,

ऑडिट टीम की खातिरदारी का आदेश! पंचायतों से भोजन-चाय की व्यवस्था कराने पर मचा बवाल

डोंगरगढ़. जनपद पंचायत डोंगरगढ़ का एक आदेश इन दिनों चर्चा में है। दरअसल, महालेखाकार (लेखापरीक्षा) की टीम 25 अगस्त से 1 सितंबर तक जनपद पंचायत क्षेत्र में ऑडिट और जांच के लिए आने वाली है। इसके लिए जनपद पंचायत ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को ऑडिट टीम के ग्राम पंचायतों में जाने, रुकने और खाने-पीने की…

ऑडिट टीम की खातिरदारी का आदेश! पंचायतों से भोजन-चाय की व्यवस्था कराने पर मचा बवाल

डोंगरगढ़.

जनपद पंचायत डोंगरगढ़ का एक आदेश इन दिनों चर्चा में है। दरअसल, महालेखाकार (लेखापरीक्षा) की टीम 25 अगस्त से 1 सितंबर तक जनपद पंचायत क्षेत्र में ऑडिट और जांच के लिए आने वाली है। इसके लिए जनपद पंचायत ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को ऑडिट टीम के ग्राम पंचायतों में जाने, रुकने और खाने-पीने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

आदेश में साफ तौर पर विश्राम, भोजन, चाय और नाश्ते की व्यवस्था करने की बात लिखी गई है। अब इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि ऑडिट टीम गांवों में जाकर जांच क्यों करेगी। ऑडिट टीम का पंचायतों के रिकॉर्ड और खातों की जांच करना सामान्य प्रक्रिया है। सवाल यह है कि जिन पंचायतों के खातों की जांच होनी है, क्या उन्हीं पंचायतों से ऑडिट टीम के खाने-पीने की व्यवस्था कराई जा सकती है? जनपद पंचायत के 24 अगस्त के आदेश में महालेखाकार कार्यालय के 17 अगस्त के एक पत्र का हवाला दिया गया है। यानी महालेखाकार कार्यालय के पत्र के आधार पर यह आदेश जारी किया गया है, लेकिन डोंगरगढ़ जनपद के आदेश में यह साफ नहीं किया गया है कि ऑडिट टीम के भोजन, चाय-नाश्ते और रुकने का खर्च कौन उठाएगा और किस सरकारी मद से किया जाएगा। यही बात पूरे मामले को महत्वपूर्ण बना रही है।

दरअसल, ऑडिट का मतलब ही होता है कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल सही तरीके से हुआ या नहीं, इसकी जांच करना। ऐसे में अगर किसी पंचायत के खाते की जांच करने वाली टीम के खाने-पीने का खर्च उसी पंचायत के सरकारी पैसे से किया जाता है, तो यह सवाल जरूर उठेगा कि ऐसा खर्च किस नियम के तहत किया गया। CAG यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की आचार संहिता में ऑडिट टीम की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर खास जोर दिया गया है। ऑडिट से जुड़े अधिकारियों को ऐसी सुविधाएं या आतिथ्य स्वीकार करने से बचना होता है, जिससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हों।

हालांकि अभी सिर्फ इस आदेश के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि कोई वित्तीय गड़बड़ी हो चुकी है, क्योंकि आदेश में यह नहीं लिखा है कि ग्राम पंचायत अपने खाते से ऑडिटर का भोजन कराएगी। इसमें केवल व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है इसलिए अब असली सवाल यह है कि इस व्यवस्था का भुगतान कहां से होगा? क्या जनपद पंचायत अपने बजट से यह खर्च करेगी? क्या किसी सरकारी मद में इसके लिए प्रावधान है? या फिर ग्राम पंचायतों से खर्च कराया जाएगा? अगर पंचायतों से यह खर्च कराया जाता है तो फिर यह भी देखना होगा कि इसके लिए कौन सा नियम और कौन सी वित्तीय स्वीकृति मौजूद है।

बड़ा सवाल – पैसा किस सरकारी खाते से जाएगा
मामले में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि जनपद पंचायत के आदेश में महालेखाकार कार्यालय के 17 अगस्त के मूल पत्र का हवाला दिया गया है इसलिए यह जानना जरूरी है कि उस मूल पत्र में वास्तव में क्या निर्देश दिए गए थे। अगर मूल पत्र में केवल ऑडिट और निरीक्षण की बात है और भोजन-चाय-नाश्ते की व्यवस्था का कोई निर्देश नहीं है तो फिर सवाल उठेगा कि जनपद पंचायत ने अपनी तरफ से यह व्यवस्था किस नियम के तहत जोड़ी।

अब जरूरत इस बात की है कि जनपद पंचायत और महालेखाकार कार्यालय दोनों यह स्पष्ट करें कि ऑडिट टीम के भोजन, चाय-नाश्ते और ठहरने का खर्च कौन उठाएगा और इसके लिए किस बजट मद का इस्तेमाल किया जाएगा। फिलहाल सामने आए आदेश से इतना साफ है कि ऑडिट टीम के लिए भोजन, चाय-नाश्ते और विश्राम की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसका पैसा किस सरकारी खाते से जाएगा, यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed