,

Punjab Drug Network: संसद रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, सीमा से शहरों तक फैली तस्करी की चेन

चंडीगढ़ पाकिस्तान से पंजाब सीमा के रास्ते ड्रोन के माध्यम से भेजी जा रही हेरोइन अब केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार पंजाब पहुंचने के बाद संगठित तस्करी नेटवर्क इस खेप को देश के कई राज्यों तक पहुंचा रहा है। राज्यसभा में केंद्र सरकार ने भी स्वीकार किया…

Punjab Drug Network: संसद रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, सीमा से शहरों तक फैली तस्करी की चेन

चंडीगढ़
पाकिस्तान से पंजाब सीमा के रास्ते ड्रोन के माध्यम से भेजी जा रही हेरोइन अब केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार पंजाब पहुंचने के बाद संगठित तस्करी नेटवर्क इस खेप को देश के कई राज्यों तक पहुंचा रहा है। राज्यसभा में केंद्र सरकार ने भी स्वीकार किया है कि ड्रोन के जरिए होने वाली नशा तस्करी का सबसे अधिक दबाव पंजाब सीमा पर है और बरामद नशीले पदार्थों में सबसे बड़ा हिस्सा हेरोइन का है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2025 में देशभर में ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी के 305 मामले सामने आए। इनमें 298 मामले केवल पंजाब सीमा से जुड़े थे। इन मामलों में करीब 460 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनमें 448 किलोग्राम हेरोइन, नौ किलोग्राम मेथामफेटामाइन और तीन किलोग्राम अफीम शामिल थी।यानी ड्रोन के जरिए बरामद कुल नशीले पदार्थों में लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा हेरोइन का रहा।

सीमावर्ती इलाकों से आगे पहुंचती है खेप
जांच एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब के सीमावर्ती इलाकों अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और गुरदासपुर में गिराई गई खेप को स्थानीय तस्कर पहले सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क नेटवर्क के माध्यम से इसे विभिन्न राज्यों में सक्रिय गिरोहों तक भेजा जाता है।

एनसीबी की इंडिया नारकोटिक्स थ्रेट असेसमेंट-2024, एनआईए तथा पंजाब पुलिस की जांच में पंजाब को अंतरराज्यीय तस्करी का प्रमुख ट्रांजिट कारिडोर बताया गया है। तस्कर अब केवल ड्रोन पर निर्भर नहीं हैं। वे संपर्क बनाए रखने, खेप की आवाजाही का समन्वय करने, तस्वीरें और वीडियो साझा करने तथा वास्तविक समय की लोकेशन भेजने के लिए गुप्त संदेश मंचों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वीपीएन से छिपती है पचहान
पहचान छिपाने के लिए आभासी निजी नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग किया जा रहा है, जबकि नशे के कारोबार से अर्जित धन के लेनदेन में डिजिटल मुद्रा और अन्य आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों का सहारा लिया जा रहा है। विदेशों में संचालित डिजिटल विनिमय मंचों के कारण धन के स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

कुछ मामलों में जेलों में बंद तस्कर भी मोबाइल फोन के जरिए अपने सहयोगियों के संपर्क में रहकर नेटवर्क का संचालन करते पाए गए हैं। इसी कारण जांच एजेंसियां अब केवल सीमा पर निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच कर रही हैं।

राज्यसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी

    तस्कर संपर्क और नेटवर्क संचालन के लिए गुप्त संदेश मंचों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
    पहचान छिपाने के लिए आभासी निजी नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग किया जा रहा है।

    नशे के कारोबार से अर्जित धन के लेनदेन में डिजिटल मुद्रा और आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों का इस्तेमाल बढ़ा है।

    जेलों में बंद कुछ तस्कर भी मोबाइल फोन के जरिए अपने सहयोगियों के संपर्क में रहकर नेटवर्क का संचालन करते पाए गए हैं।

    सीमा पर ड्रोन रोधी प्रणाली, बंद परिपथ कैमरे, दूर से घूमकर निगरानी करने वाले कैमरे, रात्रि दृष्टि उपकरण, नई डिजाइन की सीमा बाड़ और फ्लड लाइट व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports