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SIR अपडेट: हरियाणा में 34 लाख नाम हटे, 44 लाख वोटरों को 30 अगस्त तक सुधार का अवसर

चंडीगढ़. हरियाणा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआइआर) के दौरान जहां 34 लाख संदिग्ध मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से काटे जा चुके हैं, वहीं लगभग 44 लाख मतदाता ऐसे भी सामने आए हैं, जिनके नामों की पिछली मतदाता सूचियों से मैपिंग नहीं मिली और नाम मिसमैच मिले हैं। करीब 28 लाख…

SIR अपडेट: हरियाणा में 34 लाख नाम हटे, 44 लाख वोटरों को 30 अगस्त तक सुधार का अवसर

चंडीगढ़.

हरियाणा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआइआर) के दौरान जहां 34 लाख संदिग्ध मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से काटे जा चुके हैं, वहीं लगभग 44 लाख मतदाता ऐसे भी सामने आए हैं, जिनके नामों की पिछली मतदाता सूचियों से मैपिंग नहीं मिली और नाम मिसमैच मिले हैं।

करीब 28 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम मतदाता साल 2002 की मतदाता सूचियों में मिसमैच पाए गए हैं, जबकि 16 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनकी मैपिंग नहीं हो रखी है। राज्य में कुल दो करोड़ छह लाख मतदाता हैं, जिनमें से 34 लाख मतदाता पहले ही बाहर हो चुके हैं। हरियाणा के निर्वाचन विभाग ने अब मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण की प्रक्रिया आरंभ की है। निर्वाचन आयोग की ओर से ऐसे सभी मतदाताओं को नोटिस भिजवाए जा रहे हैं, ताकि वे अपने वोट कार्ड और मतदाता सूची में करेक्शन करवा सकें, लेकिन अभी तक मतदाताओं की अपेक्षित प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

42 लाख नामों को नोटिस जारी
मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने के लिए अब तक 42.69 लाख से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इनके मुकाबले दावे और आपत्तियों के लिए प्राप्त आवेदनों की संख्या काफी कम है। इसी को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने सभी पात्र मतदाताओं से मतदाता सूची में अपना नाम जांचने और समय रहते आवश्यक कार्यवाही करने की अपील की है। निर्वाचन आयोग के अनुसार 31 जुलाई तक 44.86 लाख नोटिस जारी किए जाने थे, जिनमें से 42.69 लाख से अधिक नोटिस तैयार कर बीएलओ के माध्यम से संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। शेष मामलों में भी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी है। इसके बावजूद पांच अगस्त तक केवल 8,942 फार्म-6, 194 फार्म-7 और 8,294 फार्म-8 ही प्राप्त हुए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अभी तक नोटिस के अनुरूप कार्रवाई नहीं की है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर सत्यापन, प्रपत्रों का वितरण और संग्रहण तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण का कार्य कर रहे हैं। अभियान को गति देने के लिए निर्वाचन आयोग ने प्रत्येक बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर को वार्षिक मानदेय के अतिरिक्त 6,000 रुपये का एकमुश्त मानदेय देने का भी निर्णय लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास व संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजकुमार लोहान ने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे प्रारंभिक मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांचें। यदि नाम दर्ज नहीं है तो फार्म-6 तथा किसी प्रकार की त्रुटि होने पर फार्म-8 भरकर 30 अगस्त 2026 तक संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) या बीएलओ के पास जमा कराएं, ताकि अंतिम मतदाता सूची में कोई भी पात्र मतदाता शामिल होने से वंचित न रह जाए।

इस तरह की गड़बड़ियां आाई सामने –

  • भाई-बहनों की जन्मतिथियों में नौ माह से कम का अंतर मिला
  • दादा-दादी या नाना-नानी की उम्र में 40 साल से कम का अंतर
  • माता-पिता व बच्चों की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा का अंतर
  • वर्तमान व पुरानी सूची में माता-पिता के नाम और रिश्तों में अंतर
  • महिलाओं का नाम किसी सूची में पति तो किसी सूची में पिता के रूप में दर्ज
  • नाम की वर्तनियों में काफी अंतर के मामले हैं

किसी मतदाता का नाम बिना सुनवाई के नहीं कटेगा
संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजकुमार लोहान ने बताया कि किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई के नहीं कटेगा। निर्वाचक पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) के निर्णय पर मतदाता 15 दिन के अंदर जिला स्तर पर अपील कर सकता है। फिर भी समस्या आती है तो 30 दिन के अंदर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील की जा सकती है। तीन अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। दावे व आपत्तियों के साथ-साथ 28 सितंबर तक नोटिस फेज व आपत्तियों के समाधान का कार्य चलता रहेगा।

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