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सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच हरियाणा सरकार ने 22590 रुपये वेतन का प्रस्ताव रखा

 चंडीगढ़ हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और जाब सिक्योरिटी को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है। सरकार के मुताबिक वर्तमान में सफाई कर्मचारियों को कुल 20,590 रुपये मासिक दिए जा रहे हैं। इसमें 19,000 रुपये मासिक वेतन तथा 1,590 रुपये भत्ते के रूप में शामिल…

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच हरियाणा सरकार ने 22590 रुपये वेतन का प्रस्ताव रखा

 चंडीगढ़
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और जाब सिक्योरिटी को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है। सरकार के मुताबिक वर्तमान में सफाई कर्मचारियों को कुल 20,590 रुपये मासिक दिए जा रहे हैं। इसमें 19,000 रुपये मासिक वेतन तथा 1,590 रुपये भत्ते के रूप में शामिल हैं।

सरकार ने कहा है कि वह पालिका रोल पर कार्यरत कर्मचारियों को जाब सिक्योरिटी देने के लिए तैयार है। जाब सिक्योरिटी मिलने के बाद कर्मचारियों का कुल मासिक भुगतान बढ़कर 22,590 रुपये हो जाएगा। इसमें 21,000 रुपये मासिक वेतन और 1,590 रुपये भत्ते शामिल होंगे। सरकार के अनुसार जाब सिक्योरिटी के नियमों के तहत कर्मचारियों को हर साल वेतन में होने वाली वार्षिक वृद्धि का लाभ भी मिलेगा।

कर्मचारियों की मांगें मानने संबंधी दावे खारिज
सरकार के इस बयान के बीच सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर आंदोलन और तेज होने के संकेत हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के दावों को स्वीकार करने के बजाय कई अहम सवाल उठाए हैं। नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा एवं अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने सरकार की ओर से सफाई कर्मचारियों की मांगें मानने संबंधी दावे को खारिज किया है।

संगठनों का कहना है कि सरकार के प्रेस नोट में जिन मांगों को ‘सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत’ बताया गया है, उनमें से कई मांगों का लाभ कर्मचारियों को पहले से मिल रहा है या वे सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए पुराने समझौते का हिस्सा हैं।

आज तक आवश्यक आदेश जारी नहीं किए गए
नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव मांगेराम तिगरा तथा अग्निशमन विभाग के प्रधान राजेंद्र सिंद और महासचिव गुलशन भारद्वाज ने कहा कि 13 मई को सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौते में 22 मांगों में से 17 मांगों को सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी थी।

इन मांगों को लागू करने के लिए सरकारी पत्र और आदेश जारी किए जाने थे, लेकिन उनके अनुसार आज तक आवश्यक आदेश जारी नहीं किए गए।

कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि अब उन्हीं मांगों को दोबारा ‘सैद्धांतिक सहमति’ के तौर पर पेश करना कर्मचारियों के साथ छलावा है। उनका कहना है कि कर्मचारी केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को लागू करने वाले स्पष्ट सरकारी आदेश चाहते हैं

संगठन के नेताओं ने सरकार से 13 मई के समझौते को तत्काल लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पालिका रोल कर्मचारियों को नियमित करने, ठेका प्रथा समाप्त करने, सफाई एवं सीवर कर्मचारियों की स्थायी भर्ती करने और समान काम के लिए समान वेतन लागू करने की मांग दोहराई है।

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