,

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के संचालन के लिए 1,14,365 करोड़ रूपये की स्वीकृति

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जीवनदायिनी माँ नर्मदा के संरक्षण, पुनर्जीवन तथा दीर्घकालीन सतत् प्रबंधन के लिए 'निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)' के गठन की स्वीकृति प्रदान की गयी। इसी तरह…

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के संचालन के लिए 1,14,365 करोड़ रूपये की स्वीकृति

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जीवनदायिनी माँ नर्मदा के संरक्षण, पुनर्जीवन तथा दीर्घकालीन सतत् प्रबंधन के लिए 'निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)' के गठन की स्वीकृति प्रदान की गयी। इसी तरह मंत्रि-परिषद ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 734 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। पिछले बीस वर्षों में प्रदेश में वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन द्वारा बजट में लगभग 150 गुना वृद्धि की गयी है।प्रदेश के सर्वांगीण विकास, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और तकनीकी प्रगति को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी गई। बैठक में राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं के आगामी वर्षों में निर्बाध संचालन के लिए लगभग 1 लाख 46 हजार करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई।

महिला कल्याण को प्राथमिकता देते हुए 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये, 'मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना' के लिए 16,326.47 करोड़ रुपये और 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के लिए 2,137.65 करोड़ रुपये की वित्तीय निरंतरता को मंजूरी दी गई है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं अधोसंरचना विस्तार के लिए 11 हजार 835.35 करोड़ रुपये, कृषि शिक्षा व अनुसंधान के लिए 870 करोड़ 16 लाख रुपये तथा प्रशासनिक कार्य कुशलता और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम में 35 नवीन पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है।

'निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)' के गठन की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश को जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और दीर्घकालीन सतत प्रबंधन के लिए 'निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)' के गठन की स्वीकृति दी है। मध्यप्रदेश की लगभग 33 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है। इसे ध्यान में रखते हुए इस मिशन को एकीकृत, वैज्ञानिक और बहु-विभागीय संस्थागत व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है।

नमन मिशन की प्रबंधन संरचना

'नमन मिशन' को म.प्र. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में पंजीकृत किया जाएगा, जो पूर्व में गठित मंत्रिमंडल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति और राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की प्राथमिकताओं व अनुश्रवण तंत्र को समाहित कर सुदृढ़ कार्य योजना पर कार्य करेगा। नमन मिशन का प्रशासनिक ढांचा त्रि-स्तरीय रखा गया है।

मुख्यमंत्री करेंगे साधारण सभा की अध्यक्षता

मुख्यमंत्री सर्वोच्च साधारण सभा के अध्यक्ष रहेंगे। इसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री उपाध्यक्ष तथा 19 सहभागी विभागों के मंत्रीगण सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त साधारण सभा में नदी विज्ञान, जल विज्ञान, पर्यावरण, जैव विविधता और सामुदायिक प्रबंधन क्षेत्र के अधिकतम 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी नामांकित किए जाएंगे। मिशन की प्रशासनिक कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव उपाध्यक्ष और संचालन के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी कार्यकारिणी के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इस कार्यकारिणी समिति में आईआईएसईआर, आईआईटी, आईआरएमए, एनआईएच, आईआईएफएम, आईसीएआर और एनईईआरआई जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है।

मिशन का होगा मजबूत वित्तीय ढांचा

मिशन के सुचारू संचालन और परियोजनाओं के निष्पादन के लिए एक मजबूत वित्तीय ढांचा तैयार किया गया है। नर्मदा संरक्षण व विकास कार्यों के लिए 'निर्मल एवं अविरल नर्मदा मिशन निधि' के तहत राज्य अनुदान से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, वन विभाग की कैम्पा निधि से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा। आपवादिक परिस्थितियों में प्रचलित योजनाओं से भिन्न कार्यों के लिए 5 वर्षों में राज्य बजट से 100 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। मिशन में सीएसआर फंड, केंद्रीय सहायता और पीपीपी मॉडल के माध्यम से भी जन-सहयोग जुटाया जाएगा।

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट करेगी वैज्ञानिक मूल्यांकन

तकनीकी दक्षता के लिए गठित की जा रही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट एक टेक-इंजन और नवाचार केंद्र के रूप में कार्य करेगी। यह इकाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग कर नदी स्वास्थ्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 2,137.65 लाख करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने मिशन शक्ति- उपयोजना सामर्थ्य अंतर्गत केन्द्र प्रवर्तित योजना "प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना" की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तरता एवं क्रियान्वयन के लिए 2,137 करोड़ 65 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को मजदूरी की हानि की आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में नकद प्रोत्साहन प्रदान करना एवं द्वितीय प्रसव में बालिका जन्म को प्रोत्साहन प्रदान करना है। योजना अन्तर्गत प्रथम प्रसव वाली पात्र गर्भवती महिला को गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण एवं अंतिम मासिक चक्र (एल.एम.पी) के 6 माह के अंदर कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने पर प्रथम किश्त तीन हजार रूपये और बच्चे के जन्म के पंजीकरण एवं प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने पर द्वितीय किश्त दो हजार रूपये, इस प्रकार कुल 5 हजार रूपये तथा द्वितीय प्रसव पर बालिका जन्म पर प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने के पश्चात् 6 हजार रूपये का लाभ एक किश्त में प्रदान किये जाने का प्रावधान है।

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए 1,14,365 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने "मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना" के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महिलाओं के आर्थिक स्वालंबन, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार एवं परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023, लागू की गई है। योजना के प्रावधानों के अनुसार लाभार्थी महिलाओं को प्रत्येक माह 1500 रूपये मासिक आर्थिक सहायता राशि को उनके डीबीटी सक्रिय खाते में प्रदाय किया जा रहा है। वर्तमान में लाड़ली बहना योजना अन्तर्गत लगभग 1.27 करोड़ महिलाएं लाभान्वित की जा रही हैं।

लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 16 हजार 326.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने लाड़ली लक्ष्मी योजना का वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 16 हजार 326.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।बालिका जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंग अनुपात में सुधार,  बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर, स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार और उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई है। योजना में अब तक लगभग 50.99 लाख बालिकाओं को लाभांवित किया जा चुका है। योजना अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 हजार रूपये, कक्षा 9वीं में प्रवेश पर 4 हजार रूपये, कक्षा 11वीं में प्रवेश पर रुपये 6 हजार रूपये और कक्षा 12वीं में प्रवेश पर 6 हजार रूपये ई-पेंमेंट के माध्यम से प्रदाय किया जाता है। महाविद्यालय में प्रवेश लेने पर प्रथम वर्ष में प्रोत्साहन राशि 12,500 रूपये एवं अंतिम वर्ष में 12,500 रूपये दो समान किश्तों में प्रदाय किया जाता है। साथ ही 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 1 लाख रूपये का भुगतान किया जाता है।

कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान गतिविधियों के लिए 870 करोड़ 16 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग अंतर्गत तीन योजनाओं की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि तक संचालन की निरंतरता के लिए 870 करोड़ 16 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर स्ववित्तीय पेंशन योजना के लिए 310 करोड़ 23 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। इससे विश्वविद्यालय के सेवानिवृत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पेंशन का नियमित भुगतान किया जाता है।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर को ब्लाक ग्रांट योजना के लिए 469 करोड़ 93 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।विश्वविद्यालय प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र है। ब्लॉक ग्रांट योजना के माध्यम से अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, अनुसंधान गतिविधियों, संस्थागत व्ययों तथा अन्य अनुमत्य वित्तीय दायित्वों का नियमित निर्वहन किया जाता है। योजना की निरंतरता विश्वविद्यालय की संस्थागत क्षमता, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं कृषि विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हैं।

इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में अधोसंरचना विकास योजना के लिए 90 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के माध्यम से प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण सुविधाओं, अनुसंधान अधोसंरचना तथा अन्य आवश्यक परिसंपत्तियों का विकास एवं उन्नयन किया जाता है। योजना की निरंतरता से विभाग एवं कृषि विश्वविद्यालयों की संस्थागत क्षमता सुदृढ़ होगी और कृषि क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं का विकास सुनिश्चित होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरण के लिए 11 हजार 835.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरण के लिए कुल 11 हजार 835.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार उप स्वास्थ्य केन्द्र योजना के लिए 4,742 करोड़ 45 लाख रूपये स्वीकृत किए गये है। उप स्वास्थ्य केन्द्र योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के अधीन कार्यरत ए.एन.एम./एल.एच.व्ही. का वेतन आहरित किया जाता है। यह योजना मुख्य रूप से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालयों के लिए ही संचालित हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरण योजना के लिए 518 करोड़ 93 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृ‌ढ़ीकरण योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक तथा उप स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आंतरिक एवं बाह्य रोगियों के उपचार के लिए लगने वाले अत्याधुनिक उपकरणों का प्रबंध किया जाता हैं।

अस्पताल एवं औषधालय के लिए भवन निर्माण योजना के लिए 3,219 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजनांर्गत प्रदेश के विभिन्न चिकित्सालयों जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय एवं सिविल अस्पताल के भवनों का उन्नयन तथा भवन निर्माण कार्य किया जाता है।

आशा कार्यकर्ता को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदाय करने संबंधी योजना के लिए 3,354 करोड़ 75 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की जमीनी कड़ी हैं, जो घर-घर जाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, टीवी, मलेरिया, कुपोषण तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी, सेवा और समर्थन प्रदान करती हैं। इसके साथ ही ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में 5200 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 65,800 कुल 71,000 आशा कार्यकर्ता तथा 5200 आशा पर्यवेक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत है।

मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के 35 नवीन पदों की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की पदीय सरंचना में पूर्व में स्वीकृत 288 पदों के अतिरिक्त 35 नवीन पदों एवं पूर्व से स्वीकृत 07 पदों की निरंतरता आगामी 5 वर्षों अर्थात् 18 सितम्बर 2031 तक रखे जाने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार समस्त नियुक्तियों के लिए समेकित वेतनमान का निर्धारण करने, विभिन्न पदों की प्रतिपूर्ति के लिए न्यूनतम अर्हता/योग्यता विहित करने के लिए प्रबंध संचालक अधिकृत होंगे। पदोन्नति के लिए न्यूनतम अर्हता तथा प्रक्रिया संचालक मंडल द्वारा विहित की जा सकेगी तथा कार्य के स्वरूप के मद्देनजर किसी पद का पदनाम परिवर्तन संचालक मंडल कर सकेगा। इसके फलस्वरूप कुल 4 करोड़ 12 लाख रूपये का वार्षिक वित्तीय भार आना संभावित है, जिसकी पूर्ति निगम द्वारा अपने स्त्रोतों से की जायेगी।

वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 734 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने से संबंधित विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग अंतर्गत योजनाओं के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि तक निरंतर संचालन के लिए 734 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। पिछले 20 वर्षों में प्रदेश में वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन द्वारा बजट में लगभग 150 गुना वृद्धि की गयी है।

निर्णय अनुसार अनुसंधान योजना तथा विकासीय गतिविधियों' से संबंधित योजना के लिए 201 करोड़ 28 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के अंतर्गत अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ कर विज्ञान-आधारित एवं साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के माध्यम से सुदूर संवेदन एवं जीआईएस, अनुसंधान एवं विकास, जैव प्रौ‌द्योगिकी, पेटेंट सूचना, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, ग्रामीण प्रौ‌द्योगिकी तथा एटलस परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, नवाचार, कौशल विकास, बौ‌द्धिक संपदा संरक्षण एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

'निर्देशन एवं प्रशासन' संबंधी योजना के लिए 119 करोड़ 04 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के अंतर्गत परिषद् के सामान्य प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, अधोसंरचना संचालन तथा योजनाओं के समन्वय एवं अनुश्रवण से संबंधित कार्य संपादित किए जायेगे। योजना के माध्यम से वेतन-भत्ते, कार्यालयीन व्यय, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, बैठकों, कार्यशालाओं तथा तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित कर विज्ञान एवं तकनीकी योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक आधार उपलब्ध कराया जायेगा।

इसी तरह 'विज्ञान को लोकप्रिय करना, विज्ञान के प्रसार के लिए सहायता' संबंधी योजना के लिए 172 करोड़ 52 लाख रूपये और मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रानिक विकास निगम की गतिविधियों के लिए 241 करोड़ 16 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के अंतर्गत ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी के लोकव्यापीकरण के उद्देश्य से विज्ञान जागरुकता कार्यक्रम, मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाएँ, विज्ञान शिक्षा एवं नवाचार कार्यशालाएँ तथा विज्ञान मंथन यात्राओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, योजना की गतिविधियों की नियमित निगरानी, मूल्यांकन एवं दस्तावेजीकरण के माध्यम से इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाएगा। इस के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, राष्ट्रीय गणित दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस, राष्ट्रीय तकनीकी दिवस, संभाग स्तरीय विज्ञान मेले (संभागीय वैज्ञानिक सम्मेलन) और साइंस ऑन व्हील तथा क्रिएटिविटी लर्निंग सेंटर द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports