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हरियाली और सुरक्षा से लैस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बढ़ा वाहनों का दबाव

लखनऊ  लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे लोगों को राष्ट्रीय राजमार्ग की तुलना में ज्यादा आकर्षित कर रहा है, क्योंकि सुविधा व सुरक्षा दोनों राष्ट्रीय राजमार्ग की तुलना में एक्सप्रेसवे पर ज्यादा हैं। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ हरियाली है, कंक्रीट के जंगल एक्सप्रेसवे की ग्रीन फील्ड से बहुत कम दिखते हैं। बरसात के मौसम में सफर और…

हरियाली और सुरक्षा से लैस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बढ़ा वाहनों का दबाव

लखनऊ
 लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे लोगों को राष्ट्रीय राजमार्ग की तुलना में ज्यादा आकर्षित कर रहा है, क्योंकि सुविधा व सुरक्षा दोनों राष्ट्रीय राजमार्ग की तुलना में एक्सप्रेसवे पर ज्यादा हैं। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ हरियाली है, कंक्रीट के जंगल एक्सप्रेसवे की ग्रीन फील्ड से बहुत कम दिखते हैं।

बरसात के मौसम में सफर और सुहावना हो जाता है और हरियाली आंखों को थोड़ा सुकून देती है। बात की जाए एक्सप्रेसवे की सड़क की तो मजबूती के साथ ही बेहद आरामदायक है। सफर के दौरान झटके महसूस नहीं होंगे। हां इस पर चलने के लिए थोड़ी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ती है। कह सकते हैं कि एक्सप्रेसवे का सफर महंगा है पर अच्छा है।

एक्सप्रेसवे का आरामदायक सफर यात्रियों को कर रहा है आकर्षित
सुविधाओं से लैस इस एक्सप्रेसवे को सौ से अधिक आधुनिक कैमरों से जहां लैस किया गया है, वहीं पेट्रोलिंग टीम आपकी रक्षा के लिए राउंद द क्लाक आप की गतिविधियों पर निगरानी करते हुए सफर में दिख जाएगी। एक्सप्रेसवे पर लगे 'वान' जैसे उपकरण के जरिए कंट्रोल रूम से सेकेंडों में संपर्क किया जा सकता है।

एक निर्धारित दूरी पर ऑप्टिकल फाइबर केबल से संचालित 'वान' उपकरण लगाए गए हैं। आकस्मिक स्थिति में इस उपकरण के जरिए यात्री सीधे कंट्रोल रूप से संपर्क कर सकता है और चंद मिनटों में यात्री तक मदद पेट्रोलिंग टीम करने पहुंच जाएगी।

कंट्रोल रूम से प्रत्येक यात्री की गतिविधियों पर नजर
कंट्रोल रूम से प्रत्येक यात्री की गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है। किसी वाहन में अगर आग लगती है या फिर धुआं उठता है तो आधुनिक कैमरे कंट्रोल को सूचित करने में देर नहीं करेंगे। इस सुविधा से पीड़ित तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाएगी।

जगह-जगह लोहे के गेट पर सुरक्षा गार्ड
एक्सप्रेसवे का ग्रीन फील्ड सुरक्षा की दृष्टि से इसलिए और महत्वपूर्ण हैं क्योंकि एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने लोहे की जालियों से बैरिकेडिंग कर रखी है। जगह-जगह लोहे के गेट पर सुरक्षा गार्ड लगाए गए हैं। उद्देश्य है कि वाहनों की गति प्रभावित न हो।

दस दिन में एक्सप्रेसवे से 2,52,177 वाहन निकले व एनएच 27 पर 2,02,550 वाहन
इन सुविधाओं के कारण ही लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (एनई छह) पर वाहनों की संख्या ने लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 27) को काफी पीछे छोड़ दिया है। दस दिन में एक्सप्रेसवे से 2,52,177 वाहन निकले व एनएच 27 पर 2,02,550 वाहन। करीब पचास हजार ज्यादा वाहन एक्सप्रेसवे पर निकले। अब एनएचएआई का प्रयास है कि वाणिज्यिक वाहन जो अभी बीस प्रतिशत चल रहे हैं, उनकी संख्या भी एक्सप्रेसवे पर बढ़ाई जाए।

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