नई दिल्ली
पाहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से ठीक पहले एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा अब अपने पारंपरिक ठिकानों से आगे बढ़कर बलूचिस्तान में तेजी से अपना नेटवर्क विस्तार कर रहा है. यह वही इलाका है जो पहले से ही बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का केंद्र बना हुआ है. ऐसे में लश्कर की सक्रियता ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को और जटिल बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर ने कराची-बलूचिस्तान बॉर्डर के पास समुद्र तट से महज 10-15 किलोमीटर दूरी पर नए लॉन्च पैड तैयार करने शुरू कर दिए हैं. यही नहीं संगठन अब अपने आतंकवादियों को तैराकी और स्कूबा डाइविंग की विशेष ट्रेनिंग दे रहा है. इन गतिविधियों को देखते हुए एजेंसियों को आशंका है कि लश्कर 26/11 मुंबई हमलों जैसे समुद्री हमले की साजिश रच रहा है. इस बीच, अप्रैल के दूसरे हफ्ते में लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी का बलूचिस्तान के क्वेटा दौरा भी कई सवाल खड़े करता है. उसकी यह यात्रा उस समय हुई जब ठीक दो दिन बाद बीएलए ने पाकिस्तान कोस्ट गार्ड पर हमला कर तीन जवानों को मार गिराया।
कौन है सैफुल्लाह कसूरी
लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ और अमेरिका द्वारा घोषित आतंकवादी. वह अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले का एक प्रमुख साजिशकर्ता है. पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या कर दी गई थी. कसूरी ने सार्वजनिक भाषणों में खुलकर लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान सेना के बीच करीबी संबंधों को स्वीकार किया है और भारत के खिलाफ 2008 के मुंबई हमलों जैसी बड़े समुद्री हमलों की धमकियां दी हैं. वह अपने आतंकवादी घोषित होने के बावजूद पाकिस्तान में सार्वजनिक कार्यक्रमों में बार-बार दिखाई देता रहा है, जिनमें लश्कर से जुड़े राजनीतिक संगठनों द्वारा आयोजित रैलियां भी शामिल हैं।
खुफिया इनपुट्स यह भी संकेत देते हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई लश्कर को बलूचिस्तान में मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंध में सक्रिय लश्कर कमांडर फैजल नदीम को बलूचिस्तान में पाकिस्तान मरकाजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के नेता अकील अहमद लगहारी से समन्वय करने के निर्देश दिए गए थे. पीएमएमएल को लश्कर का राजनीतिक मुखौटा माना जाता है, जो जमीनी स्तर पर नेटवर्क विस्तार और भर्ती में मदद करता है।
समुद्री रास्तों के जरिए भारत को निशाना बनाने की योजना
विशेषज्ञों का मानना है कि लश्कर का यह विस्तार कई रणनीतिक उद्देश्यों का हिस्सा हो सकता है. एक तरफ यह संगठन अपने ढांचे को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर समुद्री रास्तों के जरिए भारत को निशाना बनाने की नई रणनीति पर काम कर रहा है. इसके अलावा, यह भी संभावना जताई जा रही है कि पाकिस्तान सेना बलूच विद्रोहियों से निपटने के लिए लश्कर जैसे संगठनों का इस्तेमाल एक प्रॉक्सी के तौर पर कर सकती है।
पाहलगाम हमले की बरसी पर सामने आई ये जानकारी इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में आतंकी खतरा केवल बना ही नहीं हुआ है, बल्कि नए रूप में और अधिक खतरनाक हो रहा है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह गतिविधियां सिर्फ नेटवर्क विस्तार तक सीमित रहती हैं या फिर किसी बड़े हमले की साजिश का हिस्सा बनती हैं।
26/11 जैसे हमले की साजिश रच रहा लश्कर, बलूचिस्तान में चल रही विशेष ट्रेनिंग
नई दिल्ली पाहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से ठीक पहले एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा अब अपने पारंपरिक ठिकानों से आगे बढ़कर बलूचिस्तान में तेजी से अपना नेटवर्क विस्तार कर रहा है. यह वही इलाका है जो पहले से ही बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और पाकिस्तानी सुरक्षा…

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