₹200 में ड्रोन का खेल खत्म! भारत की नई तकनीक से आत्मघाती UAV पर सटीक वार, जानें इसकी एक चुनौती

बेंगलुरु  ना ब्रह्मोस की भारी-भरकम लागत, ना अग्नि मिसाइल का गर्जन. महज 200 रुपये की बिजली का एक झटका और दुश्मन का घातक आत्मघाती कामिकेज ड्रोन पलक झपकाते ही हवा में जलकर स्वाहा हो जाएगा. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इस नए स्वदेशी साइलेंट किलर लेजर हथियार यानी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) ने…

₹200 में ड्रोन का खेल खत्म! भारत की नई तकनीक से आत्मघाती UAV पर सटीक वार, जानें इसकी एक चुनौती

बेंगलुरु 

ना ब्रह्मोस की भारी-भरकम लागत, ना अग्नि मिसाइल का गर्जन. महज 200 रुपये की बिजली का एक झटका और दुश्मन का घातक आत्मघाती कामिकेज ड्रोन पलक झपकाते ही हवा में जलकर स्वाहा हो जाएगा. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इस नए स्वदेशी साइलेंट किलर लेजर हथियार यानी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) ने आधुनिक युद्ध के सारे समीकरण ही बदलकर रख दिए हैं. जहां करोड़ों रुपये की मिसाइलें भी झुंड में आने वाले ड्रोन्स के आगे कभी-कभी बेबस महसूस करती थीं, वहीं इस तकनीक ने रक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है. लेकिन इस अजेय और असीमित क्षमता वाले महाहथियार के चमकदार भविष्य के पीछे एक ऐसा कमजोर पहलू भी छिपा है जो अचानक युद्ध के मैदान का पूरा खेल पलट सकता है। 

इस महाशक्तिशाली लेजर बीम का सबसे बड़ा दुश्मन कोई आधुनिक रडार या शील्ड नहीं बल्कि प्रकृति का एक छोटा सा मिजाज है. बारिश, घना कोहरा और धुंध है ये हथियार बेअसर साबित नजर आता है. जैसे ही आसमान में बादल घिरते हैं या कोहरा छाता है, प्रकाश की गति से तबाही मचाने वाली यह अचूक किरण अपनी धार खो बैठती है और हवा में ही बिखर कर शांत हो जाती है। 

डीआरडीओ का प्रोजेक्‍ट सहस्र शक्ति
डायरेक्टेड एनर्जी वेपन यानी लेजर और माइक्रोवेव आधारित हथियार आधुनिक युद्धनीति के सबसे क्रांतिकारी गेम-चेंजर माने जा रहे हैं. परंपरागत बारूद, मिसाइल या गोलियों के विपरीत ये हथियार अत्यधिक केंद्रित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा या लेजर बीम का इस्तेमाल कर दुश्मन के ड्रोन, फाइटर जेट्स और मिसाइलों को हवा में ही पिघलाकर या उनके इलेक्ट्रॉनिक्स को जलाकर नष्ट कर देते हैं. भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अपने दो प्रमुख संस्थानों CHESS (हैदराबाद) और LASTEC (दिल्ली) के जरिए प्रोजेक्ट सहस्र शक्ति के तहत इन स्वदेशी हथियारों पर तेजी से काम कर रहा है। 

प्रमुख भारतीय प्रोजेक्ट्स
• प्रोजेक्ट तेजास्त्र/सहस्र शक्ति (DEW Mk-1 & Mk-2A): भारत द्वारा विकसित 30-किलोवॉट (kW) क्षमता वाला मोबाइल लेजर वेपन सिस्टम. इसे ट्रक पर माउंट करके सीमाओं पर तैनात किया जाता है। 
• DURGA-II (Directionally Unrestricted Ray-Gun Array): यह DRDO का 100-किलोवॉट क्लास का हल्का और अत्याधुनिक लेजर वेपन प्रोजेक्ट है। 
• प्रोजेक्ट सूर्य: 300-किलोवॉट क्षमता वाला भविष्य का प्रोजेक्ट जिसे सुपरसोनिक मिसाइलों और फाइटर जेट्स को रोकने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। 

 

