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Punjab Industrial Policy: इंडस्ट्रियल एरिया के नए नियम लागू, मेंटेनेंस चार्ज बकाया होने पर बिजली होगी बंद

चंडीगढ़  पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने कारोबारियों को बड़ा झटका दिया है। सरकार अब मेंटेनेंस चार्ज की वसूली बिजली बिल के साथ करेगी। अगर किसी फैक्ट्री या अन्य औद्योगिक इकाई ने मेंटेनेंस चार्ज नहीं भरा तो उसका बिजली कनेक्शन भी काटा जा सकता है इसके लिए AAP सरकार ने 'पंजाब…

Punjab Industrial Policy: इंडस्ट्रियल एरिया के नए नियम लागू, मेंटेनेंस चार्ज बकाया होने पर बिजली होगी बंद

चंडीगढ़ 
पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने कारोबारियों को बड़ा झटका दिया है। सरकार अब मेंटेनेंस चार्ज की वसूली बिजली बिल के साथ करेगी। अगर किसी फैक्ट्री या अन्य औद्योगिक इकाई ने मेंटेनेंस चार्ज नहीं भरा तो उसका बिजली कनेक्शन भी काटा जा सकता है

इसके लिए AAP सरकार ने 'पंजाब कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) अमेंडमेंट बिल-2026' विधानसभा में पेश किया है। उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा द्वारा पेश किए गए इस बिल का मकसद औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कें, स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा, ड्रेनेज और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं के रखरखाव के लिए नियमित फंड जुटाना और पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।

आइए, जानते हैं पहले क्या व्यवस्था थी और अब क्या बदलेगा…

6 पॉइंट्स में समझिए, कैसे लागू होगा नया कानून:-

1. किन क्षेत्रों में लागू होगा कानून, कब से होगा लागू? यह कानून उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, आवास एवं शहरी विकास विभाग और स्थानीय निकाय विभाग के अधीन आने वाले सभी इंडस्ट्रियल एरिया, पार्क और एस्टेट में लागू होगा। नोटिफाई इंडस्ट्रियल पार्कों और एस्टेट्स के बाहर बने औद्योगिक क्लस्टर भी इसके दायरे में आएंगे, अगर उनके पास सभी जरूरी कानूनी मंजूरियां हैं। फिलहाल बिल विधानसभा में पेश हुआ है। विधानसभा से पास होने, राज्यपाल की मंजूरी और नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यह लागू होगा।

2. बिजली बिल के साथ वसूला जाएगा सर्विस चार्ज अब तक मेंटेनेंस के लिए सर्विस चार्ज अलग से लिया जाता था, लेकिन इसकी वसूली में दिक्कत आती थी। अब यह चार्ज हर महीने बिजली बिल में जुड़कर आएगा। इसकी वसूली PSPCL करेगी और बदले में उसे कुल रकम का 3% प्रशासनिक शुल्क मिलेगा। चार्ज की दर सरकार तय करेगी। यह उद्योग के मंजूर बिजली लोड या उसकी कैटेगरी के हिसाब से होगी। छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए अलग-अलग स्लैब होंगे। नगर निगम क्षेत्र में यही चार्ज प्रॉपर्टी टैक्स के बदले माना जाएगा।

3. जमा पैसा कहां जाएगा, किस पर खर्च होगा? बिजली बिल के जरिए वसूली गई रकम का 90% हिस्सा संबंधित इंडस्ट्रियल एरिया की SPV को मिलेगा। इससे सड़क, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, सफाई और कचरा प्रबंधन जैसे काम होंगे। बाकी 10% राशि PSIEC, PUDA और PMIDC जैसी सरकारी एजेंसियों को मिलेगी, जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट के काम पर खर्च होगी। पहले कम वसूली और खराब रखरखाव के कारण करोड़ों रुपए का बकाया जमा हो गया था।

4. SPV क्या करेगी? हर इंडस्ट्रियल एरिया में उद्योगपतियों और सरकारी अधिकारियों की भागीदारी से SPV बनाई जाएगी। इसका सोसाइटी के रूप में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यही समिति पूरे इलाके के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इसमें इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, PSIEC और उद्योग विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। SPV अपने कुल बजट का अधिकतम 5% ही प्रशासनिक खर्च पर कर सकेगी। कचरा प्रबंधन के लिए उसे PPCB और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन करना होगा।

5. शिकायत कहां होगी, बिल नहीं भरा तो क्या होगा? मेंटेनेंस या सर्विस चार्ज से जुड़े विवादों के लिए हर जिले में DC की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट मॉनिटरिंग अथॉरिटी बनाई जाएगी। PSPCL सिर्फ सर्विस चार्ज की वसूली करेगी। अगर कोई बिल नहीं भरता है तो बिजली अधिनियम-2003 के तहत बकाया वसूला जाएगा और जरूरत पड़ने पर बिजली कनेक्शन भी काटा जा सकता है। बिलिंग या चार्ज से जुड़ी शिकायत का निपटारा SPV, PSIEC या उद्योग विभाग करेगा।

6. SPV ने काम नहीं किया तो क्या होगा? अगर कोई SPV अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाती है तो सरकार पहले 30 दिन का कारण बताओ नोटिस देगी। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर समिति भंग की जा सकेगी। उसकी जगह SDM स्तर के अधिकारी को प्रशासक बनाया जाएगा और छह महीने के भीतर नई SPV का गठन होगा। वहीं, अगर इस कानून का किसी दूसरे कानून से टकराव होता है तो नए कानून के प्रावधान ही लागू होंगे।

बंद बिजली कनेक्शन पर यह चार्ज लागू नहीं होगा, जबकि चालू कनेक्शन पर न्यूनतम या फिक्स्ड चार्ज देना पड़ सकता है। एक ही परिसर में एक से ज्यादा बिजली कनेक्शन होने पर दोहरा शुल्क न लगे, इसके लिए सरकार अलग नियम बनाएगी। बिल पास हो चुका है। अब गवर्नर की मंजूरी मिलते ही ये कानून बन जाएगा और इसे लागू कर दिया जाएगा।

फैक्ट्री एसोसिएशन ने क्या कहा?

जालंधर के खेल उद्योग संघ संघर्ष समीति के कन्वीनर रविंदर धीर ने कहा-
रेवड़ियां बांटने के लिए उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डालना ठीक नहीं है। चुनाव से पहले इंस्पेक्टर राज खत्म करने का वादा किया गया था, लेकिन हालात नहीं बदले। पंजाब में उद्योग चलाना पहले ही मुश्किल है। अगर यह संशोधन कानून लागू हुआ तो उद्योग जगत इसका विरोध करेगा।

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