Commonwealth Games 2030: मांडविया का बड़ा दावा, भारत सिर्फ आयोजन नहीं, स्थायी संस्थागत विरासत भी देगा

ग्लास्गो खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने  कहा कि 2030 में अहमदाबाद में आयोजित होने वाले 100वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करते समय भारत एक ‘स्थायी संस्थागत विरासत’ छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मांडविया ने यहां आयोजित राष्ट्रमंडल खेल मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अधिक मजबूत और सदस्य-प्रधान ढांचे की…

Commonwealth Games 2030: मांडविया का बड़ा दावा, भारत सिर्फ आयोजन नहीं, स्थायी संस्थागत विरासत भी देगा

ग्लास्गो
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने  कहा कि 2030 में अहमदाबाद में आयोजित होने वाले 100वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करते समय भारत एक ‘स्थायी संस्थागत विरासत’ छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

मांडविया ने यहां आयोजित राष्ट्रमंडल खेल मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अधिक मजबूत और सदस्य-प्रधान ढांचे की जरूरत पर जोर दिया।

विरासत छोड़ना चाहता है भारत
मांडविया ने कहा, 2030 के शताब्दी राष्ट्रमंडल खेलों और अहमदाबाद में आयोजित होने वाली 13वीं राष्ट्रमंडल खेल मंत्रियों की बैठक के मेजबान के रूप में हम उत्कृष्ट खेलों का आयोजन करने के साथ राष्ट्रमंडल खेलों के लिए एक स्थायी संस्थागत विरासत छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मांडविया ने संचालन व्यवस्था में किए गए सुधारों, मजबूत एंटी डोपिंग ढांचे और जमीनीं स्तर पर प्रतिभा निखारने के लिए खेलो इंडिया जैसी पहल का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्रमंडल खेल समन्वय मंच की स्थापना की योजना का दृढ़ता से समर्थन करता है जो मंत्रिस्तरीय फैसलों को अमल में लाने के लिए एक सालाना मंच के रूप में कार्य करेगा। भारत 2030 से पहले की तैयारियों के दौरान बैठकों, तकनीकी कार्यशालाओं और क्षेत्रीय परामर्शों की मेजबानी करके खुश होगा।

अहमदाबाद है मुफीद जगह
मांडविया ने वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की तत्परता दोहराते हुए कहा कि अहमदाबाद ऐतिहासिक, पर्यावरण अनुकूल और यादगार खेलों के आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने उस प्रस्तावित नेतृत्व मॉडल का भी समर्थन किया जिसके तहत राष्ट्रमंडल खेल मंत्रियों की बैठक का अगला मेजबान देश ‘अध्यक्ष’ (चेयर) की भूमिका निभाएगा, जबकि राष्ट्रमंडल खेल संगठन के अध्यक्ष सह-अध्यक्ष (को-चेयर) होंगे।

मांडविया ने राष्ट्रमंडल देशों से आपसी साझेदारी को और मजबूत करने की बात करते हुए कहा, ऐसे संस्थानों का निर्माण करें जो लंबे समय तक कायम रहें, ऐसे सहयोग को मजबूत करें जो मजबूत परिणाम दें और भविष्य की पीढ़ियों के लिए खेलों की परिवर्तन करने वाली शक्ति का पूरा उपयोग करें। भारत सुरक्षित, समावेशी और समान अवसर प्रदान करने वाली खेल व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है जो मानवाधिकारों का सम्मान करती है और सभी के लिए मौके सुनिश्चित करती है।

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