पैरामीटर विवरण / आँकड़े
स्पीड (गति) प्रकाश की गति (~3,00,000 किमी/सेकंड): दागे जाने के तुरंत बाद (नैनोसेकंड्स में) लक्ष्य पर हमला।
प्रभावी रेंज 2 किमी से 10 किमी (पावर पर आधारित): 30kW सिस्टम (4 किमी); 100kW दुर्गा-2 (5–10 किमी); भविष्य का ‘सूर्य’ प्रोजेक्ट (20 किमी तक)।
पेलोड (वारहेड) शून्य (जीरो पेलोड): इसमें कोई बारूद या मिसाइल नहीं होती, केवल ‘फोकस्ड फोटोन बीम’ होती है।
प्रति शॉट लागत ₹200 से ₹800 (मिसाइलों की तुलना में केवल बिजली का खर्च)
पावर सोर्स 30 kW से 100 kW+: हाई-कैपेसिटी बैटरी पैक, डीजल जेनरेटर या शिप-बोर्ड पावर ग्रिड से संचालित।
 
विशेषता पारंपरिक एयर डिफेंस मिसाइल(जैसे आकाश/स्पाइडर) डायरेक्टेड एनर्जी वेपन(लेजर/DEW)
हमले का समय मैक 2-4 (कुछ सेकंड से मिनट) प्रकाश की गति (तत्काल इम्पैक्ट)
मैगजीन क्षमता सीमित (मिसाइलों की संख्या खत्म होने पर रीलोड जरूरी) असीमित (जब तक बिजली की सप्लाई है)
एक हमले की लागत ₹30 लाख से ₹3 करोड़ प्रति मिसाइल मात्र ₹200 से ₹800 प्रति लेजर शॉट
स्वार्म ड्रोन का मुकाबला बहुत खर्चीला और कठिन बेहद आसान और किफ़ायती
मौसम का प्रभाव मौसम से काफी हद तक अप्रभावित धुंध, घने बादलों और बारिश में रेंज कम हो सकती है

तकनीकी और रणनीतिक विश्लेषण 

फायदे
1. सस्ते ड्रोन हमलों का तोड़: रूस-यूक्रेन युद्ध में देखा गया है कि $20,000 के ड्रोन को गिराने के लिए $10 लाख की मिसाइलें दागनी पड़ती हैं. लेजर वेपन इस वित्तीय संतुलन को भारत के पक्ष में बदल देते हैं.
2. सटीकता: लेजर बीम ड्रोन के विशिष्ट हिस्से (जैसे- फ्यूल टैंक, कैमरे या कंट्रोल सेंसर) को बिना आसपास नुकसान पहुंचाए निशाना बना सकती है.

चुनौतियां
1. मौसम की बाधा: भारी बारिश, कोहरा या धूल भरी आंधी लेजर बीम की ऊर्जा को बिखेर देती है.
2. बिजली और कूलिंग की आवश्यकता: 100kW की लेजर बीम पैदा करने के लिए भारी-भरकम पावर जेनरेटर और उन्नत कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है.

सवाल-जवाब
लेजर हथियार बिना किसी बारूद के ड्रोन या मिसाइल को कैसे तबाह करता है?
लेजर हथियार एक ही बिंदु पर अत्यधिक केंद्रित प्रकाश ऊर्जा (Photons) डालता है. यह ऊर्जा लक्ष्य की सतह पर कुछ ही सेकंड में हजारों डिग्री तापमान पैदा कर देती है, जिससे ड्रोन का फाइबर या मेटल ढांचा जल जाता है और उसके अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक्स और फ्यूल पिघल जाते हैं.
DRDO का दुर्गा-2 (DURGA-II) प्रोजेक्ट क्या है?
DURGA-II भारत का 100-किलोवॉट क्षमता वाला स्वदेशी लेजर वेपन प्रोजेक्ट है. इसका मुख्य उद्देश्य थल सेना, वायुसेना और नौसेना को दुश्मन के झुंड ड्रोन्स (Swarm Drones), बैलिस्टिक/क्रूज मिसाइलों और आर्टिलरी गोलों से सुरक्षा देना है.
क्या लेजर हथियारों से दुनिया की कोई भी मिसाइल बचाई जा सकती है?
हाँ, लेजर हथियार प्रकाश की गति (3 लाख किमी/सेकंड) से काम करते हैं, जिससे यह हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसी अत्यधिक तेज उड़ने वाली वस्तुओं को भी आसानी से ट्रैक करके उनके पतवार या सेंसर को तुरंत निष्क्रिय कर सकते हैं.

 

 

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports