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आगरा बना नवजातों के लिए लाइफलाइन, यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं का असर पड़ोसी राज्यों तक

 लखनऊ/आगरा  उत्तर प्रदेश में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अब केवल यूपी के नागरिकों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से..

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आगरा बना नवजातों के लिए लाइफलाइन, यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं का असर पड़ोसी राज्यों तक

 लखनऊ/आगरा
 उत्तर प्रदेश में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अब केवल यूपी के नागरिकों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से अपग्रेड हुई स्वास्थ्य इकाइयों, विशेषकर आगरा के सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीमार नवजातों को भी नया जीवन मिल रहा है। अत्याधुनिक सी-पैप मशीनों और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के चलते आगरा अब पड़ोसी राज्यों के लिए एक बड़े लाइफ-सेविंग हब के रूप में उभरा है।
हर साल 200 बाहरी बच्चों को मिल रहा ‘नवजीवन’
आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज अपनी उन्नत एसएनसीयू (SNCU) इकाई के माध्यम से हर साल राजस्थान के धौलपुर व भरतपुर और मध्य प्रदेश के भिंड व मुरैना जैसे करीब एक दर्जन जिलों के मरीजों को सेवाएं दे रहा है। कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती होने वाले कुल मरीजों में से लगभग 10% (करीब 200 बच्चे) दूसरे राज्यों के होते हैं। यहां डॉक्टरों ने 800 से 1000 ग्राम वजन वाले प्री-मैच्योर बच्चों को भी सुरक्षित बचाकर एक मिसाल पेश की है।
सी-पैप तकनीक: नवजातों के लिए वरदान
सांस लेने में तकलीफ (Respiratory Distress) नवजात मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। योगी सरकार ने प्रदेश की 48 एसएनसीयू इकाइयों में उन्नत सी-पैप मशीनें स्थापित की हैं। नोडल अधिकारी प्रो नीरज यादव के अनुसार, “सी-पैप तकनीक वेंटिलेटर की तुलना में अधिक सुरक्षित और किफायती है। इससे बच्चों की फेफड़ों तक ऑक्सीजन सही अनुपात में पहुंचती है और ‘कंगारू मदर केयर’ भी जल्दी शुरू की जा सकती है।
सुमन की कहानी: भरोसे की जीत
राजस्थान के धौलपुर की रहने वाली सुमन के छठे दिन के नवजात को सांस लेने में गंभीर समस्या थी। स्थानीय स्तर पर सुधार न होने पर वे सीधे आगरा आए। सुमन बताती हैं, “हमें पता था कि आगरा के मेडिकल कॉलेज में बच्चों को नया जीवन मिलता है। 18 अप्रैल को भर्ती करने के बाद मेरा बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।” यह भरोसा योगी सरकार के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती का प्रमाण है।
राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-5) के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक हजार में से 28 नवजात की मृत्यु विभिन्न कारणों से हो जाती है। इसको कम करने के लिए प्रदेश में इस वक्त 48 एसएनसीयू सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। एसएनसीयू में स्थापित सी-पैप मशीनें नवजातों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन प्रदेश में नवजात मृत्यु दर को कम करने में सीपैप को गेम-चेंजिंग उपाय के रूप में देखते हैं। खासकर एसएनसीयू के भीतर, जहां सांस लेने में तकलीफ़ नवजात शिशुओं की मृत्यु का मुख्य कारण बनी हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि पहले चरण में 48 एसएनसीयू के लिए 350 डाक्टरों, कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। दूसरे चरण में बाकी बचे सभी 72 यूनिट में ट्रेनिंग व अन्य कार्य किए जाएंगे।

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