पहाड़ों से पानी नहीं, मौत बरस रही थी… नेपाल में तबाही, 165 मौतें और 750 से ज्यादा लोग लापता

काठमांडू  नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज जलप्रवाह और बाढ़ के बाद यूपी और बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है. गंडक नदी के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है. बता दें कि नेपाल में आई बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 165 पहुंच गया है. 750 से अधिक लोग…

पहाड़ों से पानी नहीं, मौत बरस रही थी… नेपाल में तबाही, 165 मौतें और 750 से ज्यादा लोग लापता

काठमांडू 

नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज जलप्रवाह और बाढ़ के बाद यूपी और बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है. गंडक नदी के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है. बता दें कि नेपाल में आई बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 165 पहुंच गया है. 750 से अधिक लोग लापता हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क बाधित हो गया है। 

इस घटना में 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और कई वाहन तेज बहाव की चपेट में आ गए. नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों से 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है. नेपाल में कई लोग अब भी लापता हैं. इनमें कई भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।इस बीच, नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन अलर्ट पर है. गंडक, नारायणी और कोसी नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर समेत बिहार के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है। 

गृह मंत्रालय समेत कई केंद्रीय मंत्रालय लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. बिहार के 6 जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस मुश्किल घड़ी में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं। 

पहाड़ों से पानी नहीं मौत गिर रही थी, पल-पल टूट रही थीं सांसें
नेपाल के जल विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अंतर्गत बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा ने बुधवार सुबह भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ से संबंधित विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की है। 

रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत की ओर नदी का बहाव रुकने से बनी झील के टूटने के बाद रसुवा के भोटेकोशी से होते हुए त्रिशूली और नारायणी नदी के तटीय क्षेत्रों तक भारी तबाही हुई. बाढ़ के कारण नदी तटीय क्षेत्रों में स्थापित 4 स्वचालित जलमापन केंद्र बह गए. प्रारंभिक तकनीकी आकलन के अनुसार, देवघाट से ही बाढ़ के दौरान करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी बहा। 

नेपाल में तबाही का असर बिहार में सीमित, तटबंधों को कोई खतरा नहीं
नेपाल में आई भीषण तबाही के बीच बिहार के जल संसाधन विभाग ने राहत भरी खबर दी है. विभाग ने साफ कहा है कि राज्य में फिलहाल हालात काबू में हैं. गंडक नदी का पानी 26 अगस्त की रात 11 बजे सबसे ज्यादा 1 लाख 50 हजार 200 क्यूसेक तक पहुंच गया था. इसके बाद पानी लगातार घटने लगा था, लेकिन देवघाट इलाके में देर रात हुई बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। 

जल संसाधन विभाग ने बताया कि इस बढ़ोतरी के बावजूद अभी तक किसी भी तटबंध पर कोई खतरा नहीं दिखा है. सभी बांध और तटबंध पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं. विभाग के अधिकारी हर घंटे नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं और तय नियमों के हिसाब से काम कर रहे हैं. बाढ़ से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का पालन सख्ती से किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से पहले ही निपटा जा सके। 

वहीं दूसरी बड़ी नदी गंगा को लेकर भी राहत की खबर है. गंगा नदी का पानी अभी घटने की दिशा में बढ़ रहा है, यानी जलस्तर कम हो रहा है. हालांकि कुछ जगहों पर एक या दो सेंटीमीटर तक मामूली बढ़ोतरी भी देखी जा सकती है, लेकिन यह बहुत छोटी बढ़त होगी और चिंता की बात नहीं है। जल संसाधन विभाग ने आम लोगों को भरोसा दिलाया है कि पूरी टीम हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है और बाढ़ सुरक्षा को लेकर पूरी तरह तैयार और सतर्क है। 

भूकंप के बाद आई अचानक बाढ़
रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे भूकंप मापन केंद्र ने 4.4 रिक्टर स्केल के भूकंप को दर्ज किया था. इसके कुछ ही समय बाद तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक भीषण बाढ़ प्रवेश करने की सूचना मिली। 

बाढ़ की सूचना मिलते ही बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा ने सुबह 9:15 बजे से नदी तटीय क्षेत्रों और जोखिम वाले बस्तियों में रहने वाले लोगों को लगातार चेतावनी संदेश और एसएमएस भेजना शुरू कर दिया। 

महाशाखा ने नेपाल टेलिकम और एनसेल कंपनी के सहयोग से रसुवा, नुवाकोट, धादिङ और चितवन के जोखिम वाले क्षेत्रों के नागरिकों को कुल 6 लाख 79 हजार 295 पूर्वसूचना एसएमएस भेजे. इनमें नेपाल टेलिकम से 4 लाख 35 हजार 635 और एनसेल से 2 लाख 43 हजार 660 एसएमएस शामिल थे। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि समय पर भेजी गई इन पूर्वसूचनाओं के कारण बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। 

भूकंप से देवघाट तक बाढ़ की टाइमलाइन

सुबह 8:37 बजे: 4.4 रिक्टर स्केल का भूकंप दर्ज.

सुबह 8:50 बजे: भोटेकोशी स्याफ्रुबेँसी जलमापन केंद्र से आंकड़े मिलना बंद. अंतिम जलस्तर 1.62 मीटर था.

सुबह 9:00 बजे: रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय और बेत्रावती जलमापन केंद्र के कर्मचारियों से तिब्बत की ओर से भोटेकोशी में बड़ी बाढ़ आने की सूचना मिली.

सुबह 9:15–9:16 बजे: मुग्लिन तक त्रिशूली नदी के तटीय क्षेत्रों के लिए पहली उच्च-सतर्कता सूचना जारी की गई और 6.79 लाख एसएमएस भेजे गए.

सुबह 9:20 बजे: बेत्रावती जलमापन केंद्र ने काम करना बंद किया. अंतिम जलस्तर 3.55 मीटर दर्ज हुआ.

सुबह 10:28 बजे: बाढ़ धादिङ–गल्छी क्षेत्र के आसपास पहुंची. पृथ्वी राजमार्ग, मुग्लिन–नारायणगढ़ सड़क और त्रिशूली तटीय बस्तियों के लिए फिर चेतावनी जारी की गई.

सुबह 11:26 बजे: मलेखु के फुर्केखोला जलमापन केंद्र पर जलस्तर चेतावनी सीमा से ऊपर पहुंचा.

सुबह 11:43 बजे: जलस्तर खतरे की सीमा पार कर गया और कुछ ही समय बाद पुल सहित जलमापन केंद्र बाढ़ में बह गया.

सुबह 11:50 बजे: बाढ़ मलेखु बाजार क्षेत्र के आसपास पहुंची.

दोपहर 1:00 बजे: बाढ़ मुग्लिन बाजार पार कर गई.

दोपहर 1:35 बजे: चीन की ओर नदी रुकने से बनी झील पूरी तरह नहीं खुली होने और खतरा अभी कायम रहने की सूचना दोबारा जारी की गई.

दोपहर 2:14 बजे: कालीखोला जलमापन केंद्र पर जलस्तर खतरे की सीमा 12.1 मीटर पार कर 12.3 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंचा.

दोपहर 3:20 बजे: बाढ़ नारायणी–देवघाट क्षेत्र में पहुंची.

शाम 4:00 बजे: देवघाट जलमापन केंद्र पर जलस्तर 6.57 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद घटने लगा.

शाम 6:30 बजे: देवघाट में नदी का बहाव करीब 4 मीटर के सामान्य स्तर पर लौट आया.

चार जलमापन केंद्र बाढ़ में बहे
बाढ़ की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जलविज्ञान तथा जलस्रोत अनुसंधान केंद्र के अंतर्गत संचालित चार जलमापन केंद्र बाढ़ में पूरी तरह बह गए. इनमें रसुवा भोटेकोशी, रसुवा स्याफ्रुबेँसी, नुवाकोट बेत्रावती और धादिङ मलेखु (फुर्के) जलमापन केंद्र शामिल हैं. इनमें से कुछ केंद्र पुल सहित बाढ़ में बह गए. केंद्रों के नष्ट होने के कारण संबंधित क्षेत्रों से प्रत्यक्ष जलस्तर का आंकड़ा प्राप्त नहीं हो सका.

तकनीकी आकलन के अनुसार, बाढ़ की पूरी अवधि में केवल देवघाट जलमापन केंद्र से करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी बहने का अनुमान है.

महाशाखा ने रसुवागढ़ी सीमा से लेकर नेपाल–भारत सीमा तक के क्षेत्र को अति उच्च जोखिम, उच्च जोखिम और मध्यम जोखिम वाले क्षेत्रों में वर्गीकृत करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports