,

‘ग्वालियरवासियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया’, सड़क परियोजना रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने निगम को फटकारा

 ग्वालियर  ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंगलवार को नगर निगम को जमकर फटकार लगाई। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नगर निगम ने सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पेश नहीं की तो यह माना जाएगा कि निगम…

‘ग्वालियरवासियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया’, सड़क परियोजना रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने निगम को फटकारा

 ग्वालियर
 ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंगलवार को नगर निगम को जमकर फटकार लगाई। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नगर निगम ने सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पेश नहीं की तो यह माना जाएगा कि निगम शहर की सड़कें ठीक करने में रुचि नहीं रखता और उसने ग्वालियरवासियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि जनहित याचिका लंबित होने का बहाना बनाकर नगर निगम सड़कों के निर्माण, पैचवर्क या मरम्मत से पीछे नहीं हट सकता।

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने कैलाशचंद अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम को एक सप्ताह में शहर की सड़कों के निर्माण के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों के पैचवर्क और मरम्मत की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि इस जनहित याचिका का मूल उद्देश्य ग्वालियर के लोगों को सुचारू और गुणवत्तापूर्ण सड़कें उपलब्ध कराना है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी।

सड़क खराब है तो निर्माण से क्यों भाग रहा निगम
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पूछा गया कि क्या क्षतिग्रस्त सड़कों पर पैचवर्क या मरम्मत के लिए भी कोर्ट की अनुमति आवश्यक होगी। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निगम सड़कें ठीक करने का काम कर सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह यह बहाना नहीं बना सकता कि मामला अदालत में लंबित होने के कारण सड़क निर्माण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने नगर निगम को शहर की सड़कों का निर्माण मध्य प्रदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 8 नवंबर 2025 को जारी एसओआर के अनुसार करने की अनुमति दी है। लेकिन इसके साथ निगरानी की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।

मेजरमेंट बुक में गड़बड़ी मिली तो आयुक्त भी जिम्मेदार
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सड़क निर्माण से संबंधित प्रत्येक मेजरमेंट बुक को नगर निगम आयुक्त स्वयं स्थल पर जाकर काम का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही प्रमाणित करेंगे। यदि मेजरमेंट बुक में दर्ज काम और मौके पर वास्तव में हुए निर्माण में अंतर पाया गया तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के साथ नगर निगम आयुक्त भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

आठ से घटकर अब तीन नई सड़कों की जांच
सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांच के लिए गठित आयोग ने कोर्ट को बताया कि हनुमान टॉकीज से गुढ़ा-गुड़ी का नाका तक सड़क से नमूने लेने में करीब 11 घंटे लगे। जांच प्रक्रिया में समय और संसाधन अधिक लगने को देखते हुए कोर्ट ने सभी पक्षों की सहमति से जांच के लिए प्रस्तावित आठ सड़कों की संख्या कम कर दी। अब नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की एक-एक सड़क की जांच होगी। पहले से एक सड़क से नमूने लिए जा चुके हैं। इस तरह आगे तीन विभागों की एक-एक सड़क को जांच के लिए चुना जाएगा।

सड़क का नाम आधा घंटा पहले बताएगा आयोग
कोर्ट ने यह भी व्यवस्था की कि जांच के लिए चुनी जाने वाली सड़कों का नाम पहले से सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया हाईकोर्ट परिसर से टीम के रवाना होने से महज आधा घंटा पहले संबंधित सड़कों की जानकारी देंगे। इसके लिए पहले से चिह्नित सात सड़कों में से आयोग तीन सड़कों का चयन कर सकेगा। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले कोर्ट के समक्ष सड़क की जांच से पहले ही उसके निर्माण या मरम्मत का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया था। कोर्ट ने ऐसे किसी भी हस्तक्षेप से जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका को गंभीरता से लिया था।

बिना सड़क खोदे होगी एक्स-रे जैसी जांच
एनएचएआई की ओर से नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) से सड़क की जांच कराने का सुझाव दिया गया। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए एनएचएआई को अपने खर्च पर वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। 30 अगस्त को एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की चुनी गई एक-एक सड़क को एनएसवी से स्कैन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर 3 और 6 सितंबर को नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की सड़कों से भौतिक नमूने भी लिए जाएंगे। एनएसवी तकनीक से सड़क को खोदे बिना उसकी अंदरूनी स्थिति और परतों की जांच की जा सकेगी। एनएचएआई की सड़क से भौतिक नमूने लिए जाएं या नहीं, इसका निर्णय बाद में किया जाएगा।

रिपोर्ट आने के बाद तय होगी जिम्मेदारी
कोर्ट ने साफ किया कि खराब सड़क निर्माण के लिए किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की दीवानी अथवा आपराधिक जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय की जा सकेगी। नमूनों की जांच के लिए दो नमूने पीडब्ल्यूडी टेस्टिंग लैब और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की प्रयोगशाला को भेजे जाएंगे। एक नमूना जिला न्यायालय ग्वालियर के मालखाने में सुरक्षित रखा जाएगा, जबकि एक नगर निगम को दिया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्वालियर की जनता को अच्छी सड़कें मिलना जरूरी है। इसलिए निर्माण कार्य को अदालत की कार्यवाही के कारण रोका नहीं जा सकता। नगर निगम को अब एक सप्ताह में अपनी पूरी कार्ययोजना अदालत के सामने रखनी होगी।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed