवास, हरदा, उज्जैन, राजगढ़, नीमच, खंडवा और खरगोन सहित 14 जिलों में बारिश का प्रदर्शन सामान्य से बेहतर रहा है।

देवास सबसे आगे, आलीराजपुर सबसे पीछे
प्रदेश में अब तक सबसे ज्यादा बारिश देवास जिले में हुई है। यहां सामान्य से करीब 51 प्रतिशत अधिक यानी लगभग 18.4 इंच वर्षा दर्ज की गई है। भोपाल में 14.5 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच तथा हरदा में 15.4 इंच बारिश हो चुकी है। इसके विपरीत आलीराजपुर में अब तक करीब 2 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से लगभग 78 प्रतिशत कम है। 

कृषि के लिए राहत, शहरों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने और सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इससे जलाशयों और खरीफ फसलों को फायदा मिलेगा, लेकिन शहरों में जलभराव और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

जुलाई अभी भी तय करेगा पूरे मानसून की तस्वीर
मौसम विभाग के अनुसार जून में बारिश सामान्य से कम रही थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी वर्षा से स्थिति सुधरी, लेकिन बीच में करीब नौ दिन बारिश कमजोर पड़ने से फिर घाटा बढ़ गया। अब सक्रिय मानसून से वर्षा का अंतर कम होने की उम्मीद है। प्रदेश में पूरे मानसून के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य वर्षा लगभग 38 से 39 इंच रहती है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान जुलाई महीने का होता है। 

मानसून पूरे शबाब पर, ठंडी हुई सुबह
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर मजबूती पकड़ ली है। पूरे प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम, कम दबाव का क्षेत्र, लगातार नमी और बादलों की मौजूदगी के कारण बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसी वजह से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो रही है।

22 से 26 डिग्री के बीच रहा न्यूनतम तापमान
लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश दोनों क्षेत्रों में सुबह का मौसम ठंडा और सुहावना रहा, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली।

बैतूल में फिर मेहरबान हुआ मानसून! 24 घंटे में 13.9 मिमी बारिश, किसानों के चेहरे खिले

बैतूल जिले में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार से बुधवार सुबह तक हुई रिमझिम बारिश से जिले में औसतन 13.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई। लंबे अंतराल के बाद हुई इस बारिश से खरीफ फसलों को नई संजीवनी मिलने की उम्मीद जगी है।

24 घंटे में घोड़ाडोंगरी में सबसे ज्यादा बारिश
जिला वर्षा रिपोर्ट के अनुसार, 21 जुलाई सुबह 8 बजे से 22 जुलाई सुबह 8 बजे तक सबसे अधिक 20 मिमी बारिश घोड़ाडोंगरी में दर्ज की गई। इसके अलावा चिचोली में 19 मिमी, भैंसदेही और भीमपुर में 17-17 मिमी, शाहपुर में 15 मिमी, मुलताई में 14.6 मिमी, बैतूल में 11.6 मिमी, प्रभातपट्टन में 8.2 मिमी, आठनेर में 8.1 मिमी तथा आमला में 8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

संचयी वर्षा में चिचोली सबसे आगे
इस मानसून सीजन में संचयी वर्षा के मामले में चिचोली 470.9 मिमी बारिश के साथ जिले में पहले स्थान पर है। इसके बाद घोड़ाडोंगरी में 439 मिमी, मुलताई में 349.4 मिमी, प्रभातपट्टन में 335.2 मिमी, भैंसदेही में 325 मिमी, शाहपुर और आमला में 300-300 मिमी, भीमपुर में 277 मिमी, आठनेर में 228.1 मिमी और बैतूल में 221 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।

खरीफ फसलों को मिला नया जीवन
वहीं बारिश की वापसी से जिले के किसानों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम हो गई थी और सोयाबीन, मक्का, धान सहित खरीफ की अन्य फसलें प्रभावित होने लगी थीं। अब लगातार बारिश शुरू होने से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिससे फसलों की बढ़वार बेहतर होने की उम्मीद बढ़ गई है। किसान भी कृषि कार्यों में तेजी से जुट गए हैं।

अगले पांच दिन ऐसा रहेगा मौसम
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बैतूल जिले में अगले पांच दिनों तक मौसम सक्रिय बना रहेगा। इस दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बिजली चमकने और कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने की भी चेतावनी दी है। अधिकतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। लगातार बारिश से कृषि गतिविधियों को गति मिलने के साथ जल स्रोतों के भरने की भी संभावना बढ़ गई है।

एक दिन की बारिश से सुधरे प्रदेश के आंकड़े
लगातार हो रही बारिश का असर अब प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। सोमवार तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन पिछले एक दिन में हुई अच्छी बारिश के बाद यह अंतर घटकर 14 प्रतिशत रह गया है। इस समय तक प्रदेश में औसतन 286.8 मिलीमीटर (करीब 11.3 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक 335.3 मिलीमीटर (करीब 13.2 इंच) बारिश होनी चाहिए।

पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश की स्थिति
बारिश में सुधार के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में अब भी सामान्य से करीब 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से लगभग 11 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले चार दिनों की बारिश से यह कमी और कम हो सकती है।

41 जिलों में अब भी बारिश की कमी
ताजा बारिश के बावजूद मध्य प्रदेश के 41 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश हुई है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश जिले अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि कुछ जिलों में मानसून ने अच्छी बारिश कराई है।

इन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के भोपाल, इंदौर, सीहोर, देवास, हरदा, उज्जैन, राजगढ़, नीमच, खंडवा और खरगोन समेत 14 जिलों में अब तक सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों में अच्छी बारिश होने से खेती-किसानी को फायदा मिला है और जलाशयों में भी पानी का स्तर बढ़ा है।

देवास बना सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला
अब तक पूरे मध्य प्रदेश में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला बन गया है। यहां सामान्य से करीब 51 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। अब तक जिले में लगभग 18.4 इंच वर्षा हो चुकी है। इसके अलावा भोपाल में करीब 14.5 इंच बारिश, इंदौर में लगभग 14 इंच बारिश, सीहोर में करीब 14 इंच बारिश और हरदा में लगभग 15.4 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

आलीराजपुर में सबसे कम बारिश
जहां कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई है, वहीं आलीराजपुर अभी भी सबसे ज्यादा बारिश की कमी वाला जिला बना हुआ है। यहां अब तक केवल करीब 2 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से लगभग 78 प्रतिशत कम है। बारिश की कमी के कारण यहां खेती और जलस्रोतों पर असर देखने को मिल रहा है।

95% तक पहुंची नमी, इसलिए लगातार बरस रहे बादल
प्रदेश में हवा में नमी (रिलेटिव ह्यूमिडिटी) 75 से 95 प्रतिशत तक दर्ज की गई। वातावरण में अत्यधिक नमी होने से गरज-चमक वाले बादल तेजी से विकसित हो रहे हैं। लगातार बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं।

दक्षिण-पश्चिमी हवाएं बढ़ा रहीं मानसून की ताकत
प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। कुछ इलाकों में झोंकों की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। यही हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आ रही हैं, जिससे मानसून लगातार मजबूत बना हुआ है।

अगले 48 घंटे भी बारिश के आसार
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, बैतूल और आसपास के जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पूरे मानसून में कितनी होती है बारिश?
मध्य प्रदेश में पूरे मानसून के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है। वहीं बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर इन सभी शहरों में सामान्य रूप से 38 से 39 इंच तक बारिश होती है। इसमें सबसे बड़ा योगदान जुलाई महीने का रहता है, इसलिए मौसम विभाग की नजर फिलहाल इसी महीने की बारिश पर बनी हुई है।

लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह
मौसम विभाग ने भारी बारिश वाले जिलों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    नदी-नालों के पास जाने से बचें।
    जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखें।
    मौसम खराब होने पर यात्रा टालें।
    प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें।
    किसानों को भी मौसम का पूर्वानुमान देखकर खेतों में काम करने की सलाह दी गई है।

 

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