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तीन दिन मिट्टी के नीचे दफन रहा युवक, ‘लाइव समाधि’ स्टंट के दौरान गई जान

 नूंह हरियाणा के नूंह जिले में एक हैरतअंगेज और दर्दनाक हादसा सामने आया है। गांव के मेले में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए किए जाने वाले 'जिंदा समाधि' स्टंट ने 27 वर्षीय युवक की जान ले ली। साइकिल सर्कस से जुड़े दीपक नाम के युवक को बोरे में बंद कर मिट्टी के नीचे दफना…

तीन दिन मिट्टी के नीचे दफन रहा युवक, ‘लाइव समाधि’ स्टंट के दौरान गई जान

 नूंह
हरियाणा के नूंह जिले में एक हैरतअंगेज और दर्दनाक हादसा सामने आया है। गांव के मेले में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए किए जाने वाले 'जिंदा समाधि' स्टंट ने 27 वर्षीय युवक की जान ले ली। साइकिल सर्कस से जुड़े दीपक नाम के युवक को बोरे में बंद कर मिट्टी के नीचे दफना दिया गया था। दावा था कि वह कुछ समय बाद जिंदा बाहर निकलेगा, लेकिन जब तीन दिन बाद गड्ढा खोदा गया तो उसकी दम घुटने से मौत हो चुकी थी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने भी बिना अनुमति ऐसे जानलेवा स्टंट आयोजित किए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

साइकिल स्टंट के बाद किया 'जिंदा समाधि' का प्रदर्शन
फरीदाबाद के गांव गौंछी निवासी दीपक एक घूमने वाले साइकिल सर्कस का आयोजक था। यह सर्कस नूंह जिले के तावड़ू के खोरी गांव में खाली मैदान में लगा हुआ था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दीपक ने पहले साइकिल पर कई रोमांचक करतब दिखाए। उसने हैंडल पर संतुलन बनाकर साइकिल चलाई, बिना पहियों की ओर देखे साइकिल चलाई और चलती साइकिल पर खड़े होकर दर्शकों का मनोरंजन किया।

इसके बाद उसने अपने सबसे चर्चित स्टंट 'लाइव समाधि' का प्रदर्शन किया। दीपक खुद एक बोरे में घुसा, पहले से खोदे गए गड्ढे में लेट गया और फिर उसे मिट्टी से पूरी तरह ढक दिया गया।

तीन दिन बाद निकाला गया, तब तक हो चुकी थी मौत
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि दीपक को गुरुवार को गड्ढे में दफनाया गया था। हालांकि वह कितने समय तक जमीन के नीचे रहा, इसकी पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी।

जब स्टंट के अंतिम चरण में साथी कलाकारों ने गड्ढा खोदकर दीपक को बाहर निकालने की कोशिश की, तब तक उसकी दम घुटने से मौत हो चुकी थी।

भाई ने जताया साजिश का अंदेशा
दीपक के बड़े भाई सुनेत दव ने बताया कि वह भी पहले ऐसे स्टंट किया करते थे, लेकिन खतरे को देखते हुए दो साल पहले यह काम छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि परिवार लगातार दीपक को यह स्टंट छोड़ने के लिए कहता था।

सुनेत के मुताबिक, इस स्टंट के लिए वर्षों की प्रैक्टिस, सांस रोकने की क्षमता और विशेष तकनीक की जरूरत होती है। बोरे में छोटे-छोटे छेद बनाए जाते हैं और मिट्टी के बीच हवा पहुंचाने के लिए संकरे रास्ते तैयार किए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर कोई भी कलाकार 24 घंटे से ज्यादा जमीन के नीचे नहीं रहता, क्योंकि उसके बाद जान का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि आखिर दीपक को इतनी लंबी अवधि तक जमीन के नीचे क्यों रखा गया, इसकी जांच होनी चाहिए।

प्रशासन बोला- बिना अनुमति ऐसे स्टंट गैरकानूनी
तावड़ू सदर थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

फिलहाल किसी की ओर से शिकायत नहीं मिलने के कारण मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि पुलिस साथी कलाकारों और ग्रामीणों के बयान दर्ज कर रही है ताकि पूरी घटना का सही समय और परिस्थितियां स्पष्ट हो सकें।

नूंह के उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि इस तरह के जानलेवा स्टंट बिना अनुमति आयोजित करना गैरकानूनी है। प्रशासन यह जांच करेगा कि इतनी खतरनाक गतिविधि की अनुमति किस आधार पर दी गई या बिना अनुमति कैसे आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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