,

प्रयागराज में फीकी पड़ी ‘छात्रों की गूंज’अफरोज़ अहमद, वरिष्ठ पत्रकार

प्रयागराज उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रयागराज का स्थान हमेशा से ऐतिहासिक और वैचारिक आंदोलनों का केंद्र रहा है। देशभर से आकर सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र इस शहर को अपनी कर्मभूमि बनाते हैं। यही कारण है कि जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रयागराज में…

प्रयागराज में फीकी पड़ी ‘छात्रों की गूंज’अफरोज़ अहमद, वरिष्ठ पत्रकार

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रयागराज का स्थान हमेशा से ऐतिहासिक और वैचारिक आंदोलनों का केंद्र रहा है। देशभर से आकर सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र इस शहर को अपनी कर्मभूमि बनाते हैं। यही कारण है कि जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय हुआ, तो राजनीतिक गलियारों में इसे उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ विपक्ष के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जाने लगा। कार्यक्रम का उद्देश्य भी स्पष्ट था- पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसे मुद्दों पर छात्रों के असंतोष को एकजुट कर राज्य सरकार को घेरना। लेकिन, ऐसा हो नहीं सका।

तमाम राजनीतिक दावों, बड़े-बड़े पोस्टरों और प्रचार के तमाम साधनों का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद यह आयोजन वह राजनीतिक प्रभाव छोड़ने में विफल रहा, जिसकी संभावना जताई जा रही थी। ठोस जमीनी रणनीति, स्पष्ट दिशा और कुशल नेतृत्व के अभाव में यह कार्यक्रम योगी सरकार के राजनीतिक किले को चुनौती देने के बजाय एक साधारण औपचारिक संवाद बनकर रह गया, जिसमें बमुश्किल पांच हजार छात्र जुट सके। कांग्रेस भले ही इस आयोजन की विफलता का दोष तैयारियों के अभाव और आयोजनात्मक अव्यवस्था पर मढ़े, लेकिन इस हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता कि उत्तर प्रदेश के युवा काफी हद तक योगी सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। खासतौर से लड़कियों को सुरक्षा का जो माहौल मिला है, उससे उनकी पढ़ाई और नौकरी करने के अवसर बढ़े हैं। ऐसे में राहुल गांधी के पास ‘छात्रों की गूंज’ सुनाने का कोई ठोस आधार भी मौजूद नहीं था।

यदि राहुल गांधी प्रयागराज जैसे विशाल छात्र आधार वाले शहर में छात्रों को योगी सरकार के विरोध में एकत्र नहीं कर सके, तो यह उनके लिए आत्ममंथन का विषय है। शायद यही वजह रही कि राहुल गांधी के संबोधन में डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कॉरपोरेट कंपनियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग अधिक रहा। काफी मशक्कत से कांग्रेस कार्यकर्ता जिन छात्रों को आयोजन स्थल तक ला सके, उनसे राहुल गांधी के संवाद का स्तर अत्यंत सामान्य रहा। राहुल न तो योगी सरकार के खिलाफ कोई ठोस आंकड़े रख सके और न ही कांग्रेस का कोई सुनियोजित ब्लूप्रिंट पेश कर सके। छात्र केवल भाषण सुनने नहीं आए थे। उन्हें अपेक्षा थी कि राहुल गांधी युवाओं के लिए कांग्रेस पार्टी की कोई ठोस नीतिगत कार्ययोजना रखेंगे। ऐसे में कार्यक्रम में शामिल छात्रों को भी निराश होना पड़ा।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार का शासन मॉडल अपनी प्रशासनिक दृढ़ता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के लिए जाना जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए कड़े कानून और त्वरित कार्रवाइयों ने विपक्ष के नैरेटिव की धार को काफी हद तक कुंद कर दिया है। इसके साथ ही, भारतीय जनता पार्टी और उसके अनुषांगिक संगठनों के पास प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में बूथ और युवा स्तर तक फैला एक मजबूत संगठन तंत्र मौजूद है। कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में छात्र राजनीति (एनएसयूआई) का वह कैडर ढांचा ही उपलब्ध नहीं है, जो विश्वविद्यालय और कोचिंग परिसरों से छात्रों को लगातार जोड़ सके। बिना कैडर के केवल नेताओं की उपस्थिति से किसी बड़े जनांदोलन की नींव नहीं रखी जा सकती।

उत्तर प्रदेश की राजनीति केवल किसी एक दिन के हाई प्रोफाइल इवेंट या सोशल मीडिया अभियानों से नहीं बदलती। योगी सरकार को सीधे राजनीतिक मैदान में चुनौती देने के लिए युवाओं को इतिहास या भविष्य में झांकने पर मजबूर करना होगा। कांग्रेस की दिक्कत यह है कि उसका इतिहास युवाओं की समस्याओं से भरा है और भविष्य के लिए उसके पास अभी तक कोई ब्लूप्रिंट नहीं है। राहुल गांधी का प्रयागराज दौरा एक पिटा हुआ 'सिंगल डे इवेंट' जैसा रहा। कार्यक्रम खत्म होते ही न तो कोई स्थायी छात्र संघर्ष समिति का खाका सामने आया और न ही आंदोलन को आगे ले जाने की रणनीति की घोषणा की गई। यही कारण है कि प्रदेश स्तर तो दूर की बात है, स्थानीय स्तर पर भी इस कार्यक्रम का प्रभाव बहुत जल्द समाप्त हो गया और सरकार पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं बन पाया।

प्रयागराज का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि केवल राष्ट्रीय नेताओं के दौरे या मीडिया कवरेज से उत्तर प्रदेश जैसी जटिल राजनीतिक प्रयोगशाला में सरकार को नहीं घेरा जा सकता। योगी सरकार को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चुनौती देने के लिए विपक्ष को बड़ी लकीर खींचकर दिखानी होगी। साबित करना होगा कि उसके पास युवाओं के लिए योगी सरकार से बेहतर विजन है। यूपी में अपनी ऊर्जा गंवाने से बेहतर होता कि कांग्रेस अपनी सरकार वाले राज्यों में युवाओं के हित में कुछ ऐसा करती, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बनता। लेकिन कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल, केरल, झारखंड या तमिलनाडु से युवाओं को ऐसा कोई संदेश नहीं मिल रहा। नई दिल्ली में जेन-जी के प्रदर्शन पर संसद में बढ़-चढ़ कर बयानबाजी करने वाली कांग्रेस झारखंड में छात्र आंदोलन पर मौन है!

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed